मल्टीबैगर स्टॉक का झांसा देकर करोड़ों डुबाए, ED ने 6 शहरों में एक साथ मारी रेड
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शेयर बाजार में कथित हेरफेर और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है. जांच एजेंसी ने 16 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र और गुजरात के 6 शहरों में 29 ठिकानों पर छापेमारी की. दो लिस्टेड कंपनियों के शेयरों के दाम व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए कृत्रिम रूप से बढ़ाए गए. इसके बाद शेयर 70 प्रतिशत गिर गए और एक लाख से अधिक छोटे निवेशक फंस गए. मामले में वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है.
शेयर बाजार में एक लाख निवेशकों को फंसाने पर ईडी का एक्शन, 6 शहरों में 29 ठिकानों पर रेड. (सांकेतिक फोटो : Made by AI)
मुंबई: प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के मुंबई जोनल ऑफिस-1 ने शेयर बाजार में कथित हेरफेर और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने 16 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र और गुजरात के 6 शहरों में 29 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. यह कार्रवाई महाराष्ट्र के मुंबई और नासिक में की गई है. इसके साथ ही गुजरात के अहमदाबाद और सूरत समेत गांधीनगर और भावनगर में भी तलाशी ली गई. जांच का सीधा संबंध दो लिस्टेड कंपनियों आर एम ड्रिप एंड स्प्रिंकलर्स सिस्टम्स लिमिटेड और आर एंड बी डेनिम्स लिमिटेड के शेयरों से है. यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत की गई है. जांच में सामने आया कि व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए टिप्स देकर एक लाख से ज्यादा खुदरा निवेशकों को फंसाया गया. इसके बाद शेयर 70 प्रतिशत तक गिर गए जिससे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ.
कंपनियों ने शेयरों के दाम बढ़ाने के लिए क्या खेल रचा था?
जांच में सामने आया कि अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच दोनों कंपनियों ने चुनिंदा लोगों और संस्थाओं को 3.5 करोड़ से अधिक शेयर और कन्वर्टिबल वारंट जारी किए. इन शेयरों के भुगतान में इस्तेमाल रकम आपस में जुड़े लोगों और कंपनियों के सीमित समूह से आई थी. इसके बाद आने वाले महीनों में दोनों कंपनियों के शेयरों की कीमतें लगातार बढ़ाई गईं. इस दौरान अधिकांश शेयर उन्हीं चुनिंदा लोगों के पास बने रहे.
व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए खुदरा निवेशकों को कैसे जाल में फंसाया?
ईडी के अनुसार दिसंबर 2025 के अंत से फरवरी 2026 के बीच मल्टीबैगर स्टॉक्स नाम के कम्युनिटी ग्रुप्स बनाए गए. इन ग्रुप्स के जरिए खुदरा निवेशकों को दोनों शेयर खरीदने के लिए रोजाना टिप्स भेजे जाते थे. इन ग्रुप्स को चलाने के लिए हरियाणा और मुंबई में दूसरे लोगों के नाम पर जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल हुआ. वहीं इन सभी ग्रुप्स का वास्तविक संचालन गुजरात के भावनगर से किया जा रहा था. इन संदेशों के असर से दोनों शेयरों में खरीदारों की संख्या 3,400 से बढ़कर सीधे एक लाख से अधिक हो गई.
ग्रुप डिलीट होते ही शेयरों में 70 फीसदी की गिरावट
जांच के मुताबिक 25 फरवरी 2026 को इन व्हाट्सएप ग्रुप्स को अचानक डिलीट कर दिया गया. ग्रुप बंद होते ही दोनों कंपनियों के शेयर लोअर सर्किट पर आ गए. इसके चलते कुछ ही दिनों में शेयरों की कीमत करीब 70 प्रतिशत तक लुढ़क गई. अचानक आई इस भारी गिरावट से एक लाख से अधिक छोटे निवेशकों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा. लोअर सर्किट लगने के कारण निवेशक ऐसे शेयरों में फंस गए जिन्हें वे बेच भी नहीं पा रहे थे.
ईडी ने छापेमारी के दौरान किन ठिकानों से क्या बरामद किया?
ईडी ने दोनों कंपनियों के दफ्तरों और उनके प्रमोटरों के आवासों पर तलाशी ली. इसके अलावा कम कीमत पर शेयर पाने वाले लोगों और स्टॉक-ब्रोकिंग फर्म्स के ठिकानों पर भी छापे मारे गए. प्रचार के लिए इस्तेमाल व्हाट्सएप ग्रुप संचालकों के परिसरों की भी जांच की गई. कार्रवाई के दौरान कई संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस के साथ शेयर लेनदेन के रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं. ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेनदेन की आगे जांच कर रही है.
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