शेयर बाजार में दिनभर शेयरों की खरीद-बिक्री के बाद आखिर में उनकी कीमत किस तरह तय होती है, इसमें जल्द बदलाव होने जा रहा है. बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS के नियमों में फिर बदलाव किया है. नए सिस्टम के तहत बाजार बंद होने से ठीक पहले शेयरों का क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए एक तय प्रक्रिया अपनाई जाएगी. इसका मकसद क्लोजिंग प्राइस तय करने के तरीके को ज्यादा बेहतर बनाना है. ज्यादातर नए नियम 7 दिसंबर 2026 से लागू होंगे, जबकि कुछ बदलाव फरवरी 2027 से प्रभावी होंगे.
इन बदलावों का असर शेयर बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों और ट्रेडर्स पर पड़ सकता है. खासकर वे लोग जो बाजार बंद होने के समय शेयर खरीदते या बेचते हैं, उन्हें नए समय और ऑर्डर से जुड़े नियम समझने होंगे. इसके अलावा, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) के एक्सपायरी वाले दिन सेटलमेंट की कैलकुलेशन का तरीका भी बदलेगा. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर शेयर का भाव अनिवार्य रूप से बढ़ेगा या घटेगा.
10 मिनट में तय होगा शेयरों का क्लोजिंग प्राइस
नए नियमों के तहत क्लोजिंग ऑक्शन सेशन हर कारोबारी दिन दोपहर 3:30 बजे से 3:40 बजे तक चलेगा. यानी शेयरों का अंतिम भाव तय करने के लिए 10 मिनट का अलग सेशन होगा. इस दौरान मिले ऑर्डरों के आधार पर क्लोजिंग प्राइस तय किया जाएगा.
इसके पहले मिनट यानी 3:30 से 3:31 बजे तक रेफरेंस प्राइस तय होगा. इसके लिए सामान्य ट्रेडिंग के आखिरी 15 मिनट का वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) लिया जाएगा. रेफरेंस प्राइस के आधार पर आगे ऑर्डरों की प्रक्रिया चलेगी. इसका फोकस दिन के अंत में शेयरों का भाव तय करने के लिए एक व्यवस्थित तरीका उपलब्ध कराना है.
कब तक डाल सकेंगे खरीदने और बेचने के ऑर्डर?
CAS में दोपहर 3:31 से 3:36 बजे तक निवेशक लिमिट और मार्केट, दोनों तरह के ऑर्डर डाल सकेंगे. लिमिट ऑर्डर में निवेशक अपनी पसंद की कीमत तय करता है, जबकि मार्केट ऑर्डर करेंट मार्केट प्राइस पर सौदा करने के लिए दिया जाता है. लेकिन 3:36 बजे के बाद नए मार्केट ऑर्डर डालने की सुविधा नहीं होगी. इस समय तक दिए गए मार्केट ऑर्डर में बदलाव करने या उन्हें कैंसिल करने की भी अनुमति नहीं होगी. ऑर्डर डालने की प्रक्रिया 3:38 से 3:40 बजे के बीच किसी भी समय बंद हो सकती है. इसके बाद ऑर्डर मैच होगा और शेयर का क्लोजिंग प्राइस निर्धारित किया जाएगा. इसलिए ट्रेडर्स को दिन के आखिरी मिनटों में ऑर्डर डालते समय नए समय और पाबंदियों का ध्यान रखना होगा.
F&O सेटलमेंट में क्या होगा बदलाव?
CNBC की रिपोर्ट के अनुसार, सेबी ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी F&O के एक्सपायरी वाले दिन सेटलमेंट की कैलकुलेशन में भी बदलाव किया है. अब एक्सपायरी के दिन डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट का सेटलमेंट CAS में तय क्लोजिंग प्राइस के आधार पर नहीं होगा. इसके लिए सामान्य ट्रेडिंग के निर्धारित समय का VWAP इस्तेमाल किया जाएगा. इंडेक्स डेरिवेटिव के मामले में इंडेक्स में शामिल शेयरों के आखिरी 30 मिनट के VWAP से निकली इंडेक्स वैल्यू के आधार पर कैलकुलेशन होगी. वहीं, स्टॉक डेरिवेटिव के लिए संबंधित शेयर का VWAP इस्तेमाल किया जाएगा.
ट्रेडिंग के समय में भी अंतर रहेगा. इंडेक्स डेरिवेटिव की ट्रेडिंग सामान्य दिनों में शाम 3:45 बजे तक चलेगी, लेकिन एक्सपायरी वाले दिन 3:30 बजे बंद हो जाएगी. स्टॉक डेरिवेटिव की ट्रेडिंग एक्सपायरी वाले दिन भी शाम 3:45 बजे तक जारी रहेगी.
फरवरी 2027 से लागू होंगे बाकि नियम
कुछ बदलाव 8 फरवरी 2027 से लागू होंगे. इनमें ऐसे एलिजिबिल लिमिट ऑर्डर और आइसबर्ग ऑर्डर से जुड़े नियम शामिल हैं, जिन्हें पूरा एग्जीक्यूट नहीं होने पर CAS में आगे ले जाने की व्यवस्था होगी. आइसबर्ग ऑर्डर में बड़े ऑर्डर को छोटे हिस्सों में दिखाया जाता है, ताकि पूरा ऑर्डर एक साथ बाजार के सामने न आए.
क्यों किया गया बदलाव?
SEBI के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा के बाद इन नियमों में बदलाव किया गया है. इसके लिए आम लोगों से मिले रिस्पांस, सेबी की सेकेंडरी मार्केट एडवाइजरी कमेटी की सिफारिशों और शेयर बाजारों के साथ हुई चर्चा को आधार बनाया गया. नए नियमों से बाजार बंद होने के समय क्लोजिंग प्राइस तय करने और F&O कॉन्ट्रैक्ट के सेटलमेंट की प्रक्रिया में बदलाव आएगा.