‘बमों की मां’ का भी बाप है परमाणु बम, अमेरिका का MOAB कितना ताकतवर, क्या ईरान पर गिराएंगे ट्रंप?

‘बमों की मां’ का भी बाप है परमाणु बम, अमेरिका का MOAB कितना ताकतवर, क्या ईरान पर गिराएंगे ट्रंप?


Mother Of all Bombs VS Nuclear Bomb: जब किसी बम का नाम ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ यानी सभी बमों की मां हो, तो उसकी ताकत के बारे में सोचना लाजमी है. अमेरिका के पास ऐसा ही एक बम है, जिसे MOAB कहा जाता है. हाल ही में एक रिपोर्ट आई है, जिसमें बताया गया कि ईरान के परमाणु ठिकानों के खिलाफ अमेरिका इसका इस्तेमाल कर सकता है. इसका वजन करीब 10 टन है और धमाका इतना ताकतवर होता है कि बड़े इलाके में भयानक तबाही मचा सकता है. लेकिन क्या यह परमाणु बम है या उसके जितना ही खतरनाक है? क्या इससे ईरान के जमीन के नीचे बने ठिकानों को तबाह किया जा सकता है? आइए जानें कि MOAB और परमाणु बम में क्या अंतर है?

MOAB बम आखिर है क्या?

MOAB का पूरा नाम GBU-43/B Massive Ordnance Air Blast है. शॉर्ट फॉर्म में इसे MOAB कहते हैं. आम तौर पर इसे ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स‘ कहा जाता है. इसका कुल वजन करीब 9,800 किलोग्राम है. इसमें लगभग 3,900 से 4,000 किलोग्राम विस्फोटक होता है. यह एक पारंपरिक बम है. यानी इसमें परमाणु विस्फोट नहीं होता. इसे खास तौर पर बड़े इलाके में जबरदस्त धमाका करने और जमीन के ऊपर मौजूद ठिकानों को नुकसान पहुंचाने के लिए बनाया गया है.

इस बम को विमान से गिराया जाता है. जमीन से टकराने के बाद ही धमाका करना इसका मुख्य तरीका नहीं है. यह जमीन से कुछ ऊपर हवा में विस्फोट कर सकता है. धमाके के कारण एक तेज लहर निकलती है जो आसपास के इलाके में फैलती है. इसकी वजह से इमारतों, ठिकानों और खुले इलाकों में भारी नुकसान हो सकता है. अमेरिका ने अप्रैल 2017 में अफगानिस्तान के नंगरहार में इस बम का इस्तेमाल इस्लामिक स्टेट के आतंकियों के खिलाफ किया था. युद्ध में इसके इस्तेमाल का यह पहला और अब तक का इकलौता मामला बताया जाता है.

परमाणु बम इससे कितना ज्यादा ताकतवर है?

MOAB का धमाका बहुत बड़ा होता है, लेकिन परमाणु बम की ताकत इससे कई गुना ज्यादा हो सकती है. इसे एक आसान उदाहरण से समझिए. जापान के हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम की ताकत करीब 15 किलोटन TNT के बराबर थी. इसका मतलब है कि उसके धमाके की ऊर्जा करीब 15,000 टन TNT के विस्फोट के बराबर थी. दूसरी ओर, MOAB की विस्फोटक ताकत करीब 11 टन TNT के बराबर बताई जाती है. इस हिसाब से हिरोशिमा के परमाणु बम से निकली ऊर्जा MOAB की तुलना में करीब 1,360 गुना थी.

अब तक का डेटोनेट किया गया सबसे बड़ा न्यूक्लियर बम. रूस के दागे गए बम का रेप्लिका. (Reuters)

नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बम की ताकत करीब 21 किलोटन थी. वहीं, इतिहास में अब तक टेस्ट किए गए सबसे शक्तिशाली परमाणु बमों में शामिल रूस के ‘जार बॉम्बा’ की ताकत करीब 50 मेगाटन थी. इन आंकड़ों से साफ है कि MOAB को कितना भी बड़ा बम क्यों न कहा जाए, उसकी तुलना परमाणु बम की ताकत से सीधे नहीं की जा सकती.

परमाणु बम ज्यादा खतरनाक क्यों होता है?

परमाणु बम और MOAB के बीच फर्क सिर्फ धमाके की ताकत का नहीं है. दोनों के काम करने का तरीका भी अलग है. MOAB में पारंपरिक विस्फोटक इस्तेमाल होता है. इसके फटने पर तेज धमाका होता है और हवा में दबाव की भयानक लहर फैलती है. इससे आसपास की इमारतें और दूसरी चीजें तबाह हो सकती हैं. परमाणु बम में परमाणु ऊर्जा निकलती है. इसके धमाके से तेज गर्मी और जबरदस्त दबाव पैदा होता है. इसके अलावा खतरनाक रेडिएशन भी निकलता है.

परमाणु बम कुछ इस तरह काम करता है. (AI जेनेरेटेड)

परमाणु विस्फोट के बाद रेडिएशन वातावरण में फैल सकते हैं, जिन्हें रेडियोएक्टिव फॉलआउट कहा जाता है. इसका असर सिर्फ धमाके के वक्त तक सीमित नहीं रहता. हालात के मुताबिक रेडिएशन इंसानों की सेहत और पर्यावरण को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकता है. MOAB में परमाणु बम जैसा परमाणु विस्फोट नहीं होता. इसलिए उससे परमाणु बम की तरह रेडियोएक्टिव फॉलआउट पैदा नहीं होता.

क्या MOAB जमीन के नीचे बने ठिकाने तबाह कर सकता है?

अगर ईरान के परमाणु ठिकानों की बात करें, तो यह सवाल और अहम हो जाता है. जमीन के काफी नीचे बने ठिकानों को तबाह करना आसान नहीं होता. ऊपर से किया गया बड़ा धमाका भी जरूरी नहीं कि गहराई में मौजूद जगह तक पहुंच सके. MOAB को मुख्य रूप से बड़े इलाके में धमाका करने के लिए बनाया गया है. यह जमीन के नीचे बहुत गहराई में मौजूद मजबूत ठिकानों को भेदने के लिए खास तौर पर तैयार किया गया बम नहीं है. अमेरिका के पास GBU-57 नाम का एक और बम है, जिसे Massive Ordnance Penetrator यानी MOP कहा जाता है. इसका वजन करीब 13,600 किलोग्राम है. इसे जमीन के नीचे बने मजबूत और सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचने के लिए बनाया गया है.



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