सीता ही नहीं, राम और लक्ष्मण भी बन रहीं बेटियां, नैनीताल की रामलीला दिखा रही महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर

सीता ही नहीं, राम और लक्ष्मण भी बन रहीं बेटियां, नैनीताल की रामलीला दिखा रही महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर


नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल की ऐतिहासिक रामलीला अब धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के साथ महिला सशक्तिकरण की भी मिसाल पेश कर रही है. मल्लीताल स्थित श्री राम सेवक सभा की रामलीला में करीब 70 प्रतिशत पात्रों की भूमिका बालिकाएं निभा रही हैं. खास बात यह है कि बेटियां अब सीता, कैकेयी और मंदोदरी जैसे महिला पात्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न जैसे प्रमुख पुरुष किरदारों को भी मंच पर जीवंत कर रही हैं. नैनीताल से शुरू हुई यह परंपरा अब कुमाऊं के दूसरे क्षेत्रों की रामलीलाओं में भी नजर आने लगी है. मंच पर बेटियों की बढ़ती भागीदारी बदलते सामाजिक नजरिये और उनके आत्मविश्वास की कहानी बयां कर रही है.

श्री राम सेवक सभा की रामलीला में भगवान राम की भूमिका निभा रहीं अनुष्का कोहली पिछले 14 वर्षों से अभिनय कर रही हैं. खास बात यह है कि उनके परिवार की बहनें भी रामलीला में अलग-अलग पात्र निभाकर इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं. अनुष्का ने बताया कि पहले उनकी चारों बहनें रामलीला में अभिनय करती थीं, लेकिन इस वर्ष किसी कारणवश एक बहन मंचन में भाग नहीं ले पा रही हैं. उनकी एक बहन लक्ष्मण का किरदार निभाती हैं, जबकि दूसरी शूर्पणखा, शबरी और कैकेयी जैसे अलग-अलग पात्रों में नजर आती हैं. उन्होंने कहा कि समय के साथ रामलीला में बालिकाओं की भागीदारी बढ़ी है. अब लड़कियां पुरुष पात्रों को भी बखूबी निभा रही हैं. भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न जैसे किरदारों में बेटियों का अभिनय दर्शकों के लिए खास आकर्षण बन रहा है.

सीता बनकर मंच पर अपनी प्रतिभा दिखा रहीं अनुसूया

रामलीला में सीता का किरदार निभा रहीं अनुसूया वर्मा पिछले तीन वर्षों से मंचन का हिस्सा हैं. उन्होंने बताया कि श्री राम सेवक सभा में रामलीला का माहौल काफी अच्छा है. यहां बालिकाओं को आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है. अनुसूया के अनुसार, रामलीला का उन्हें बेसब्री से इंतजार रहता है, क्योंकि इसके जरिए उन्हें मंच पर अपनी कलाकारी दिखाने का मौका मिलता है. उन्होंने कहा कि बालिकाएं भी सभी किरदारों को अच्छी तरह निभा सकती हैं. ऐसे आयोजनों से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें अपनी क्षमताओं को पहचानने का अवसर मिलता है.

पहली बार मंदोदरी बनीं निवेदिता

इस वर्ष रामलीला में मंदोदरी की भूमिका निभा रहीं निवेदिता उप्रेती पहली बार कलाकार के रूप में हिस्सा ले रही हैं. उन्होंने बताया कि वह बचपन से नैनीताल की रामलीला देखती आ रही हैं. जब भी वह लड़कियों को भगवान राम और लक्ष्मण जैसे प्रमुख किरदार निभाते देखती थीं, तो उन्हें काफी अच्छा लगता था. निवेदिता ने बताया कि इसी प्रेरणा से उन्होंने भी रामलीला में भाग लेने का निर्णय लिया. श्री राम सेवक सभा की वजह से उन्हें इस वर्ष मंदोदरी का किरदार निभाने का अवसर मिला, जिससे वह काफी खुश हैं. उन्होंने कहा कि रामलीला महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच भी देती है. निवेदिता ने युवाओं और Gen Z से अपील की कि उन्हें ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए, ताकि परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ अपनी प्रतिभा को भी निखारा जा सके.

30-40 वर्षों में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी

श्री राम सेवक सभा के पदाधिकारी मुकेश जोशी ‘मंटू’ बताते हैं कि पिछले 30 से 40 वर्षों में रामलीला में महिलाओं की भागीदारी में काफी बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने बताया कि नैनीताल में पार्वती बिष्ट, लीला ठठोला सहित कई महिलाओं ने अलग-अलग समय पर रामलीला में अभिनय किया है. स्थानीय बालिकाओं की भागीदारी ने इस परंपरा को और मजबूती दी है. मुकेश जोशी के अनुसार, अब केवल नैनीताल ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में आयोजित होने वाली रामलीलाओं में भी महिलाएं प्रमुख पात्रों की भूमिका निभा रही हैं. उन्होंने इसे समाज में आ रहे सकारात्मक बदलाव और महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया.

उन्होंने कहा कि रामलीला महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देने के साथ उन्हें सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करती है. नैनीताल की रामलीला लंबे समय से शहर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रही है. समय के साथ इसके मंच पर महिलाओं और बालिकाओं की भागीदारी बढ़ी है. नैनीताल से कुमाऊं के अन्य क्षेत्रों तक पहुंचती यह बदलाव की बयार धार्मिक परंपराओं को नई ऊर्जा देने के साथ बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर भी दे रही है.



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