Emotional Suppression And Thyroid : आज के समय में महिलाओं में थायराइड की समस्या एक महामारी की तरह फैल रही है. पुरुषों की तुलना में महिलाओं को यह बीमारी होने की आशंका कई गुना अधिक होती है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर महिलाओं में ही यह बीमारी इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है? क्या इसके पीछे सिर्फ हॉर्मोनल बदलाव हैं या फिर इसका संबंध महिलाओं के स्वभाव और उनकी दबी हुई भावनाओं से भी है?
जब कोई अत्यधिक तनाव में रहता है, तो शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन बढ़ जाते हैं. यह बढ़ा हुआ कोर्टिसोल मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस-पिट्यूटरी-एड्रेनालाईन (HPA) एक्सिस को बाधित करता है, जो सीधे तौर पर थायराइड हॉर्मोन्स (TSH, T3, T4) के संतुलन को बिगाड़ देता है.
जब कोई महिला लंबे समय तक अपनी बात खुलकर नहीं कह पाती या मानसिक तनाव को अंदर ही अंदर घोंटती रहती है, तो इसका असर सीधे तौर पर उनके हॉर्मोनल संतुलन और ‘थायराइड ग्लैंड’ पर पड़ता है.(Canva)
देश के जाने-माने एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. आलोक गुप्ता (सीनियर कंसलटेंट) का कहना है, “महिलाओं में थायराइड डिसऑर्डर (विशेषकर हाइपोथायराइडिज्म) के मामले तेजी से बढ़ने के पीछे सिर्फ शारीरिक कारण नहीं हैं, बल्कि यह उनकी जीवनशैली, लगातार बढ़ता तनाव और भावनाओं को दबाकर रखने (Suppressing emotions) की आदत से भी गहराई से जुड़ा हुआ है. जब कोई महिला लंबे समय तक अपनी बात खुलकर नहीं कह पाती या मानसिक तनाव को अंदर ही अंदर घोंटती रहती है, तो इसका असर सीधे तौर पर उनके हॉर्मोनल संतुलन और ‘थायराइड ग्लैंड’ पर पड़ता है.”
मीडियम की छपी खबर के मुताबिक, साइकोसोमैटिक मेडिसीन (Psychosomatic Medicine) और साइकोन्यूरोइम्यूनोलॉजी (Psychoneuroimmunology) यह मानती है कि लगातार भावनाओं, गुस्से या अपनी बात को अंदर ही अंदर घोंटकर रखना (Emotional Suppression) शरीर में एक प्रकार का गंभीर आंतरिक तनाव पैदा करता है. जब महिलाएं सामाजिक या पारिवारिक कारणों से अपनी भावनाओं को लगातार दबाती हैं, तो उनका तंत्रिका तंत्र (Nervous System) लगातार ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड में रहता है, जिससे हॉर्मोनल सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है.
Image : canva
क्या है वैज्ञानिक कारण-
मेडिकल साइंस के अनुसार, महिलाओं में थायराइड बढ़ने के पीछे निम्नलिखित मुख्य वैज्ञानिक कारण हैं:
- हॉर्मोनल उतार-चढ़ाव:
महिलाओं के जीवन में प्यूबर्टी, गर्भावस्था (Pregnancy), और मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन में बड़े बदलाव होते हैं, जो थायराइड ग्रंथी को संवेदनशील बना देते हैं. - ऑटोइम्यून बीमारियां:
महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) पुरुषों की तुलना में अधिक जटिल होती है. ‘हाशिमोटो थायराइडाइटिस’ (Hashimoto’s Thyroiditis) जैसी ऑटोइम्यून बीमारी महिलाओं में सबसे आम है, जिसमें शरीर की अपनी कोशिकाएं थायराइड पर हमला करने लगती हैं. - मल्टीटास्किंग का बोझ:
घर और दफ्तर के बीच संतुलन बनाने की दौड़ में महिलाएं अक्सर अपने मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे शरीर का कोर्टिसोल लेवल बिगड़ जाता है.
बचाव और समाधान:
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए केवल दवाइयां ही काफी नहीं हैं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव भी जरूरी है:
अपनी बात कहें (Express Yourself): अपने मन की भावनाओं को दबाएं नहीं, बल्कि अपनों के सामने खुलकर आएं या थेरेपी की मदद लें.
तनाव प्रबंधन जरूरी: योग, मेडिटेशन और नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं.
समय पर कराएं जांच: साल में कम से कम एक बार TSH, T3 और T4 की जांच जरूर कराएं.
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है. यह किसी भी तरह से योग्य डॉक्टरी सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है. स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श लें.