US Midterm Elections 2026 | 45 दिनों में होगा ट्रंप की किस्मत का फैसला, अमेरिका में बजा मिडटर्म चुनाव का बिगुल

US Midterm Elections 2026 | 45 दिनों में होगा ट्रंप की किस्मत का फैसला, अमेरिका में बजा मिडटर्म चुनाव का बिगुल


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक किस्मत का फैसला होने वाला है, और इसके लिए 45 दिनों की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. अमेरिका में मिडटर्म चुनावों का बिगुल बज चुका है और पूरे देश में चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा गया है. ये चुनाव ये तय करेगा कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बचे हुए समय में अमेरिकी संसद पर उनकी रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा रहेगा या फिर विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी बाजी मार ले जाएगी. इस समय देश में बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल के दाम और डांवाडोल अर्थव्यवस्था सबसे बड़े चुनावी मुद्दे बने हुए हैं, जो सीधे तौर पर ट्रंप की साख पर सवाल उठा रहे हैं.

अमेरिका के 20 राज्यों में बैलेट पेपर भेजने की शुरुआत

चुनाव का दिन आने में भले ही 45 दिन बाकी हों, लेकिन अमेरिका के 20 राज्यों ने अपने नागरिकों को डाक के जरिए बैलेट पेपर यानी वोटिंग पत्र भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इनमें टेक्सास, मिशिगन और नॉर्थ कैरोलिना जैसे बेहद अहम राज्य शामिल हैं. इन राज्यों में सीनेट की सीटों के लिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है.

आने वाले 15 दिनों के भीतर 13 और राज्य भी इसी प्रक्रिया से जुड़ जाएंगे और अपने-अपने नागरिकों के घरों तक बैलेट पेपर पहुंचाने लगेंगे. चुनावी एक्सपर्ट्स का कहना है कि 3 नवंबर की तारीख आने से पहले ही अमेरिका के करोड़ों नागरिक अपना वोट डाल चुके होंगे. अमेरिका में मेल-इन वोटिंग यानी घर बैठे डाक से वोट देने का क्रेज पिछले कुछ सालों में बहुत तेजी से बढ़ा है, और इस बार भी एक बहुत बड़ी आबादी इसी आसान तरीके से अपने वोट का इस्तेमाल कर रही है.

मिडटर्म चुनाव में होगा ट्रंप की किस्मत का फैसला

डाक से वोटिंग के अलावा, पोलिंग बूथ पर जाकर खुद वोट डालने यानी ‘अर्ली इन-पर्सन वोटिंग’ की भी शुरुआत हो चुकी है. ‘सेंटर फॉर इलेक्शन इनोवोशन एंड रिसर्च’ के आंकड़ों के अनुसार, आइडाहो, मिनेसोटा, साउथ डकोटा और वर्जीनिया में शुक्रवार से ही शुरुआती वोटिंग शुरू हो गई है.

इन चार राज्यों में लोग अभी से मतदान केंद्रों के बाहर कतारों में लगकर अपना वोट डाल रहे हैं. ये शुरुआती वोटिंग इस बात का साफ सबूत है कि चुनाव अब अपने सबसे अहम और आखिरी दौर में पहुंच चुका है. पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये पूरा मिडटर्म चुनाव असल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कामकाज पर जनता का सीधा फैसला होने वाला है. जनता उनके अब तक के फैसलों से कितनी खुश है या कितनी नाराज, इसकी झलक इन शुरुआती वोटों के रुझान से साफ मिलने लगेगी.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और चुनाव अधिकारियों को बड़ी राहत

लाखों लोग जो चुनाव से काफी दिन पहले ही अपना वोट डाल पा रहे हैं, उसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का एक हाल ही में सुनाया गया एक फैसला है. दरअसल, कुछ ही दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की उस कोशिश को पूरी तरह खारिज कर दिया था, जिसके जरिए वो मेल से वोट देने की प्रक्रिया पर पाबंदियां लगाना चाहते थे.

ट्रंप प्रशासन की मांग थी कि यूएस पोस्टल सर्विस (USPS) के जरिए भेजे जाने वाले सभी वोटों के लिए एक जैसा लिफाफा इस्तेमाल हो और मतदाताओं की एक लिस्ट ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की जाए. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को मानने से मना कर दिया और राज्यों को अपनी पुरानी व्यवस्था के हिसाब से ही काम करने की छूट दे दी.

अदालत के इस फैसले से चुनाव करवा रहे अधिकारियों ने राहत की सांस ली है. वाशिंगटन राज्य के पियर्स काउंटी की ऑडिट अधिकारी लिंडा फार्मर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद चुनाव अधिकारियों का बड़ा तनाव दूर हो गया है. उन्होंने बताया कि उनका विभाग लोगों को लगातार जागरूक कर रहा है कि उनके बैलेट पेपर समय पर घर पहुंच जाएंगे. साथ ही, ग्रामीण इलाकों में डाक में देरी की समस्या से बचने के लिए लोगों से अपील की जा रही है कि वो समय रहते अपना वोट वापस भेज दें या फिर बनाए गए स्पेशल ड्रॉप बॉक्स का इस्तेमाल करें.

महंगाई और आर्थिक चुनौतियां बनीं रिपब्लिकन पार्टी की सिरदर्दी

वोटिंग की शुरुआत का ये समय रिपब्लिकन पार्टी के लिए बहुत अच्छा नहीं माना जा रहा है. पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका की अर्थव्यवस्था को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं, वो ट्रंप और उनकी पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं. देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिर से बढ़ रही हैं, महंगाई काबू में नहीं आ रही है और घर खरीदने के लिए मिलने वाले होम लोन की ब्याज दरें भी आसमान छू रही हैं.

इन तमाम आर्थिक परेशानियों के बावजूद, रिपब्लिकन पार्टी के नेता जनता के सामने मजबूती दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. हाउस के स्पीकर माइक जॉनसन ने पत्रकारों से बात करते हुए दावा किया कि पार्टी को अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर चुनाव हारने का कोई डर नहीं है.

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आम लोगों का खर्चा कम करने के लिए लगातार नए और असरदार कदम उठा रही है. हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के इन बड़े-बड़े दावों के बीच, चुनाव से ठीक पहले सांसदों को तय समय से पहले ही छुट्टी दे दी गई है, ताकि वो अपने-अपने इलाकों में जाकर वोटरों को साध सकें.

ओपिनियन पोल में डेमोक्रेटिक पार्टी को सीधी बढ़त

रिपब्लिकन पार्टी के मिडटर्म सम्मेलन के खत्म होने के बाद भी उनके लिए सर्वे के आंकड़े बहुत अच्छे संकेत नहीं दे रहे हैं. आमतौर पर किसी भी बड़े राजनीतिक सम्मेलन के बाद पार्टियों की लोकप्रियता में जो उछाल आता है, वो इस बार रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में नहीं दिखा है.

‘रियल क्लियर पॉलिटिक्स’ के नए ओपिनियन पोल के मुताबिक, जब लोगों से पूछा गया कि वो किस पार्टी को अपना वोट देंगे, तो डेमोक्रेटिक पार्टी रिपब्लिकन से लगभग 9 प्रतिशत अंकों से आगे चल रही है. हाउस में मेजॉरिटी लीडर हकीम जेफरीज ने दावा किया है कि इस वक्त हर बड़े मुद्दे पर जनता उनके साथ खड़ी है. जेफरीज का कहना है कि चाहे बात देश की अर्थव्यवस्था की हो, इलाज और स्वास्थ्य सुविधाओं की हो या फिर ईरान के साथ चल रहे तनाव की, हर मोर्चे पर लोग डेमोक्रेट्स की नीतियों पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं.

ट्रंप की रणनीतियां और मेल-इन वोटिंग का बढ़ता ट्रेंड

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अच्छी तरह जानते हैं कि अगर संसद पर अपनी पार्टी का कब्जा बनाए रखना है, तो मुकाबला आसान नहीं रहने वाला है. यही वजह है कि उन्होंने चुनाव का रुख अपनी तरफ मोड़ने के लिए कई राजनीतिक चालें चलीं. उन्होंने कई राज्यों के चुनावी नक्शों को अपने हिसाब से नए सिरे से बनवाए, जिससे रिपब्लिकन उम्मीदवारों को थोड़ा फायदा जरूर मिला. लेकिन डाक से वोटिंग रोकने की उनकी चाल को कोर्ट ने नाकाम कर दिया.

हैरानी की बात ये है कि ट्रंप खुद भी कई बार डाक के जरिए वोट डाल चुके हैं, लेकिन वो जनसभाओं में अक्सर मेल-इन वोटिंग की बुराई करते रहते हैं. उनका आरोप रहता है कि डाक से वोटिंग में धांधली हो सकती है, हालांकि इसका कोई ठोस सबूत वो कभी नहीं दे पाए.

क्या है अमेरिका की जनता का मूड?

दूसरी तरफ, अमेरिका की आम जनता के बीच डाक से वोट देने का तरीका बेहद पसंदीदा बनता जा रहा है. कोरोना काल के बाद से इसमें भारी उछाल देखा गया था. साल 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में भी लगभग एक-तिहाई वोट डाक के जरिए ही पड़े थे. आज आलम ये है कि अमेरिका के 8 राज्यों और वाशिंगटन में तो हर रजिस्टर्ड वोटर को सीधा उनके घर पर ही बैलेट पेपर भेज दिया जाता है.

कुल मिलाकर देखा जाए तो अमेरिका के ये मिडटर्म चुनाव सिर्फ ये तय नहीं करेंगे कि संसद में कौन सी पार्टी बैठेगी, बल्कि ये भी तय करेंगे कि आने वाले दो सालों में ट्रंप आसानी से सरकार चला पाएंगे या हर मोड़ पर उन्हें विपक्ष की कड़ी रुकावटों का सामना करना पड़ेगा. 45 दिनों की ये उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और देखना होगा कि अमेरिकी जनता इस बार किसके सिर पर जीत का ताज सजाती है.



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