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Sarkari Sambal Yojana: बिहार के पूर्णिया की दिव्यांग छात्रा ज्योति कुमारी को संबल योजना के तहत ट्राई साइकिल मिली, जिससे उनकी कॉलेज और कोचिंग की पढ़ाई आसान हो गई. अब वह आत्मनिर्भर बनकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं और अधिकारी बनने का सपना देख रही हैं.
पूर्णिया: बिहार सरकार की योजनाएं जरूरतमंद और पात्र लोगों के लिए किस तरह सहारा बन सकती हैं. इसकी मिसाल पूर्णिया की ज्योति कुमारी हैं. आदर्श नगर की रहने वाली ज्योति बचपन से एक पैर से दिव्यांग हैं. कभी कॉलेज, कोचिंग या ट्यूशन जाने के लिए उन्हें दूसरों का सहारा लेना पड़ता था. कई बार लोगों की बातें भी सुननी पड़ती थीं. आने-जाने में ऑटो और ई-रिक्शा का किराया भी उनके लिए अतिरिक्त बोझ बन जाता था. लेकिन पढ़ाई करने और आगे बढ़ने का उनका सपना कभी कमजोर नहीं पड़ा. करीब दो साल पहले बिहार सरकार की संबल योजना के तहत उन्हें ट्राई साइकिल मिली. इसके बाद उनकी जिंदगी काफी आसान हो गई. अब वह इसी ट्राई साइकिल से रोजाना अपने घर से पूर्णिया के महिला कॉलेज जाती हैं. पढ़ाई के साथ-साथ कोचिंग व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रही हैं.
ट्राई साइकिल मिली तो आसान हुई पढ़ाई
ज्योति बताती हैं कि बचपन से ही एक पैर से दिव्यांग होने के कारण उन्हें एक जगह से दूसरी जगह जाने में काफी परेशानी होती थी. परिवार में चार सदस्य हैं, लेकिन उन्हें हर जगह ले जाने के लिए हमेशा किसी का साथ मिलना संभव नहीं था. ऐसे में उन्हें ऑटो या ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ता था. जिसमें सामान्य से अधिक किराया भी खर्च हो जाता था. इसके बावजूद ज्योति ने पढ़ाई नहीं छोड़ी. उनका सपना पढ़-लिखकर एक अच्छी नौकरी हासिल करना है. वह बताती हैं कि अगर उन्हें सरकार की ओर से ट्राई साइकिल नहीं मिली होती, तो शायद उनके लिए पढ़ाई जारी रखना काफी मुश्किल हो जाता.
अब कॉलेज से लेकर कोचिंग तक खुद जाती हैं
संबल योजना के तहत पूर्णिया के बुनियादी केंद्र से मिली ट्राई साइकिल अब ज्योति की पढ़ाई का सबसे बड़ा सहारा बन गई है. वह रोजाना इसी से आदर्श नगर स्थित अपने घर से महिला कॉलेज जाती हैं. कॉलेज के बाद ट्यूशन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी शहर के अलग-अलग स्थानों पर खुद जाती हैं. पहले जहां बाहर निकलने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर रहना पड़ता था. वहीं अब वह अपनी जरूरत के मुताबिक अकेले ही आ-जा सकती हैं.
पढ़ाई छोड़ने की नौबत थी, अब अफसर बनने का सपना
ज्योति कहती हैं कि एक समय ऐसा था जब परिस्थितियों के कारण उन्हें नौवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ने का विचार करना पड़ा था. लेकिन सरकारी मदद मिलने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने दोबारा अपने सपनों को पूरा करने की ठानी. आज ज्योति बीए थर्ड ईयर की पढ़ाई कर रही हैं. साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटी हैं. उनका लक्ष्य पढ़-लिखकर एक बड़े अधिकारी के रूप में देश की सेवा करना है. ज्योति बिहार सरकार की संबल योजना के तहत मिली ट्राई साइकिल के लिए सरकार का आभार जताती हैं. उनका कहना है कि यह सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं. मेरे लिए आत्मनिर्भरता और सपनों की उड़ान का जरिया बन गई है. अब ज्योति को किसी के सहारे की जरूरत नहीं. उनकी ट्राई साइकिल के पहिए उन्हें रोज उनके सपने के थोड़ा और करीब ले जा रहे हैं.