छत्तीसगढ़ के इस गांव में रोज शाम 4 बजे गूंजता है वंदे मातरम्, 20 लाउडस्पीकर से जुड़ते हैं 7 हजार लोग

छत्तीसगढ़ के इस गांव में रोज शाम 4 बजे गूंजता है वंदे मातरम्, 20 लाउडस्पीकर से जुड़ते हैं 7 हजार लोग


एक गांव… करीब 7 हजार की आबादी… खेतों में काम करते किसान, दुकानों पर कारोबार करते व्यापारी और घरों में अपने काम में जुटी महिलाएं… लेकिन हर शाम 4 बजते ही यहां एक ऐसा नजारा दिखाई देता है, जो देशभक्ति की अनूठी मिसाल बन गया है. घड़ी में शाम के 4 बजते ही गांव में लाउडस्पीकर से वंदे मातरम् की आवाज गूंजती है और देखते ही देखते लोग अपने काम रोककर सम्मान के साथ खड़े हो जाते हैं.

स्कूल के बच्चे हों या खेतों में पसीना बहाते किसान, दुकानदार हों या घरों में काम करती महिलाएं, हर कोई इस सामूहिक गायन का हिस्सा बनता है.  कोई खास दिन, न कोई राष्ट्रीय पर्व और न ही किसी आयोजन का इंतजार.यह सिलसिला हर दिन जारी रहता है. वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की स्वीकृति से शुरू हुई यह पहल अब गांव की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है. आखिर कैसे एक गीत ने करीब 7 हजार लोगों को एक सूत्र में बांध दिया है और क्यों लखराम गांव की यह पहल लोगों के बीच चर्चा का विषय बन रही है?

शाम 4 बजते ही थम जाते हैं रोजमर्रा के काम

शाम के 4 बजते ही लखराम गांव की तस्वीर बदलने लगती है. खेतों में काम कर रहे किसान अपने हाथ रोक लेते हैं, दुकानों पर बैठे व्यापारी ठहर जाते हैं और घरों में काम कर रही महिलाएं भी अपनी जगह खड़ी हो जाती हैं. स्कूल के बच्चे भी सामूहिक गायन में शामिल होते हैं. कुछ ही पलों में गांव का माहौल देशभक्ति से सराबोर हो जाता है. खास बात यह है कि यह नजारा किसी विशेष आयोजन या राष्ट्रीय पर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि हर दिन देखने को मिलता है.

20 से ज्यादा लाउडस्पीकर से गूंजता है वंदे मातरम्

करीब 7 हजार की आबादी वाले लखराम गांव में हर व्यक्ति तक वंदे मातरम् की आवाज पहुंचाने के लिए 20 से ज्यादा लाउडस्पीकर लगाए गए हैं. जैसे ही शाम के 4 बजते हैं और लाउडस्पीकर से गीत गूंजता है, लोग अपने काम रोककर सामूहिक गायन के लिए खड़े हो जाते हैं. गांव के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ गूंजती यह आवाज लोगों को देशभक्ति के एक साझा भाव से जोड़ती है.

ग्राम सभा और पंचायत की स्वीकृति से शुरू हुई पहल

ग्रामीणों ने बताया कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की स्वीकृति से इस पहल की शुरुआत की गई. धीरे-धीरे यह प्रयास गांव की रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बन गया. अब शाम के 4 बजते ही लोगों को सामूहिक गायन का समय याद आ जाता है. गांव में इस परंपरा को आगे बढ़ाने में लोगों की भागीदारी अहम भूमिका निभा रही है.

देशभक्ति के साथ अनुशासन की भी मिसाल

किसी गांव में रोजमर्रा के काम रोककर एक साथ खड़े होना आसान नहीं है, लेकिन लखराम में लोग इस पहल से जुड़ रहे हैं. खेतों से लेकर बाजार और घरों तक, हर जगह लोग सामूहिक गायन में अपनी भागीदारी निभाते हैं. गांव से गुजरने वाले या यहां आने वाले लोग जब यह नजारा देखते हैं, तो इस अनूठी परंपरा के बारे में जानने के लिए उत्सुक हो जाते हैं. यह पहल देशभक्ति के साथ सामूहिकता और अनुशासन का संदेश भी देती है.

हर शाम एक संदेश, वंदे मातरम्

बिलासपुर जिले के बिल्हा ब्लॉक के लखराम गांव की यह पहल अब उसकी अलग पहचान बनती जा रही है. शाम के 4 बजते ही करीब 7 हजार की आबादी वाले गांव में एक ही गीत की आवाज सुनाई देती है. यहां देशभक्ति केवल नारों तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनती नजर आती है. लखराम की यह अनूठी पहल एक संदेश देती है कि जब पूरा गांव किसी साझा भावना से जुड़ता है, तो एक छोटी-सी शुरुआत भी बड़ी मिसाल बन सकती है. हर शाम गांव की गलियों में गूंजता वंदे मातरम् लोगों को एकता और देशप्रेम का संदेश दे रहा है.



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