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आईएएस से इस्तीफा दे चुकीं दिव्या मित्तल अब मिर्जापुर नगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी. दिव्या मित्तल जिस पार्टी का ऐलान करने वाली हैं, उसका नाम जनता शक्ति पार्टी होगा. मिर्जापुर नगर विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है. मौजूदा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसी सीट से चुनाव जीतकर अपनी राजनीति को नई दिशा दी है.
मिर्जापुर नगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी दिव्या मित्तल.
मिर्जापुरः आईएएस पद से इस्तीफा दे चुकीं दिव्या मित्तल ने अब पूर्ण रूप से राजनीति में कदम रख दिया है. दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी. साथ ही उन्होंने अपनी पार्टी का नाम जनता शक्ति पार्टी रखा है. दिव्या मित्तल जनता शक्ति पार्टी के टिकट पर मिर्जापुर सदर सीट से चुनाव लड़ेंगी. अब सवाल यह है कि आखिर दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर सदर सीट को ही क्यों चुना.
फूलन देवी से लेकर अनुप्रिया पटेल तक को मिर्जापुर ने दिलाई पहचान
विंध्य पर्वत श्रृंखला की गोद में बसा मिर्जापुर धार्मिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक, तीनों ही दृष्टिकोण से खास महत्व है. मां विंध्यवासिनी धाम होने कारण इसे विंध्यधाम के नाम से भी जाना जाता है. इसी मिर्जापुर ने यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री पंडित कमलापति त्रिपाठी, पूर्व सांसद फूलन देवी, बालकुमार पटेल और मौजूदा केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल को राष्ट्रीय राजनीति में अलग पहचान दिलाई है. बता दें कि मिर्जापुर में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं, जिनमें मिर्जापुर नगर, मझवां, चुनार, मड़िहान और छानबे (आरक्षित) शामिल हैं.
मिर्जापुर नगर सीट का क्या है इतिहास
इनमें सबसे अहम सीट जो है, वह है मिर्जापुर नगर विधानसभा सीट. राजनीतिक तौर पर यह सीट काफी अहम है. मिर्जापुर नगर विधानसभा का राजनीतिक इतिहास भी बहुत रोचक है. वर्ष 1977 में जनता पार्टी के टिकट से विधायकी का चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक यात्रा को नई दिशा दी. इस सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम कमलापति त्रिपाठी के पौत्र ललितेश पति त्रिपाठी और राजेश पति त्रिपाठी ने भी चुनाव लड़ा, हालांकि उनको जीत नहीं मिल पाई.
2002 से लेकर 2012 तक मिर्जापुर नगर पर रहा सपा का दबदबा
मिर्जापुर नगर विधानसभा सीट पर साल 2002 से लेकर 2012 तक समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा. समाजवादी पार्टी के नेता कैलाश नाथ चौरसिया लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव जीता. तब मिर्जापुर नगर सीट समाजवादी पार्टी की सबसे सुरक्षित सीट मानी जाती थी. हालांकि 2017 से इस सीट पर भाजपा का कब्जा है. भाजपा के उम्मीदवार रत्नाकर मिश्रा 2017 और 2022 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं. 2017 में कैलाश नाथ चौरसिया को रत्नाकर मिश्रा ने 57 हजार 412 वोटं से हराया था. वहीं 2022 के चुनाव में रत्नाकर मिश्रा ने एक बार फिर कैलाशनाथ चौरसिया को 38 हजार 876 वोटों से हराया.
दिव्या मित्तल के सामने क्या चैलेंज
आईएएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में आईं दिव्या मित्तल के सामने कई चुनौतियां हैं. दिव्या मित्तल के सामने जो चुनौती है, वह हैं प्रतिद्वंद्वी. दिव्या मित्तल के सामने सपा के कैलाश नाथ चौरसिया और भाजपा के रत्नाकर मिश्रा हो सकते हैं. जिनकी अपनी-अपनी राजनीतिक पैठ है. इसके अलावा नई पार्टी होने के कारण दिव्या मित्तल को दूसरी पार्टियों के मुकाबले ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी.
दिव्या मित्तल के लिए क्यों फायदेमंद है मिर्जापुर नगर विधानसभा सीट
दिव्या मित्तल ने जिस मिर्जापुर नगर विधानसभा सीट को चुना है, वह वैश्य बाहुल्य सीट है. यहां वैश्य मतदाताओं की संख्या करीब डेढ़ लाख से ज्यादा है. यानी कि 30 फीसदी से अधिक मतदाता हैं. इस सीट पर वैश्य समाज निर्णायक वर्ग है. वैसे तो दिव्या मित्तल की जाति को लेकर कोई खास जानकारी नहीं है. लेकिन मित्तल जाति वैश्य व बनिया समाज से आता है. इसके अलावा इस सीट पर सर्वण की आबादी लगभग 1 लाख के आसपास है. जिसमें ब्राह्मण 50000 से अधिक हैं. वहीं मुस्लिम मतदाता भी 50 हजार से अधिक हैं. इसके अलावा दलित जाति के मतदाता लगभग 40 हजार से 45000 के आसपास हैं. वहीं ओबीसी में यादव मतदाता 20 हजार से 25 हजार हैं. बिंद, निषाद, मौर्य और पटेल मिलाकर करीब 80 हजार मतादात हैं. कायस्थ 10 हजार से 15000 वोटर्स हैं. चौरसिया 10 हजार से कम हैं.