दुर्गा विसर्जन कब है? 2 घंटे 16 मिनट मुहूर्त, जानें तारीख, श्रवण नक्षत्र समय
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Durga Visarjan 2026 Date: आश्विन शुक्ल षष्ठी तिथि से दुर्गा पूजा शुरू होती है. 4 दिन मां भक्तों के पास रहती हैं, उसके बाद दशमी को विदा होती हैं. दशमी को जब श्रवण नक्षत्र होता है तो विजयादशमी मनाते हैं. उस दिन दुर्गा विसर्जन करते हैं. इस साल दुर्गा विसर्जन के लिए 2 घंटे 16 मिनट का मुहूर्त है.
दुर्गा विसर्जन 2026 तारीख और मुहूर्त क्या है? (Photo: AI)
Durga Visarjan 2026 Date: दुर्गा पूजा का प्रारंभ आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से होता है. इसे महाषष्ठी कहते हैं. मां दुर्गा 3 दिनों तक घर में विराजमान रहती हैं, उसके बाद विजयादशमी को दुर्गा विसर्जन होता है. जो लोग अपने घरों या पंडालों में मां दुर्गा की मूर्तियां रखते हैं, वे दशमी को किसी नदी या तालाब में उनका विर्सजन करते हैं. इस बार दुर्गा विसर्जन पर रवि योग बन रहा है और दुर्गा विसर्जन का मुहूर्त 2 घंटे 16 मिनट का है. आइए जानते हैं दुर्गा विसर्जन की तारीख और मुहूर्त के बारे में.
दुर्गा विसर्जन 2026 तारीख
वैदिक पंचांग के अनुसार, दुर्गा विसर्जन के लिए आश्विन शुक्ल दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर में 12 बजकर 50 मिनट से शुरू होगी और यह 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट तक रहेगी.
उदयातिथि के अनुसार, दशमी तिथि 21 अक्टूबर दिन बुधवार को है. लेकिन दशमी तिथि में श्रवण नक्षत्र हो तो विजयादशमी मनाते हैं. इस नियम के अनुसार श्रवण नक्षत्र 19 अक्टूबर को दोपहर 03 बजकर 38 मिनट से 20 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 02 मिनट तक है.
श्रवण नक्षत्र दशमी तिथि में 20 अक्टूबर को प्राप्त है, इसलिए विजयादशमी 20 अक्टूबर को है और उस दिन दुर्गा विसर्जन होगा.
दुर्गा विसर्जन 2026 मुहूर्त
20 अक्टूबर को दुर्गा विसर्जन का मुहूर्त दोपहर में 1 बजकर 14 मिनट से है. यह मुहूर्त दोपहर 3 बजकर 30 मिनट तक है. ऐसे में मां दुर्गा की मूर्तियों के विसर्जन के लिए 2 घंटे 16 मिनट का समय मिलेगा.
दुर्गा विसर्जन के दिन अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 43 ए एम से दोपहर 12 बजकर 28 पी एम तक रहेगा. वहीं स्नान के लिए उत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त 04:44 ए एम से 05:34 ए एम तक है.
रवि योग में दुर्गा विसर्जन
दुर्गा विसर्जन के दिन पूरे समय रवि योग बना रहेगा. इस बार दुर्गा जी की स्थापना और विदाई दोनों ही रवि योग में होगा.
मां दुर्गा की मूर्तियों को ढोल नगाड़ों की गूंज के बीच तालाब, नदी या किसी बहते जल स्रोत के पास ले जाते हैं. वहां पर पूजा में अपनी गलतियों के लिए माफी मांगते हैं और देवी मां को अगले साल फिर आने की प्रार्थना के साथ विसर्जन कर देते हैं.