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Jalore Castor Cultivation: राजस्थान के जालोर जिले में इस बार बारिश कम होने से खेती-किसानी पर असर पड़ा है. ऐसे में अरंडी की फसल किसानों के लिए उम्मीद का सहारा बनी हुई है. अरंडी की जड़ें जमीन में गहराई तक जाती हैं, जिससे पौधा मिट्टी में मौजूद नमी का उपयोग कर सकता है. यही वजह है कि सीमित बारिश और कम सिंचाई वाले क्षेत्रों में भी किसान इसकी खेती को प्राथमिकता देते हैं. हालांकि, फसल की अच्छी बढ़वार और बीजों के विकास के लिए जरूरी नमी मिलना भी अहम है. अरंडी के बीजों से तेल निकाला जाता है, जिसका इस्तेमाल साबुन, कॉस्मेटिक और कई औद्योगिक उत्पादों में होता है. व्यावसायिक उपयोग और बाजार में मांग के कारण यह फसल किसानों के लिए आमदनी का एक महत्वपूर्ण विकल्प मानी जाती है. इस बार कम बारिश के बावजूद जालोर के किसानों को अरंडी की फसल से अच्छी पैदावार और बेहतर कमाई की उम्मीद है.
जालोर. राजस्थान के जालोर में इस बार बारिश का साथ कम मिला है. ऐसे में कम पानी में तैयार होने वाली अरंडी की फसल किसानों के लिए सहारा बनी हुई है. जिले के कई इलाकों में किसान अरंडी की खेती करते हैं और सीमित पानी के बीच भी इससे अच्छी पैदावार की उम्मीद रखते हैं. अरंडी की सबसे खास बात इसकी जड़ें हैं. इसकी जड़ें जमीन में गहराई तक जाती है, जिससे पौधा मिट्टी में मौजूद नमी का उपयोग कर सकता है.
यही वजह है कि कम बारिश और सीमित सिंचाई वाले इलाकों में भी अरंडी की खेती की जाती है. हालांकि ऐसा नहीं है कि अरंडी को पानी की जरूरत नहीं होती. फसल की अच्छी बढ़वार और बीज भरने के समय पर्याप्त नमी जरूरी होती है. किसानों के लिए अरंडी इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका इस्तेमाल सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है. अरंडी के बीजों से तेल निकाला जाता है. इस तेल का इस्तेमाल कई तरह के उत्पादों और उद्योगों में किया जाता है.
औद्योगिक उत्पादों में अरंडी के तेल का होता है उपयोग
साबुन, कॉस्मेटिक और कुछ औद्योगिक उत्पादों में भी अरंडी के तेल का उपयोग होता है. इसकी मांग के कारण अरंडी किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक फसल मानी जाती है. जालोर जैसे इलाकों में जहां पानी खेती के लिए एक बड़ी चुनौती है, वहां किसान ऐसी फसलों को प्राथमिकता देते हैं जिनमें सिंचाई की जरूरत दूसरी फसलों से कम हो. अरंडी इसी वजह से किसानों के बीच अपनी जगह बनाए हुए है. अरंडी की फसल में किसानों को मौसम और बाजार भाव दोनों का ध्यान रखना पड़ता है.
कम पानी में भी कर सकते हैं अरंडी की खेती
बारिश कम होने पर पानी की कमी की चिंता रहती है, वहीं ज्यादा बारिश या खेत में पानी जमा होने से फसल को नुकसान हो सकता है, इसलिए फसल में जरूरत के हिसाब से पानी देना जरूरी है. जालोर में अरंडी किसानों के लिए एक खास फसल है. कम पानी में भी इसकी खेती की जा सकती है. इसके बीजों से तेल निकलता है, जिसका कई जगह इस्तेमाल होता है. बाजार में इसकी मांग भी रहती है. यही वजह है कि इस बार कम बारिश के बावजूद किसानों को अरंडी की फसल से अच्छी उम्मीद है.