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भोपाल में आदिवासी छात्रों की एक पुलिस कर्मी से बहस हो गई. इसके बाद माहौल गरमा गया है. दरअसल जब आदिवासी छात्र प्रदर्शन कर रहे थे, तो पुलिसवाले को देखकर उन्होंने जय जोहार किया. इसके बाद टीआई रतन सिंह परिहार बुरी तरह से गुस्सा हो गए और गाली-गलौज पर उतर आए. अब इसका एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसके बाद जीतू पटवारी ने भी निशाना साधा है.
जय जोहार सुनते ही टीआई को आया गुस्सा
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में खाकी और आदिवासियों के स्वाभिमान के बीच उपजा विवाद तूल पकड़ता जा रहा है. आदिवासी छात्र छात्राएं अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन इस दौरान पुलिस के एक रवैये ने पूरे प्रदेश की राजनीतिक फिजा को गरमा दिया है. मामला सिर्फ विरोध प्रदर्शन का नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के पारंपरिक अभिवादन ‘जय जोहार’ के अपमान से जुड़ा है.
जय जोहार सुनते ही बुरी तरह से भड़के टीआई रतन सिंह परिहार
बताया जा रहा है कि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के छात्र संगठन के युवा अपनी कुछ समस्याओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. यह प्रदर्शन पूरी तरह अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने के लिए था. जब पुलिस इन छात्रों को हिरासत में लेकर गाड़ी में बैठा रही थी, तब कुछ छात्रों ने अपनी संस्कृति के मुताबिक आदर और एकता का प्रतीक ‘जय जोहार’ का नारा लगाया. यह सुनकर ड्यूटी पर तैनात मिसरोद थाना प्रभारी (TI) रतन सिंह परिहार बुरी तरह भड़क गए. उन्होंने कहा कि यही कूट दूंगा.
वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा है कि थानेदार ने आपा खोते हुए छात्रों के साथ बेहद आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया. आदिवासी समाज में जिस ‘जय जोहार’ को प्रकृति, प्रेम और भाईचारे का सम्मान माना जाता है, उसे लेकर पुलिस अधिकारी की यह गलत भाषा तुरंत आग की तरह फैल गई.
जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा
घटना का वीडियो सामने आते ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और दूसरे विपक्षी नेताओं ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला है. जीतू पटवारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि ‘जय जोहार’ सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक है. उन्होंने मांग की कि इस तरह की अभद्रता करने वाले पुलिस अधिकारी पर तुरंत एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए.
प्रशासन ने की कार्रवाई
मामले के तूल पकड़ने और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद शासन स्तर पर तुरंत एक्शन लिया गया. मुख्यमंत्री मोहन यादव के संज्ञान लेने के बाद आरोपी थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया गया है और विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं. भले ही प्रशासनिक स्तर पर टीआई को लाइन हाजिर या सस्पेंड कर दिया गया हो, लेकिन आदिवासी संगठन FIR दर्ज करने की मांग कर रहे हैं.