झारखंड के इस मंदिर में दर्शन मात्र से दूर होता है मांगलिक दोष, नवरात्रि में अनोखी बलि की परंपरा

झारखंड के इस मंदिर में दर्शन मात्र से दूर होता है मांगलिक दोष, नवरात्रि में अनोखी बलि की परंपरा


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झारखंड के इस मंदिर में दर्शन मात्र से दूर होता है मांगलिक दोष, जानें महिमा

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झारखंड के पलामू स्थित मंगला गौरी मंदिर में दर्शन मात्र से मांगलिक दोष दूर होने की मान्यता है. नवरात्रि के दौरान यहां बलि की अनोखी परंपरा है. इसमें पशुओं की जगह नारियल और भतुआ चढ़ाया जाता है. जिससे खून नहीं बहता। मंदिर में कई देवी-देवता स्थापित हैं.

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पलामूः दुर्गा पूजा को लेकर मंदिरों में विशेष तैयारियां की जाती हैं. नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना होती है. इस दौरान श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचकर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं. वहीं झारखंड के पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर में एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जहां मां के दर्शन मात्र से मांगलिक दोष दूर होने की मान्यता है. खास बात यह है कि यहां नवरात्रि के अवसर पर बलि देने की भी अनोखी परंपरा है. लेकिन इस बलि में खून की एक बूंद भी नहीं बहती है.

नारियल और भतुआ की बलि
दरअसल, यहां पशुओं की जगह नारियल और भतुआ की बलि दी जाती है. यह मंदिर छह मुहान चौक स्थित प्रसिद्ध मंगला गौरी मंदिर है, जहां सालों भर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है. पलामू जिला मुख्यालय के छह मुहान चौक स्थित मंगला गौरी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. मंदिर की मान्यता बेहद प्राचीन बताई जाती है. यहां गर्भगृह में मां भगवती प्राकृतिक स्वरूप में पिंड के रूप में विराजमान हैं.

पुजारी ने बताया कि मंदिर परिसर में बाबा बैद्यनाथ, बाबा विश्वनाथ और मां मंगला काली का दरबार भी है. वहीं मां दक्षिणेश्वर काली के साथ मां मंगला काली की विशेष पूजा-अर्चना होती है. मंदिर का विकास वर्ष 1953 से 1980 के बीच हुआ, जिसके बाद यह भव्य धार्मिक स्थल के रूप में स्थापित हुआ. धार्मिक परंपरा के अनुसार पुरी के शंकराचार्य द्वारा यहां विभिन्न देवी-देवताओं की स्थापना कराई गई थी.

मां के दर्शन से दूर होता है मांगलिक दोष
मंदिर के प्रधान पुजारी सुरेश चंद्र पांडेय ने आगे बताया कि यहां विराजमान मां मंगला काली की विशेष धार्मिक मान्यता है. मान्यता है कि मां के दर्शन और पूजा-अर्चना से मांगलिक दोष और अष्टमेश मंगला का प्रभाव दूर हो जाता है. यही वजह है कि विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने की कामना लेकर बड़ी संख्या में युवक-युवतियां और उनके परिजन मंदिर पहुंचते हैं. श्रद्धालु मां को जोड़ा नारियल, चुनरी और आभूषण अर्पित कर मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं. यहां मां मंगला काली की विशेष आरती भी होती है.

नवरात्रि में दी जाती है अनोखी बलि, नहीं बहता खून
उन्होंने कहा कि मंगला गौरी मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर बलि पूजा की विशेष परंपरा है. हालांकि यहां किसी पशु की बलि नहीं दी जाती है. मंदिर के प्रधान पुजारी के अनुसार यहां श्रद्धालु मां के दरबार में नारियल और भतुआ की बलि अर्पित करते हैं. इस कारण बलि की पूरी प्रक्रिया में खून नहीं बहता है. नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु मां को नारियल, चुनरी और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से मां की आराधना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यही वजह है कि नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है.

एक ही परिसर में कई देवी-देवताओं के दर्शन
आगे कहा कि मंदिर परिसर में मां दक्षिणेश्वर काली, मंगला काली और मां भगवती के अलावा जगतदात्रिका, सप्तमात्रिका, भगवान शिव, राम-सीता दरबार, माता शीतला, पंचमुखी हनुमान, रामकृष्ण परमहंस और माता सारदा देवी की प्रतिमाएं स्थापित हैं. यहां श्रद्धालुओं का विशेष जुड़ाव मां मंगला काली के दरबार से है. नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और आरती का आयोजन होता है. वहीं श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन द्वारा सुरक्षा और सुविधाओं की विशेष व्यवस्था की जाती है.



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