पटना: दुर्गा पूजा का नाम सुनते ही भव्य पंडाल, मां दुर्गा की मनमोहक प्रतिमा और आकर्षक सजावट की तस्वीरें आंखों के सामने आने लगती हैं. लेकिन इस बार राजधानी पटना के यारपुर में श्रद्धालुओं को कुछ ऐसा देखने को मिलने वाला है, जो उन्हें सात समंदर पार लंदन की याद दिला देगा. यहां दुर्गा पूजा के लिए लंदन के मशहूर टावर ब्रिज की तर्ज पर भव्य पंडाल तैयार की जा रही है. खास बात यह है कि इस ब्रिज पर केवल नजरें ही नहीं ठहरेंगी, बल्कि इसके ऊपर मैकेनिकल गाड़ी भी चलती हुई दिखाई देगी.
यानी इस बार यारपुर का दुर्गा पूजा पंडाल धार्मिक आस्था के साथ आधुनिक तकनीक, क्रिएटिव कारीगरी और मनोरंजन का अनोखा संगम बनने जा रहा है. यहां मां दुर्गा के दर्शन के साथ लोगों को आकर्षक मैकेनिकल मूर्तियां, शानदार लाइटिंग और सेल्फी लेने के लिए खास दृश्य भी देखने को मिलेंगे.
लंदन के टावर ब्रिज की तर्ज पर बन रहा भव्य पंडाल
श्री श्री शिव मंदिर नवयुवक दुर्गा पूजा समिति के सह कोषाध्यक्ष कुंदन कुमार शाह ने लोकल 18 को बताया कि यारपुर में इस बार दुर्गा पूजा की थीम को खास बनाने के लिए लंदन के प्रसिद्ध टावर ब्रिज की तर्ज पर विशाल पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है. इसी ब्रिज पर मां दुर्गा की प्रतिमा विराजमान की जाएगी. इसकी बनावट को आकर्षक और वास्तविक रूप देने के लिए बांस और अन्य निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है.
पंडाल की खासियत सिर्फ इसकी बाहरी बनावट तक सीमित नहीं रहने वाली है. आयोजकों ने बताया कि ब्रिज के ऊपर एक मैकेनिकल वाहन भी चलाया जाएगा, जिसे देखकर लोगों को ऐसा अनुभव होगा, मानो वे किसी विदेशी पर्यटन स्थल पर पहुंच गए हों. इस स्ट्रक्चर को केबल ब्रिज जैसा बनाया जायेगा. इसके लिए साइड से दो और पिलर खड़े किए जाएंगे. दोनों तरफ की संरचनाओं के तैयार होने के बाद पंडाल की भव्यता और बढ़ने की उम्मीद है.
राम-रावण युद्ध और हनुमान जी की मैकेनिकल मूर्तियां भी होंगी खास
इस बार यारपुर का पंडाल सिर्फ लंदन के टावर ब्रिज तक सीमित नहीं रहेगा. यहां रामायण के प्रसंगों को भी आधुनिक तकनीक के साथ जीवंत बनाने की तैयारी है. आयोजक कुंदन कुमार शाह ने बताया कि भगवान राम, रावण और हनुमान जी की मैकेनिकल मूर्तियां भी स्थापित की जाएंगी. इस बार यह पंडाल बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है. यहां लोग मां दुर्गा के दर्शन करने के साथ इन अनोखे दृश्यों को देखने और तस्वीरें लेने का आनंद भी उठा सकेंगे.
1000 से 2000 बांस का इस्तेमाल, झारखंड के कारीगर संभाल रहे जिम्मेदारी
इतनी बड़ी और आकर्षक संरचना को तैयार करना आसान काम नहीं है. इसके लिए बड़ी संख्या में कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं. आयोजकों ने बताया कि पंडाल के निर्माण में अनुमानित तौर पर करीब 1000 से 2000 बांस का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस काम में झारखंड के मधुपुर से आए कारीगर जुटे हुए हैं. पंडाल को रोशनी से सजाने की जिम्मेदारी हाजीपुर की लक्ष्मी साउंड टीम को दी गई है.
आजादी से पहले से होती रही है पूजा
यारपुर में दुर्गा पूजा की परंपरा नई नहीं है. कुंदन शाह ने आगे बताया कि यहां आजादी से पहले से ही पूजा होती आ रही है. मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा कम से कम 60 से 65 वर्षों से जारी है. हालांकि, पिछले 10 से 15 वर्षों में पूजा को और भव्य रूप देने की दिशा में लगातार प्रयास किए गए हैं.
कभी गोवर्धन पर्वत, कभी स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी, अब टावर ब्रिज की बारी
यारपुर की दुर्गा पूजा की एक बड़ी खासियत इसकी बदलती थीम है. यहां हर साल किसी न किसी खास विषय को आधार बनाकर पंडाल तैयार किया जाता है. आयोजकों ने बताया कि पिछले वर्षों में गोवर्धन पर्वत, अमेरिका के प्रसिद्ध स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी और असम के चाय बागानों जैसी थीम पर भी आकर्षक पंडाल बनाई जा चुकी हैं.
उन्होंने बताया कि थीम बदलने के पीछे कारण यह है कि लोगों को हर साल कुछ नया देखने को मिले. इससे न सिर्फ पूजा के प्रति लोगों की दिलचस्पी बनी रहती है, बल्कि पंडाल घूमने आने वालों के लिए भी हर बार एक नया अनुभव तैयार होता है.