गंगा किनारे दौड़ेगी गाड़ी, सुल्‍तानगंज-सबौर के बीच बनने वाले मरीन ड्राइव पर आया अहम अपडेट


Last Updated:

Bihar Ganga Path Project : बिहार के मुंगेर से लेकर सबौर तक 9,970 करोड़ रुपये से फोर लेन एक्‍सप्रेसवे बनाया जा रहा है. इस गंगा पथ नाम दिया गया है. यह दो चरणों में बनेगा. सुल्‍तानगंज से सबौर तक के दूसरे चरण के लिए अब बिहार सरकार ने अंतिम पर्यावरणीय मंजूरी के लिए आवेदन कर दिया है.

Top Deals Inside

बाढ़ में भी नहीं थमेगी रफ्तार! भागलपुर-सबौर गंगा पथ पर आया अहम अपडेटZoom

इस पूरे गंगा पथ प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 9,970 करोड़ रुपये है. (Photo : AI)

नई दिल्‍ली. बिहार की राजधानी पटना का जेपी गंगा पथ यानी मरीन ड्राइव आकर्षण का बड़ा केंद्र बन चुका है. अब उसी तर्ज पर पूर्वी बिहार के लोगों को भी गंगा की लहरों के समानांतर फर्राटा भरने का अनुभव मिलने वाला है. मुंगेर से लेकर भागलपुर होते हुए सबौर तक प्रस्तावित गंगा पथ परियोजना को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है. इस महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे के दूसरे चरण यानी सुल्तानगंज से सबौर तक के हिस्से के लिए बिहार राज्य सड़क विकास निगम लिमिटेड (BSRDC) ने अंतिम पर्यावरणीय मंजूरी (Environmental Clearance) लेने के लिए आवेदन किया है.

पूर्वी बिहार के दो प्रमुख जिलों मुंगेर और भागलपुर के बीच सीधी नेक्टिविटी स्थापित करने के लिए यह पूरा प्रोजेक्ट दो हिस्सों में तैयार किया जा रहा है. कुल मिलाकर यह सुपर कॉरिडोर करीब 84 किलोमीटर लंबा होगा. पहले चरण में गंगा पथ मुंगेर के साफियाबाद से शुरू होकर बरियारपुर और घोरघट होते हुए सुल्तानगंज तक पहुंचेगा. इस हिस्‍से की कुल लंबाई करीब 42 किलोमीटर है. दूसरे चरण में सुल्तानगंज से भागलपुर शहर होते हुए गंगा किनारे सबौर तक रोड बनाया जाएगा. इसकी लंबाई लगभग 41 किलोमीटर होगी.

9,970 करोड़ होंगे खर्च

इस पूरे गंगा पथ प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 9,970 करोड़ रुपये है. यह केवल कंक्रीट और डामर की एक साधारण सड़क नहीं होगी, बल्कि आने वाले दशकों में यह समूचे पूर्वी बिहार के लिए एक आर्थिक जीवन रेखा साबित होने वाली है. यह गंगा पथ भागलपुर और मुंगेर जैसे घनी आबादी वाले शहरों से ट्रैफिक जाम खत्‍म करेगा. इस एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद न केवल व्यापार और माल ढुलाई को नई रफ्तार मिलेगी, बल्कि धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से सुल्तानगंज आने वाले लाखों कांवड़ियों और आम यात्रियों के सफर का समय भी घटकर आधा रह जाएगा.

बाढ़ में भी नहीं थमेगी रफ्तार

गंगा के मैदानी इलाकों में बरसात के दिनों में आने वाली भयंकर बाढ़ एक बड़ी प्राकृतिक चुनौती रही है. इसी को ध्यान में रखते हुए इस एक्सप्रेसवे के डिजाइन को बेहद आधुनिक रूप दिया गया है. पूरी सड़क गंगा नदी के समानांतर 4-लेन बनाई जाएगी. यह जमीन पर और एलिवेटेड यानी पिलर पर होगी. जहां बाढ़ का पानी भरने का खतरा अधिक रहता है, वहां सड़क को ऊंचा और एलिवेटेड बनाया जाएगा. इस इंजीनियरिंग डिजाइन का सीधा फायदा यह होगा कि मानसून के महीनों में भी गाड़ियां बिना किसी रुकावट के तेज रफ्तार से दौड़ सकेंगी और इलाका पूरी तरह सुरक्षित रहेगा.



Source link