न प्लास्टिक, न थर्माकोल…50 हजार घड़ों से बन रहा पंडाल, दुर्गा पूजा पर जमशेदपुर में मिलेगा खास संदेश

न प्लास्टिक, न थर्माकोल…50 हजार घड़ों से बन रहा पंडाल, दुर्गा पूजा पर जमशेदपुर में मिलेगा खास संदेश


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50 हजार घड़ों से बन रहा पंडाल, दुर्गा पूजा पर जमशेदपुर में मिलेगा खास संदेश

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Jamshedpur Durga Puja 2026: जमशेदपुर के कसीडीह में लगभग 50 हजार मिट्टी के घड़ों और बांस से एक इको-फ्रेंडली दुर्गा पूजा पंडाल तैयार किया जा रहा है. यह अनोखा पंडाल पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति का संदेश देता है.

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जमशेदपुर: दुर्गा पूजा आते ही जमशेदपुर में खुशी और उल्लास का माहौल देखने को मिलता है. शहर के अलग-अलग इलाकों में आकर्षक पूजा पंडाल बनाए जाते हैं, जो अपनी अनोखी थीम और भव्य सजावट के लिए जाने जाते हैं. इसी कड़ी में जमशेदपुर के कसीडीह स्थित ठाकुर प्यार सिंह धुरंधर सिंह स्पोर्टिंग क्लब का दुर्गा पूजा पंडाल इस साल खास आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है. यहां इस बार आधुनिकता से दूर प्रकृति, मिट्टी और भारतीय संस्कृति से जुड़ी एक अनोखी थीम देखने को मिलेगी.

इको फ्रेंडली, सस्टेनेबल और प्राकृतिक पंडाल
इस साल पंडाल को पूरी तरह इको फ्रेंडली, सस्टेनेबल और प्राकृतिक रूप देने की कोशिश की जा रही है. इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे करीब 50 हजार मिट्टी के घड़ों को जोड़कर तैयार किया जा रहा है. जिस तरह पूजा के दौरान धूप, धूमाची और आरती के जरिए मां दुर्गा की आराधना की जाती है, उसी पारंपरिक संस्कृति से प्रेरित होकर पंडाल का स्वरूप तैयार किया जा रहा है. मिट्टी के घड़ों और बांस का इस्तेमाल कर इसे ऐसा रूप दिया जा रहा है, जो लोगों को प्रकृति और अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश देगा.

मिट्टी के घड़ों और बांस का इस्तेमाल
पंडाल तैयार कर रहे कारीगर दीपू सावन ने Local 18 को जानकारी देते हुए बताया कि उनकी टीम पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर से जमशेदपुर आई है. करीब 25 कारीगरों की टीम पिछले दो महीने से इस अनोखे पंडाल को बनाने में जुटी हुई है. पंडाल के निर्माण में मिट्टी के घड़ों और बांस का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसका उद्देश्य केवल एक आकर्षक पंडाल बनाना नहीं, बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व के प्रति जागरूक करना भी है.

कसीडीह का यह पंडाल बनाएगा अलग पहचान
इस पंडाल की एक और खास बात यह है कि इसके निर्माण में ऐसी सामग्री को प्राथमिकता दी जा रही है. जिससे पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे. आजकल जहां पूजा पंडालों में आधुनिक लाइटिंग, प्लास्टिक और तरह-तरह की कृत्रिम सजावट का इस्तेमाल देखने को मिलता है. वहीं कसीडीह का यह पंडाल पारंपरिक सामग्री के जरिए अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है. मिट्टी के घड़ों और बांस की मदद से तैयार हो रही यह कलाकृति कारीगरों की मेहनत और पारंपरिक हुनर को भी सामने लाएगी.

पूरे परिसर में रौनक देखने को मिलेगी
पंडाल में मां दुर्गा के दर्शन के साथ लोगों को मेले का आनंद लेने का भी मौका मिलेगा. यहां खाने-पीने की कई दुकानें और बच्चों के लिए झूले लगाए जा रहे हैं. जिससे पूजा के दौरान पूरे परिसर में रौनक देखने को मिलेगी. परिवार के साथ आने वाले लोगों के लिए यह पंडाल दर्शन, मनोरंजन और खरीदारी का एक खास ठिकाना बन सकता है.

घड़ों से तैयार यह अनोखी कलाकृति का है संदेश
आज के दौर में लोग तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन कसीडीह का यह पंडाल याद दिलाता है कि हमारी संस्कृति और परंपराओं की असली पहचान प्रकृति से जुड़ी हुई है. मिट्टी के घड़ों से तैयार यह अनोखी कलाकृति संदेश देती है कि आधुनिकता के साथ आगे बढ़ते हुए भी अपनी धरोहर को सहेजना जरूरी है. इस बार कसीडीह का यह पंडाल न सिर्फ मां दुर्गा के भक्तों को आकर्षित करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति के प्रति लोगों को एक नई सोच देने का भी प्रयास करेगा.



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