डिप्लोमेसी सिर्फ बंद कमरों में होने वाली गंभीर बैठकों, समझौतों या बयानों का नाम नहीं है. कई बार वैश्विक राजनीति की सबसे बड़ी बाजी एक सिंपल ‘हैंडशेक’ से जीत ली जाती है! दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक ऐसी आदत थी जिससे दुनिया भर के दिग्गज नेता घबराते थे. वो जब भी किसी राष्ट्राध्यक्ष से हाथ मिलाते, तो उसे जोर से अपनी तरफ खींच लेते थे, इंटरनेशनल मीडिया में इसे ‘ट्रंपशेक’ या ‘डोमिनेंस गेम’ कहा जाता था. लेकिन जब ट्रंप का सामना भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुआ, तो अमेरिका का ये माइंड गेम पूरी तरह से उल्टा पड़ गया! ट्रंप के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन ने समझाया है कि कैसे पीएम मोदी ने ट्रंप की इस तकनीक को उनके ही अंदाज में पछाड़ दिया!
‘पीएम मोदी से हाथ मिलाते ही उखड़ गई ट्रंप की सांस’: जॉन बोल्टन
अंतरराष्ट्रीय मीडिया चैनल के खास शो ‘न्यू ऑर्डर’ में बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति के पूर्व एनएसए जॉन बोल्टन ने एक पुराना और बेहद दिलचस्प वाकया याद किया.
उन्होंने ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार डोनाल्ड ट्रंप से इतनी मजबूती से हाथ मिलाया कि ट्रंप की सांस तक फूल गई थी. ये घटना आपको याद दिलाती है कि पीएम मोदी असल में शारीरिक और मानसिक रूप से कितने मजबूत हैं!’
बोल्टन का ये बयान जैसे ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सामने आया, पूरी दुनिया में वायरल हो गया. जो ट्रंप अपनी सख्त ग्रिप और आक्रामक बॉडी लैंग्वेज से बड़े-बड़े नेताओं को असहज कर देते थे, पीएम मोदी के एक मजबूत हैंडशेक के आगे खुद बेबस नजर आए.
क्या है ट्रंप का ‘इनवर्ड यांक’ और ‘डोमिनेंस गेम’?
जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने, तो उनकी बॉडी लैंग्वेज को लेकर पश्चिमी मीडिया और एक्सपर्ट्स के बीच काफी बहस छिड़ गई थी. ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने उनकी हाथ मिलाने की तकनीक को ‘Trumpshake’ का नाम दिया, वहीं ‘टाइम’ मैगजीन ने इसे ‘वर्चस्व की जंग’ करार दिया.
- इनवर्ड यैंक (Inward Yank): ट्रंप जब भी हाथ मिलाते थे, तो अचानक सामने वाले शख्स के हाथ को जोर से झटका देकर अपनी ओर खींचते थे.
- बैलेंस बिगाड़ना: सीएनएन से बातचीत में बॉडी लैंग्वेज एक्सपर्ट क्रिस उलरिच ने बताया था कि ट्रंप की ये चाल सामने वाले का बैलेंस गड़बड़ा देती थी.
- पर्सनल स्पेस में घुसना: सीबीएस न्यूज से बातचीत में एक्सपर्ट डॉन खोरी ने इसे एक ‘पावर-मूव’ बताया था. जब आप किसी को खींचकर अपनी ओर लाते हैं, तो आप जबरन उसके पर्सनल स्पेस में घुस जाते हैं और उसे ऐसा फील करवाते हैं कि ‘यहां बॉस मैं हूं!’
जब दुनिया के बड़े-बड़े नेता पड़े ट्रंप के आगे फीके
2017 और उसके बाद के वर्षों में ट्रंप के इन ‘हैंडशेक्स’ के कई वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुए थे, जहां दुनिया के पावरफुल नेता उनके आगे बेबस दिखे.
- जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे: 2017 में जब शिंजो आबे व्हाइट हाउस पहुंचे, तो ट्रंप ने पूरे 19 सेकंड तक उनका हाथ खींचकर रखा. हाथ छूटने के बाद आबे का चेहरा और उनकी आँखें बता रही थीं कि वो कितने असहज हो चुके थे.
- माइक पेंस और नील गोर्सच: अमेरिकी उपराष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस को भी ट्रंप ने अपने इसी हरकत से कई बार चौंकाया था.
- कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो: ट्रूडो ने ट्रंप के कंधे पर हाथ रखकर इस खींचने की कोशिश की थी.
- फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों: मैक्रों ने ट्रंप की ग्रिप का मुकाबला किया था और उनके हाथ को इतनी जोर से दबाया था कि ट्रंप के अंगूठे पर सफेद निशान बन गए थे.
पीएम मोदी का ‘आयरन ग्रिप’: भारत का पावर-मूव
लेकिन जब पीएम मोदी की बारी आई, तो ट्रंप का ये ‘डोमिनेंस गेम’ पूरी तरह नाकाम साबित हुआ. प्रधानमंत्री मोदी अपनी आक्रामक और मजबूत पर्सनालिटी के लिए जाने जाते हैं. चाहे वैश्विक नेताओं को गर्मजोशी से गले लगाना हो या फिर मजबूती से हाथ मिलाना.
जब ट्रंप ने पीएम मोदी के साथ अपना पुराना ‘इनवर्ड यांक’ दांव आजमाने की कोशिश की, तो पीएम मोदी ने न केवल अपनी जगह बनाए रखी, बल्कि ऐसी ‘आयरन ग्रिप’ यानी लोहे जैसी पकड़ दिखाई कि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति की सांस फूल गई.
ये सिर्फ दो नेताओं के बीच हाथ मिलाने का मामला नहीं था; ये अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर भारत के आत्मसम्मान और ताकत का प्रदर्शन था.
बॉडी लैंग्वेज से कूटनीति तक: क्या हैं इसके मायने?
ग्लोबल पॉलिटिक्स में नेता शब्दों से ज्यादा अपनी बॉडी लैंग्वेज से मैसेज देते हैं. जॉन बोल्टन का ये खुलासा तीन बड़े रणनीतिक मैसेज देता है.
- बराबर का दर्जा: सुपरपावर अमेरिका के सामने भारत अब किसी जूनियर पार्टनर की तरह नहीं, बल्कि एक इक्वल पावर की तरह खड़ा है.
- मनोवैज्ञानिक कंट्रोल: कूटनीति में जब आप सामने वाले के माइंड गेम को उसके ही खेल में हरा देते हैं, तो बातचीत की टेबल पर आपकी स्थिति अपने आप मजबूत हो जाती है.
- मजबूत लीडरशिप का सबूत: दुनिया हमेशा मजबूत और आत्मविश्वासी नेताओं का सम्मान करती है. पीएम मोदी का ये हैंडशेक भारत की उभरती हुई ग्लोबल पावर और निडर विदेश नीति का ही एक रूप है.
जो ट्रंप पूरी दुनिया को अपने ‘इनवर्ड यैंक’ से झुकाने की कोशिश करते थे, पीएम मोदी के एक ही हैंडशेक ने ये साफ कर दिया कि नया भारत किसी के दबाव में आने वाला नहीं है!