ये तो गजब हो गया! सुंदरनगर में दौड़ेगी हिमाचल की पहली बागवानी मोनो रेल, 300 मीटर ट्रैक का काम पूरा, कौन बना रहा?


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Himachal First Mono Rail: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सुंदरनगर में बागवानों के लिए अनोखा मोनो रेल प्रोजेक्ट शुरू किया गया है. पहाड़ी इलाकों में फल और कृषि उत्पादों को सड़क तक लाने में बागवानों को इससे बड़ी राहत मिलेगी.आईआईटी मंडी की मदद से मोनो रेल की रिपोर्ट तैयार की गई थी.

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ये तो गजब हो गया! सुंदरनगर में दौड़ेगी हिमाचल की पहली बागवानी मोनो रेलZoom

बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी इन योजना को लेकर काफी रुचि दिखाई थी.

मंडी. क्या आपने कभी मोनो रेल देखी है. पहाड़ों में अब इसे चलाने की तैयारी है. यह कर दिखाया है हिमाचल के एक बागवान ने. उन्होंने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए खेतीबाड़ी और बागवानी को सुगम बनाने के लिए प्रयास किया है और अब एक ऐसा प्रयास शुरू होने जा रहा है जो इससे पहले कभी नहीं हुआ.

दरअसल, मंडी जिले के सुंदर नगर में बागानों के बीच मोनो रेल को चलाने का प्रोजेक्ट शुरू हुआ है.  सुंदरनगर में पलौहटा गांव में इस मोनो रेल के पायलट प्रोजेक्ट को इन दिनों अंतिम रूप दिया जा रहा है. यह प्रदेश का पहला मोनो रेल प्रोजेक्ट बताया जा रहा है.

पलौहटा-2 क्लस्टर फल उत्पादक एवं विपणन संघ के अध्यक्ष मुनीश शर्मा ने बताया कि इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने विशेष रूचि दिखाई है. उन्होंने बताया कि उनका क्लस्टर 21.5 हेक्टेयर में फैला हुआ है. प्रारंभिक तौर पर एक किमी एरिया में मोनो रेल को चलाने पर कार्य किया जा रहा है. लगभग 300 मीटर ट्रैक का काम पूरा हो चुका है और इसका सफल ट्रायल भी किया जा चुका है. इन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस परियोजना के विस्तार को हरी झंडी देगी और इसे पूरे क्लस्टर में लगाया जाएगा.

फलों और कृषि उत्पादों को ले जाने में मदद

गौर रहे कि मोनो रेल के जरिए क्लस्टर में तैयार फलों के साथ कृषि उत्पादों को भी आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा सकेगा. इससे पहाड़ी और ढलानदार बगीचों से फसल को सड़क तक लाने में बागवानों को राहत मिलने की उम्मीद है. क्षेत्र के किसानों-बागवानों में इस प्रोजेक्ट को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है.
मंडी जिले के सुंदर नगर में बागानों के बीच मोनो रेल को चलाने का प्रोजेक्ट शुरू हुआ है.
बागवान संजय सकलानी ने बताया कि हमारे गांव में बागवानी विभाग का क्लस्टर लगा था. लेकिन क्लस्टर के आसपास रोड नहीं था और ऐसे में खाद से लेकर पकी हुई फसल को ले जाने में दिक्कत थी औऱ ऐसे में मोनो रेल अच्छा विकल्प लगा. बागवान देवी सिंह ने कहा कि यह काफी अच्छा आइडिया है क्योंकि हमारा इलाका पहाड़ी है. किसानों और बागवानों को इससे फायदा मिलेगा. वह कहते हैं कि हर खेत के लिए सड़क संभव नहीं है.
अब हिमाचल के अन्य क्लस्टरों में भी मोनो रेल स्थापित होने की उम्मीद.

आईआईटी की मदद से प्रोजेक्ट तैयार

इस मोनो रेल के प्रोजेक्ट को धरातल पर उतार रहे डिस्ट्रिब्यूटर तेजेंद्र सैनी ने बताया कि ऐसा प्रोजेक्ट का काम करना उनके लिए भी एक यूनिक अनुभव है. इसका सामान विभिन्न स्थानों से मंगवाकर इस कार्य को अंतिम रूप दिया जा रहा है. आईआईटी मंडी के मैकेनिकल और सिविल इंजीनियरिंग विभाग की टीम ने इस मोनो रेल की तकनीकी व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की है, जिसके बाद ही यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ है. इस प्रोजेक्ट की तर्ज पर अन्य क्लस्टरों में भी मोनो रेल स्थापित होने की उम्मीद की जा रही है. वह बताते हैं कि विदेशों में इस तकनीक का इस्तेमाल काफी हो रहा है. बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी इन योजना को लेकर काफी रुचि दिखाई थी.



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