दुर्गा पूजा में दरभंगा का अद्भुत पंडाल, दिखेगा रामेश्वरम मंदिर का भव्य नजारा, पहाड़ चीरकर निकलेंगे महादेव

दुर्गा पूजा में दरभंगा का अद्भुत पंडाल, दिखेगा रामेश्वरम मंदिर का भव्य नजारा, पहाड़ चीरकर निकलेंगे महादेव


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दुर्गा पूजा में दरभंगा का अद्भुत पंडाल, दिखेगा रामेश्वरम मंदिर, पहाड़ चीरकर…

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Darbhanga Durga Puja 2026: दरभंगा के बाजार समिति चौक पर इस बार दुर्गा पूजा में रामेश्वरम मंदिर का भव्य पंडाल बनेगा. जहां पहाड़ चीरकर निकलते भगवान शिव के दर्शन होंगे. यह आयोजन गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की एक अनूठी मिसाल है, जो लोगों को आकर्षित कर रहा है.

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दरभंगा: दरभंगा के बाजार समिति चौक पर इस बार दुर्गा पूजा कुछ खास होने वाली है. यहां भक्तों को साउथ के भव्य रामेश्वरम मंदिर की झलक देखने को मिलेगी. यह पूजा पंडाल न सिर्फ अपनी भव्यता के लिए बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब के लिए भी जाना जाता है. यहां की सबसे खास बात यह होगी कि बाहर से आपको पूरा रामेश्वरम मंदिर का दिव्य दृश्य दिखेगा. अंदर प्रवेश करते ही एक विशाल पहाड़ और उस पहाड़ के बीच से निकलता हुआ भगवान शिव का भव्य स्वरूप भक्तों को दर्शन देगा. पहाड़ के पीछे से निकलते शिवजी का यह दृश्य अलौकिक होगा.

पंडाल को अंतिम रूप देने में लगे कारीगर
मेला प्रभारी सोनू कुमार बताते हैं कि इस पंडाल के निर्माण का काम पिछले साढ़े तीन महीने से लगातार चल रहा है. इसमें मुजफ्फरपुर, दरभंगा और पश्चिम बंगाल के कारीगर दिन-रात जुटे हुए हैं. पंडाल को अंतिम रूप देने में अभी भी काम जारी है. निर्माण की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक इसमें 25 हजार से 30 हजार बांस लग चुके हैं और प्रॉपर थर्माकोल और पीओपी का काम चल रहा है. इसके लिए 3 से 4 ट्रक बीट अभी तक लग चुका है. इस पंडाल के निर्माण में 70 से 80 लाख रुपये से अधिक खर्च होने की उम्मीद है.

कई जिलों से श्रद्धालु पहुंचते हैं दर्शन को
यह पूजा पंडाल हाईवे पर स्थित है. इसलिए यहां हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी, समस्तीपुर, बेगूसराय तक के लोग यहां माता के दर्शन करने पहुंचते हैं. जिला प्रशासन द्वारा भी इस पंडाल को कई बार पुरस्कृत किया जा चुका है. इस पूजा की सबसे बड़ी और दिल छू लेने वाली बात यह है कि यह गंगा-जमुनी तहजीब की जीती-जागती मिसाल है. इस पूजा समिति के मुख्य सहयोगी मोहम्मद परवेज हैं, जो हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बनकर इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में लगे हैं। यहां धर्म नहीं, बल्कि भक्ति और एकता की पूजा होती है, जो पूरे मिथिलांचल के लिए एक संदेश है.



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