बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक मजदूरी करने के लिए विदेश जाते हैं. खाड़ी के देशों में करोड़ों की संख्या में ऐसे मजदूर काम करते हैं. इसमें से कई के साथ कंपनियां धोखा करती हैं और उनका शोषण किया जाता है. ऐसी ही एक घटना इटली से सामने आई है. इटली में अमेरिकी दूतावास की बिल्डिंग बनाने के लिए एक अमेरिकी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने भारत से करीब 300 मजदूरों को लेकर गई. इन मजदूरों ने इस काम के लिए करीब 5 लाख रुपये खर्च भी किए. उनको भारत से ले जाते समय आकर्षक ऑफर दिया गया था. लेकिन, इटली पहुंचने के बाद अमेरिकी कंपनी उनका शोषण करने लगी. उनसे 12-12 घंटे तक काम कराया जाता और रहने-खाने के नाम पर उनकी सैलरी का बड़ा हिस्सा काट लिया जाता. इसके बाद मामला इटली के श्रम अदालत में पहुंचा और भारतीय मजदूरों को बड़ी राहत मिली. अमेरिकी कंपनी कैडल कंस्ट्रक्शन (Caddell Construction) अब इटली के श्रण कानून के दबाव में भारतीय मजदूरों के साथ एक डील कर रही है जिसके तहत हर एक मजदूर को करीब 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा.
नौकरी के नाम पर फंस गए
यह मामला इटली के मिलान शहर का है. यहां अमेरिका के नए वाणिज्य दूतावास परिसर का निर्माण किया जा रहा था. इस परियोजना की जिम्मेदारी अमेरिकी निर्माण कंपनी कैडेल कंस्ट्रक्शन के पास थी. इतालवी जांच के मुताबिक दिल्ली की भर्ती एजेंसी डायनेमिक हाउस के जरिये भारतीय मजदूरों को इस काम के लिए चुना गया. परियोजना के दौरान कंपनी के यहां करीब 450 से 500 मजदूर काम कर रहे थे. इनमें भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा थी. वर्ष 2025 में कंपनी के लिए काम करने वाले भारतीय मजदूरों की संख्या 316 बताई गई. भारत से इटली जाने से पहले मजदूरों को तीन साल की नौकरी और वहां रहने की व्यवस्था का भरोसा दिया गया था. कई मजदूरों ने आरोप लगाया कि उन्होंने नौकरी हासिल करने के लिए करीब 5,000 यूरो यानी लगभग 5 लाख रुपये खर्च किए. वीजा आवेदन में उन्हें अत्यधिक कुशल कामगार बताया गया था और सालाना वेतन 24,000 यूरो से ज्यादा दिखाया गया.
लेकिन इटली पहुंचने के बाद हालात अलग निकले. जांच में सामने आए कुछ अनुबंधों में प्रति घंटे महज 1.31 से 1.91 यूरो वेतन दर्ज था. बताया गया कि कई मजदूर अंग्रेजी में लिखे अनुबंध की शर्तें समझ नहीं पाते थे. आरोप है कि इटली पहुंचने के बाद उनसे दूसरा अनुबंध भी कराया गया, लेकिन उसकी प्रतियां नहीं दी गईं.
12 घंटे काम, फिर भी दो डॉलर कमाई
जांचकर्ताओं के मुताबिक, मजदूरों से दिन में करीब 12 घंटे और सप्ताह में छह दिन काम कराया जाता था. इटली में सामान्य कामकाजी सप्ताह 40 घंटे का है. अभियोजन पक्ष का आरोप है कि कटौतियों के बाद मजदूरों की वास्तविक कमाई प्रति घंटे दो डॉलर से भी कम रह जाती थी. रहने के खर्च के नाम पर हर महीने करीब 500 यूरो यानी लगभग 54,000 रुपये काटे जाने की बात सामने आई. खाने के लिए मजदूरों को करीब 300 से 370 यूरो यानी लगभग 32,000 से 40,000 रुपये तक खर्च करने पड़ते थे. कुछ मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी के अनुबंध में भोजन उपलब्ध कराने की बात होने के बावजूद उनसे इसके लिए पैसे लिए गए. शर्तों का विरोध करने वाले मजदूरों को नौकरी से निकालने या भारत वापस भेजने की धमकी दी जाती थी.
इटली में श्रम शोषण के खिलाफ कार्रवाई
इतालवी अभियोजकों ने इस मामले में पैरा-स्लेवरी यानी अर्ध-गुलामी जैसी स्थिति का उल्लेख किया. जांचकर्ताओं के मुताबिक यह केवल कम वेतन देने का मामला नहीं था. भर्ती के लिए लिया गया कर्ज, लंबे काम के घंटे, कथित अवैध कटौतियां, धमकियां और प्रवासी मजदूरों की मजबूरी ने शोषण की स्थिति पैदा की. जांच शुरू होने के बाद कैडेल कंस्ट्रक्शन की इटली स्थित इकाई को न्यायिक प्रशासन के अधीन रखा गया. आपराधिक जांच अभी जारी है. रिपोर्टों के मुताबिक कंपनी के दो प्रबंधकों को जबरन वसूली और अवैध प्रवासन को बढ़ावा देने समेत आरोपों के सिलसिले में नजरबंद रखा गया है. इन आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा.
335 करोड़ के समझौते में किसे कितना मिलेगा?
सितंबर 2026 में कैडेल कंस्ट्रक्शन 3.1 करोड़ यूरो यानी करीब 335 करोड़ रुपये के समझौते पर पहुंची. अभियोजकों ने इसे यूरोप में श्रम शोषण से जुड़े सबसे बड़े समझौतों में से एक बताया है. इसमें करीब 2 करोड़ यूरो यानी लगभग 216 करोड़ रुपये प्रभावित मजदूरों के मुआवजे के लिए रखे गए हैं. बाकी 1.1 करोड़ यूरो से ज्यादा की रकम इटली की सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर चोट से जुड़े तंत्र के लिए निर्धारित है. करीब 480 मजदूरों को भुगतान मिलने की उम्मीद है. इनमें 316 भारतीय हैं. अक्टूबर में भुगतान की प्रक्रिया शुरू हुई. शुरुआती दो दिनों में 115 मजदूर समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके थे. समझौते पर हस्ताक्षर करने के 30 दिनों के भीतर संबंधित मजदूरों को भुगतान मिलने की बात कही गई है.
अगर मजदूरों के लिए निर्धारित 216 करोड़ रुपये को 480 कामगारों में बराबर बांटने का औसत निकालें, तो यह करीब 45 लाख रुपये प्रति व्यक्ति बैठता है. यह केवल औसत है, वास्तविक भुगतान नहीं. हर मजदूर को मिलने वाली रकम समझौते की शर्तों और उसकी पात्रता पर निर्भर करेगी. इस समझौते का एक और अहम पहलू है. प्रभावित मजदूरों को कैडेल की परियोजना से बाहर इटली में दूसरी जगह काम करने की अनुमति भी दी जा रही है. इससे उन्हें उसी कंपनी के साथ काम करने की मजबूरी से निकलने का अवसर मिल सकता है.
भारतीयों के लिए क्या है सबक?
इटली का यह मामला बताता है कि विदेश में नौकरी पाने के लिए लाखों रुपये खर्च करना किस तरह कामगारों को शोषण के जाल में फंसा सकता है. जब कोई व्यक्ति नौकरी के लिए कर्ज लेता है, तो खराब परिस्थितियों में भी काम छोड़ना उसके लिए आसान नहीं होता. कंपनियां या बिचौलिये इसी मजबूरी का फायदा उठा सकते हैं. इटली में वर्ष 2025 के दौरान करीब 26 लाख विदेशी नागरिक काम रहे थे. यह वहां कुल नियोजित कामगारों का लगभग 10.7 फीसदी था. भारतीय कामगार भी वहां की अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं. भारत और इटली के बीच कानूनी प्रवासन और रोजगार के अवसर बढ़ाने की कोशिशें भी जारी हैं.