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मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन में नए-नए नारों ने जगह ले ली है. भोपाल में शिक्षक भर्ती वर्ग-3 के मेरिट होल्डर अभ्यर्थी नियुक्ति की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. बोर्ड ऑफिस चौराहे पर प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने सरकार और शिक्षा मंत्री के खिलाफ खाने-पीने की चीजों से जुड़े तुकबंदी वाले नारे लगाए. इनमें ‘एक कचौरी दो समोसा, शिक्षा मंत्री तुम्हारा क्या भरोसा’ और ‘समोसे थोड़े कच्चे हैं, शिक्षा मंत्री झूठे हैं’ जैसे नारे शामिल हैं. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि मध्य प्रदेश में करीब 850 मेरिट होल्डर शिक्षक अभ्यर्थियों की नियुक्ति अब भी लंबित है.
मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
भोपाल. जेन ज़ी आंदोलन के बाद देश में आंदोलनों के नारे बदलने लगे हैं. रसोई से जुड़ी रोज़मर्रा की चीज़ों और खाने पीने के सामान से तुकबंदी कर प्रदर्शनकारी अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. भोपाल में शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह पर वादाखिलाफी का आरोप लगाकर अलग-अलग वर्ग के शिक्षकों ने दिलचस्प नारे बनाए हैं. जैसे एक कचौरी दो समोसा, शिक्षा मंत्री तुम्हारा क्या भरोसा.
भोपाल के व्यस्त बोर्ड ऑफिस चौराहे पर प्रदर्शन कर रहे मध्य प्रदेश शिक्षक भर्ती वर्ग तीन के मैरिट होल्डर छात्र छात्राओं के नारे गौर से सुनिये. एक कचौरी दो समोसा, शिक्षा मंत्री तुम्हारा क्या भरोसा. समोसे थोड़े कच्चे हैं, शिक्षा मंत्री झूठे हैं. टमाटर का रगे लाल है, शिक्षा मंत्री की चाल है. पानी का कलर नीला है. सारा सिस्टम ढीला है. ये नये दौर के नारे हैं. हर नारे का रिश्ता किचिन से है. खाने पीने की चीजों से हैं. प्रदर्शनकारियों के मुताबिक सूबे के करीब साढ़े आठ सौ मैरिट होल्डर शिक्षक अभ्यर्थी की नियुक्ति लंबित है.
झूठे आश्वासन की वजह से नारे बनाए
प्रदर्शनकारी निरमा का कहना है कि हम शिक्षा मंत्री से मिलने गए थे. डेलिगेशन गया था. उन्होंने चार दिन का आश्वासन दिया था. 20-25 दिन बीत चुके हैं. अभी तक कुछ नहीं हुआ इसलिए झूठे आश्वासन की वजह से हमने ये नारे बनाए हैं.
यही नजारा है भोपाल में लोक शिक्षण संचालनालय के दफ्तर के सामने प्रदर्शन कर रहे वर्ग 2 यानी माध्यमिक और वर्ग तीन यानी प्राथमिक शिक्षक अभ्यर्थियों में देखने को मिला. इनका दावा है कि शिक्षा मंत्री उदयप्रताप सिंह ने पद वृद्धि करने का वादा किया था लेकिन महीनों बाद भी कुछ नहीं हुआ. एक शिक्षक करीब एक महीने से भूख हड़ताल पर है और आसपास एक ही नारा गूंज रहा है, ‘एक कचौरी दो समोसा, शिक्षा मंत्री तुम्हारा क्या भरोसा’.
प्रदर्शनकारी दिव्या ठाकुर ने बताया कि हमने आपको सीट पर बिठाया है. आपके अंडर में आयुक्त काम करता है. क्या शिक्षा मंत्री डीपीआई में काम कर रहे हैं. तो यहां हमको गुमराह किया गया. हम लोग छोटे नादान बच्चे हैं. आप हमारे पिता समान है. आपने जो बोला हमने स्वीकार कर लिया. हम हंसते खेलते मस्त आ गए कि शिक्षा मंत्री ने तो बोल दिया हां हमारी पद वृद्धि हो जाएगी. एक साल से आंदोलन चल रहा है. शिक्षा मंत्री ने हमें गुमराह किया इसलिए हम लोग शिक्षा मंत्री के लिए नारे लगा रहे हैं.
कांग्रेस ने भी किया तंज
नए नए नारों के साथ चल रहे आंदोलनों को विपक्ष का समर्थन मिल रहा है. कांग्रेस के मुताबिक पूरे प्रदेश में शिक्षा विभाग में फैला असंतोष इन नारों के रूप में प्रदर्शित हो रहा है. कांग्रेस प्रवक्ता मुकेश नायक ने कहा कि जो जेन जी के आंदोलन ने अनेक आंदोलन देश में पैदा किए हैं. आज आपने सुना होगा जो शिक्षा के क्षेत्र में असंतोष है. हजारों शिक्षक हड़ताल पर बैठे हैं और नारे लगा रहे हैं. ‘एक कचौरी दो समोसा.. शिक्षा मंत्री का क्या भरोसा.’ इस नारे की उपज जेन जी के आंदोलन से हुई है. इसका मतलब ये है कि जेन जी का आंदोलन जन जन में फैलने लगा है. लेकिन बीजेपी को अभी सुध नहीं है.