खरीद रहे थे ₹1.5Cr. की कार, किसान की दुर्गति देखी तो नाना ने बांट दिए थे पैसे
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नाना पाटेकर फिल्मी दुनिया की ऐसी शख्सीयत थे जो सिर्फ पर्दे पर नहीं बल्कि असल जिंदगी में भी हीरो से कम नहीं थे. वह किसानों की खुलकर मदद करते थे. बिना ढिंढोरा पीटे वे महाराष्ट्र के गांवों में जाते थे और किसानों की समस्याएं सुनकर उन्हें हल करते थे. एक बार तो उन्होंने कार खरीदने के लिए इकट्ठा किया गया पूरा पैसा ही किसानों में बांट दिया था.
नाना पाटेकर को किसानों से बहुत लगाव था, उन्होंने डेढ़ करोड़ की गाड़ी खरीदने का प्लान छोड़ पूरा पैसा किसानों में बांट दिया था. (फोटो- Insta/thekisancollege)
क्या कोई ऐसा कर सकता है कि जिस पैसे से कार खरीदने जा रहा हो, उसे ही बांट दे. शायद आप न जानते हों मगर नाना पाटेकर ने ऐसा किया था. वे थोड़े-बहुत नहीं बल्कि डेढ़ करोड़ रुपये की कार खरीदने जा रहे थे. कागज तैयार हो चुके थे. अगले दिन कार की डिलीवरी लेनी थी. एक दिन पहले ही शाम को एक किसान की सुसाइड की खबर देखी और दिल पसीज गया. उस किसान की मौत का सबसे ज्यादा असर उसके परिवार पर था. उन आंसुओं की कीमत पर नाना कैसे कार ले सकते थे. उन्होंने तुरंत अपने दोस्त को फोन किया और वो डेढ़ करोड़ रुपये किसानों में बंटवा दिए.
नाना पाटेकर का दिल कुछ ऐसा ही था. आज सुबह गोवा में कार्डियक अरेस्ट आने से वे इस दुनिया को छोड़ गए. मगर लोगों के जेहन में जो उनकी रियल हीरो वाली छाप है वो हमेशा अमर रहेगी. बेशक फिल्मी दुनिया के कुछ लोग नाना पाटेकर कर स्वभाव गुस्सैल बताते रहे हों, मगर असल जिंदगी में नाना जो किसानों के लिए, समाज के लिए और देश के लिए जो किया वह उन्हें असल जिंदगी का हीरो बनाता है. कार खरीदने वाले पैसे को किसानों में बांटने की बात भी सुनी सुनाई नहीं है. हाल ही में 1996 में आई फिल्म अग्नि साक्षी के लेखक रणबीर पुष्प ने इस बात का खुलासा किया था. उन्होंने बताया था कि कैसे एक खबर के बाद नाना वे सारे रुपये किसानों में बांट दिए.
ढिंढोरा पीटे बिना करते थे किसानों की मदद
नाना पाटेकर ढिंढोरा पीटे बिना लगातार किसानों की मदद करते थे. कार वाले वाकये के बाद उन्होंने अभिनेता मकरंद अनास्पूरे के साथ NAAM फाउंडेशन बनाई थी. इसके जरिए वे विदर्भ, लातूर और उस्मानाबाद के किसानों की आर्थिक मदद करते थे. वे लगातार गांवों में जाते थे. किसानों से मिलकर उनकी समस्या पूछते थे. उन्होंने पानी बचाने और अकाल से लड़ने के लिए प्रेरित करते थे. न जाने कितने ही गांवों में पानी की कमी दूर करने के लिए उन्होंने चैक डैम और तालाब बनवाने के लिए भी काम किए.
नाना पाटेकर का निधन 75 साल की उम्र में निधन हो गया है. (फाइल फोटो)
किसानों सब देते हैं, उन्हें मांगना छोड़कर फैसला लेना होगा
नाना पाटेकर किसानों से हमेशा कहते थे कि वे अन्नदाता हैं. उन्होंने सरकारों से कुछ मांगना नहीं चाहिए. किसानों को खुद फैसला लेना होगा कि वे उसे किसे सत्ता में लाना चाहते हैं. नाना पाटेकर परेशान किसानों से व्यक्तिगत तौर पर जाकर मिलते थे और हताश किसानों से आत्म्हत्या जैसे घातक कदम न उठाने की अपील करते थे. किसानों की दुर्गति को लेकर कई बार उन्होंने सरकारों पर भी सवाल उठाए हैं.
जब सड़क पर फेंकी बोतल तो आ गया गुस्सा
नाना जैसे पर्दे पर थे, असल जिंदगी में भी वैसे ही थे. उन्हें गुस्सा आता था, मगर उस गुस्से का कारण होता था. लेखक रणबीर पुष्प के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट में लिखा है कि एक बार उन्होंने एक कार के ड्राइवर को सड़क पर बोतल फेंकते देखा. उन्होंने वो बोतल उठाई और फिर पीछा कर उस कार ड्राइवर को रोका और खिड़की नीचे करने को कहा.
संयोग से चौराहे पर महात्मा गांधी की तस्वीर वाली स्वच्छ भारत अभियान की होर्डिंग लगी थी. नाना पाटेकर ने उसकी तरफ इशारा करते हुए कहा कि ऐसे भारत महान बनाओगे. उन्होंने ड्राइवर से कहा कि गांधी जी तो चले गए, लेकिन आप तो अभी इस धरती पर हैं. क्या देश को साफ रखना हमारा कर्तव्य नहीं है. नाना ने उससे पूछा था कि क्या मैं आपकी कार को कूड़ेदार समझकर ये बोतल फेंक दूं.