Last Updated:
Nana Patekar : बॉलीवुड स्टार नाना पाटेकर अब नहीं रहे, लेकिन उत्तराखंड की वादियों से उनका जुड़ाव उनकी यादों में आज भी जिंदा है. करीब चार साल पहले फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में चमोली पहुंचे नाना पाटेकर जोशीमठ और नीती घाटी की खूबसूरती के ऐसे मुरीद हुए कि उन्होंने स्थानीय लोगों के सामने यहां अपना घर बनाने और पहाड़ में बसने की इच्छा जता दी थी.
नाना पाटेकर सितंबर 2022 में एक मराठी फिल्म की शूटिंग के लिए चमोली पहुंचे थे. फिल्म यूनिट ने लाता, मलारी और नीती घाटी के आसपास शूटिंग की थी. सीमांत क्षेत्र में बिताए दिनों के दौरान नाना स्थानीय लोगों से घुले-मिले. नाना को यहां के रहन-सहन, खानपान, पहनावे और मौसम के साथ सुकून बहुत ही पसंद आया था. स्थानीय लोगों के मुताबिक, पहाड़ की खूबसूरती और सादगी उन्हें इतनी पसंद आई कि उन्होंने यहां मकान बनाने की बात कही थी.
नाना से मिलने वाले स्थानीय लोगों के लिए यह सामान्य मुलाकात नहीं थी. होमस्टे के ओनर नरेंद्र सिंह राणा बताते हैं कि नाना पाटेकर इतने मजाकिया थे कि शुरू में लगता था वो सब को डांट रहे हैं. मगर, बातचीत में नाना का सहज और सरल अंदाज खास लगा. उनको लाता से खास दिलचस्पी रही.
नरेंद्र ने बताया कि 7 दिन वह उनके होम स्टे में रुके और उन सात दिनों में उन्होंने अपना अलग से किचन डेवलप किया. उस किचन में वह सिर्फ चिकन मटन और सांभर बनाते थे. सबको डांट फटकार कर एक साथ बिठाकर सबको खिलाते थे. 7 दिनों तक होम स्टे में ठहरे. उनका मिजाज गुस्से वाला था, लेकिन प्यार भी बहुत करते थे.
Add News18 as
Preferred Source on Google
उन्होंने नरेंद्र को बताया था कि वह अगली बार जब आएंगे वह 8 दिनों तक होमस्टे को बुक करेंगे और अपने मित्रों के साथ आएंगे. अगली बार जब आएंगे तो लता में ही एक छोटी सी जमीन खरीदेंगे और एक छोटा घर बनायेंगे. छुट्टियों में हर साल लता में ही रहेंगे. नाना पाटेकर इतने सौम्य मिजाज के थे कि होमस्टे में कोई भी उनका रिश्तेदार या अन्य आता था तो सब के साथ बात करते थे, फोटो खिंचवाते थे.
नाना के उत्तराखंड कनेक्शन की कहानी सिर्फ जोशीमठ तक सीमित नहीं रही. शूटिंग के दौरान उन्होंने रुद्रप्रयाग के नारायण कोटि देवर इलाकों का भी रुख किया. जहां पहाड़ी खानपान में उन्हें मंडुवे की रोटी और राई-पालक की सब्जी पसंद आई थी.
उत्तराखंड प्रवास के दौरान नाना पाटेकर देहरादून भी पहुंचे थे. यहां उन्होंने राज्य की प्राकृतिक खूबसूरती और लोगों के व्यवहार की तारीफ की थी. उसी समय सीएम पुष्कर सिंह धामी से उन्होंने मुलाकात की थी. और उत्तराखंड को फिल्म शूटिंग के लिए बेहद उपयुक्त बताया था. आज जब 75 साल की उम्र में उनके निधन की खबर सामने आई है, तब करीब चार साल पुरानी वही बात फिर याद आती है. जोशीमठ की वादियों में अपना आशियाना बनाने का नाना पाटेकर का सपना उनके साथ ही अधूरा रह गया.
नाना चले गए, लेकिन पहाड़ के लोगों की यादों में उनकी वह इच्छा अब भी दर्ज है. एक ऐसा अभिनेता, जो उत्तराखंड आया तो फिल्म की शूटिंग के लिए था, मगर लौटते वक्त अपने साथ पहाड़ में बसने का सपना ले गया था.