मुरादाबाद में प्रधानमंत्री मत्स्य पालन योजना के तहत मछली पालन शुरू कर अच्छा मुनाफा कमाएं, सरकार दे रही सब्सिडी

मुरादाबाद में प्रधानमंत्री मत्स्य पालन योजना के तहत मछली पालन शुरू कर अच्छा मुनाफा कमाएं, सरकार दे रही सब्सिडी


मुरादाबादः मुरादाबाद के लोग यदि कोई कारोबार करने का प्लान बना रहे हैं. वह मछली पालन का कारोबार भी कर सकते हैं. मछली पालन का कारोबार करने में अलग-अलग योजनाएं भी चल रही हैं. जिसमें मत्स्य विभाग की तरफ से लाभ दिया जाता है. जिसमें मछली पालन पर सब्सिडी भी दी जाती है. इसलिए जो लोग कारोबार करने का प्लान बना रहे हैं. वह मछली पालन का कारोबार भी कर सकते हैं. यह ऐसा कारोबार है जो कम समय में अच्छा मुनाफा दे देता है.

प्रधानमंत्री मत्स्य पालन योजना के तहत करें मछली पालन

कृषि वैज्ञानिक डॉ दीपक मेहंदीरत्ता ने बताया कि मुरादाबाद के जो किसान इन दिनों मछली पालन करने का प्लान बना रहे हैं, वह प्रधानमंत्री मत्स्य पालन योजना के तहत मछली पालन कर सकते हैं. इस योजना के तहत जिला मत्स्य विभाग द्वारा मछली पालन कराया जाता है. उनमें बहुत सारी योजनाएं है. इसमें मछली बेचने के लिए गाड़ी चाहिए उसके लिए भी स्कीम है. तालाब खुद ना है उसके लिए भी स्कीम है. इसके अलावा अलग-अलग स्कीम में अलग-अलग लाभ दिया जाता है. सब्सिडी भी दी जाती है. इसके अलावा फंगास मछली 5 से 6 महीने में तैयार हो जाती है.साथ ही रोहू,कतला, नेंन सहित अलग-अलग प्रजातियां हैं. 9 से 10 महीने में यह तैयार हो जाती हैं.जिन्हें अलग-अलग तरीके से कर किसान साथी लाभ ले सकते हैं.अगर हम अलग से ब्रीडिंग करके या नर्सरी बना रखी है उसके माध्यम से कर रहे हैं तो साल में दो बार इसकी फसल ले सकते हैं.

कम जमीन में भी कर सकतें है खेती

अगर आप रोहू, कतला और नैन जैसी देशी मछलियों की खेती शुरू करना चाहते हैं तो कम जमीन में भी शुरुआत की जा सकती है.लेकिन तालाब आधारित पालन और बायोफ्लॉक में जमीन, खर्च और उत्पादन काफी अलग होता है.इसी प्रकार तालाब में मछली पालन के लिए अगर मत्स्य विभाग की योजना का लाभ लेना है सब्सिडी का लाभ लेना है तो मत्स्य विभाग के अनुसार करीब 0.2 हेक्टेयर यानी लगभग आधा एकड़ से तालाब आधारित पालन शुरू किया जा सकता है. तालाब में लगभग 1 से 2 मीटर पानी होना चाहिए.इसके साथ ही रोहू, कतला और नैन को एक साथ पालना फायदे का सौदा माना जाता है. केवल इन तीन प्रजातियों के मिश्रित पालन में कतला 40%, रोहू 30% और नैन 30% का अनुपात रखना चाहिए.

4.58 लाख की लागत से तैयार होगा तालाब

तालाब पहले से बना हुआ है तो खर्च काफी कम हो जाता है. मौजूदा तालाब में मत्स्य पालन की लागत करीब 2.40 लाख प्रति हेक्टेयर और नए तालाब की लागत करीब 4.58 लाख प्रति हेक्टेयर के आसपास रहती है. ये मानक परियोजना लागत हैं. बाकी स्थानीय जमीन सब्सिडी और कारोबार करने वाले व्यक्ति के ऊपर निर्भर करता है.इसी प्रकार आधे एकड़ के मौजूदा तालाब में शुरुआती स्तर पर लगभग 70 हजार से 1.25 लाख तक का संचालन खर्च मानकर चल सकते हैं. इसमें मछली, बीज, चूना, खाद, पानी, दाना, मजदूरी और अन्य खर्च शामिल होंगे.

3 लाख तक होता है मुनाफा

अगर आधा एकड़ में लगभग 3,000 किलो उत्पादन मानें और औसत थोक बिक्री 120 रुपए किलो हो तो 3.60 लाख बिक्री होगी.रेट ज्यादा हो तो इनकम भी ज्यादा होगी. बाकी बाजार में मूल्य घटता बढ़ता रहता है.एक अनुमानित आंकड़े की अगर बात की जाए तो यदि संचालन खर्च करीब 1 से 1.50 लाख बैठता है तो लगभग 2 से 3 लाख तक का सफल मुनाफा हो सकता है. यह तालाब खुदाई के खर्चे से अलग है. तालाब खुदाई में सब्सिडी भी मिल रही है.



Source link