Navratri Upay 2026: नवरात्रि का पर्व 11 अक्टूबर रविवार से शुरू हो रहा है. नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा की पूजा और सेवा के लिए समर्पित होते हैं. मातारानी के भक्त अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखते हैं और पूजा करते हैं. ताकि वे मां दुर्गा को प्रसन्न करके अपने मनोकामनाओं की पूर्ति कर सकें. इस नवरात्रि आप पहले दिन यानि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से ही 5 कार्यों को करके मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं.
नवरात्रि में करने वाले 5 काम
कलश स्थापना
दुर्गा सप्तशती पाठ
वरात्रि के पहले दिन से आपको दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए. हर दिन पूरी दुर्गा सप्तशती को पढ़ना चाहिए. इसमें मां दुर्गा की महिमा का वर्णन है. यदि आपके पास समय का अभाव है तो आप प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती के तीन कवचों पहला देवी कवच, दूसरा अर्गला स्तोत्र और तीसरा कीलक स्तोत्र का पाठ करें. फिर जिस दिन आपके पास समय है , उस दिन दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों का पाठ करें. या आप चाहें तो दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों को 9 दिनों के हिसाब से बांट लें और उसके अनुसार पाठ करें. वहीं तीन कवचों का पाठ प्रतिदिन करें. दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से आपके सभी कष्ट दूर होंगे और मां दुर्गा की कृपा से मनोकामनाएं पूरी होंगी.
मंत्र जाप
मातारानी के भक्तों को नवरात्रि के समय में नवार्ण मंत्र का जाप करना चाहिए. नवार्ण मंत्र है- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे. इस मंत्र के जाप से मां सरस्वती, मां लक्ष्मी और मां काली तीन शक्तियों की पूजा हो जाती है. इस मंत्र का जाप आप रुद्राक्ष की माला से कर सकते हैं. समय की कमी में आप कम से कम एक माला यानि 108 बार इस मंत्र का जाप कर सकते हैं. नवरात्रि के 9 दिनों में रोज जपने के लिए यह मुख्य मंत्र है.
कन्या भोज
नवरात्रि में कन्या पूजा करते हैं. कहा जाता है कि कन्याओं में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों के दर्शन होते हैं. इस नवरात्रि आप क्षमतावान हैं तो प्रतिपदा से लेकर महानवमी तक अपने आसपास की कन्याओं को प्रतिदिन भोजन कराएं या फिर किसी अनाथालय में जाकर बच्चियों को भोजन कराएं. वे प्रसन्न होंगी तो आशीर्वाद मिलेगा. उनका आशीर्वाद मातारानी का आशीर्वाद होगा.
दान
नवरात्रि स्वयं की मनोकामनाओं की पूर्ति के साथ मानव सेवा का भी पर्व है. नवरात्रि में आप गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करें. उनके लिए वस्त्र, अन्न, दवाएं, फल, जूते, चप्पल आदि का प्रबंध करें. यदि आप नवरात्रि में कलश स्थापना, मंत्र जाप, पाठ आदि नहीं कर सकते हैं तो सच्चे मन से मानव और जीवों की सेवा करें. जो क्षमतावान हैं, वे खासकर कन्याओं के पालन-पोषण और शिक्षा का खर्च उठा सकते हैं. उनको स्वावलंबी बनाने में मदद कर सकते हैं.
ऐसा दान आपके मन को सुकून देगा और मानव जीवन प्राप्त करने के असल उद्देश्य को भी पूर्ण करेगा. आपका यह जीवन इस माध्यम से ही दूसरों के काम आया. आपने दंत कहानियां सुनी होंगी, जिसमें एक व्यक्ति पूरे जीवन माला फेरते रहा, लेकिन उसे मोक्ष नहीं मिला, जबकि दूसरों की सेवा करने वाला मातारानी की कृपा से जन्म और मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है.