Exclusive: पाकिस्तान छोड़ो अब बलूच लड़ाकों ने जलाए चीन के ‘हाथ’, ग्वादर जा रहा कार्गो फूंका, ड्राइवर किडनैप

Exclusive: पाकिस्तान छोड़ो अब बलूच लड़ाकों ने जलाए चीन के ‘हाथ’, ग्वादर जा रहा कार्गो फूंका, ड्राइवर किडनैप


पाकिस्तान के बलूचिस्तान से एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा देने वाली खौफनाक खबर सामने आई है. इस बार मुनीर सेना के साथ बलूच लड़ाकों ने चीन को भी लपेट लिया है. तुर्बत जिले के पास नासिराबाद इलाके में हथियारों से लैस बलूच विद्रोहियों ने ग्वादर पोर्ट की तरफ जा रहे एक बड़े कार्गो काफिले को निशाना बनाया है. भारी गोलीबारी करते हुए हमलावरों ने वाहनों को जबरन रोका, चालकों को बंदूक की नोक पर बाहर निकाला और फिर सामान से लदे दो बड़े हैवी ट्रेलरों को आग के हवाले कर दिया.

पाकिस्तान में बलूच लड़ाकों का नया तांडव

सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस भीषण हमले के दौरान हमलावरों ने एक ड्राइवर का अपहरण कर लिया है और सुरक्षा बलों के पहुंचने से पहले ही वो आसपास की दुर्गम पहाड़ियों में गायब हो गए. आग इतनी भयानक थी कि ग्वादर बंदरगाह के लिए भेजा जा रहा कीमती सामान जलकर पूरी तरह राख हो गया. इस हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की रीढ़ माने जाने वाले ग्वादर प्रोजेक्ट पर बलूच विद्रोहियों का खौफ किस कदर हावी है और अब पाकिस्तान के साथ-साथ सीधे चीन के ‘हाथ’ भी जलने लगे हैं.

एन वक्त पर फिर फेल हुई पाकिस्तानी सेना

इस वारदात की सबसे चौंकाने वाली बात पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की नाकामी रही. स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब हमलावर कार्गो गाड़ियों पर गोलियां बरसा रहे थे और ट्रकों को फूंक रहे थे, उस दौरान पाकिस्तानी सेना या पुलिस का कोई भी जवान मौके पर नहीं पहुंचा. जब तक सुरक्षा बल पहुंचे, तब तक हमलावर ड्राइवर को अगवा कर आराम से फरार हो चुके थे.

घटना के बाद अब सेना और फ्रंटियर कोर ने पूरे इलाके की घेराबंदी करके आसपास के पहाड़ी इलाकों में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है ताकि अगवा किए गए ड्राइवर को सुरक्षित वापस लाया जा सके. हालांकि अभी तक किसी बलूच उग्रवादी संगठन ने इस हमले की आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन पाकिस्तानी प्रशासन का मानना है कि इस तरह के लॉजिस्टिक नेटवर्क को निशाना बनाने के पीछे बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) या अन्य अलगाववादी गुटों का ही हाथ है.

चीन-पाक कॉरिडोर की दुखती रग: बलूच विद्रोहियों का टारगेट क्यों है ग्वादर?

ग्वादर पोर्ट केवल पाकिस्तान का एक साधारण बंदरगाह नहीं है, बल्कि ये चीन के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) और ‘चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (CPEC) का सबसे अहम दिल माना जाता है. अरब सागर के तट पर बसा ये गर्म पानी का गहरा बंदरगाह फारस की खाड़ी के मुहाने पर और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के ठीक बाहर स्थित है, जहां से दुनिया का सबसे बड़ा तेल व्यापार गुजरता है.

ग्वादर पोर्ट का मालिकाना हक भले ही पाकिस्तान सरकार के पास हो, लेकिन इसका प्रबंधन और संचालन पूरी तरह से चीनी कंपनी ‘चाइना ओवरसीज पोर्ट होल्डिंग कंपनी’ (COPHC) के हाथों में है.

बलूच अलगाववादी लंबे समय से पाकिस्तान सरकार और चीन पर आरोप लगाते आए हैं कि वो बलूचिस्तान से तेल, गैस और खनिजों जैसे प्राकृतिक संसाधनों को लूट रहे हैं और बदले में स्थानीय बलूच लोगों को केवल गरीबी, बेरोजगारी और सैन्य दमन मिला है. यही वजह है कि बलूच विद्रोही ग्वादर से जुड़ी हर सड़क, हर काफिले और वहां काम करने वाले चीनी नागरिकों व पाकिस्तानी रसद आपूर्ति को लगातार निशाना बना रहे हैं.

लॉजिस्टिक्स पर हमला: बलूच अलगाववादियों की नई रणनीति

ये हमला इस बात का साफ संकेत है कि बलूच उग्रवादियों ने अब अपनी रणनीति पूरी तरह बदल ली है. वो केवल सुरक्षा बलों की चौकियों पर ही हमले नहीं कर रहे, बल्कि ग्वादर को पूरे पाकिस्तान से जोड़ने वाले आर्थिक और व्यापारिक रास्तों को तबाह कर रहे हैं.

जब ग्वादर जाने वाले सामान से लदे ट्रेलरों को इस तरह सरेआम जलाया जाएगा और ड्राइवरों का अपहरण किया जाएगा, तो कोई भी निजी ट्रांसपोर्ट कंपनी या ड्राइवर इस रूट पर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा. इसका सीधा असर ग्वादर पोर्ट के कमर्शियल ऑपरेशन्स पर पड़ेगा और चीन द्वारा अरबों डॉलर के निवोश से बनाया जा रहा ये ड्रीम प्रोजेक्ट कागजों तक ही सीमित रह जाएगा.

चीन का बढ़ता दबाव और शहबाज सरकार की बेबसी

बलूचिस्तान में लगातार हो रहे इन हमलों से बीजिंग में बैठे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के आला अधिकारी बेहद नाराज हैं. चीन कई बार पाकिस्तान से अपने प्रोजेक्ट्स और अपने नागरिकों को पुख्ता सुरक्षा देने की मांग कर चुका है. लेकिन पाकिस्तान सरकार की आर्थिक तंगी और कमजोर सैन्य खुफिया तंत्र के कारण बलूचिस्तान में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही.

तुर्बत के पास हुआ ये हमला उस वक्त आया है जब पाकिस्तान पहले से ही भयंकर आर्थिक संकट से गुजर रहा है. ऐसे में व्यापारिक रास्तों पर हमले होना, लॉजिस्टिक्स का जलना और चीनी कंपनियों का भरोसा टूटना इस्लामाबाद के लिए किसी बड़े राष्ट्रीय आपदा से कम नहीं है.

गोलियों और धुएं के बीच फंसा ग्वादर का भविष्य

नासिराबाद की ये घटना केवल दो ट्रकों के जलने या एक ड्राइवर के अपहरण की साधारण आपराधिक वारदात नहीं है. ये चीन और पाकिस्तान के उस साझा सपने पर सीधा प्रहार है जिसके जरिए वो इस क्षेत्र में अपना आधिपत्य जमाना चाहते थे.

पहाड़ों में चलाए जा रहे पाकिस्तानी सेना के तलाशी अभियानों के बावजूद, बलूच विद्रोहियों का नेटवर्क कितना मजबूत है, इसकी गवाही जलते हुए कार्गो वाहन दे रहे हैं. जब तक पाकिस्तान सरकार बलूचिस्तान की बुनियादी समस्याओं, मानव अधिकारों और स्थानीय लोगों की जायज मांगों का स्थायी समाधान नहीं निकालती, तब तक ग्वादर जाने वाली हर सड़क पर इसी तरह बारूद का धुआं और गोलियों की गूंज सुनाई देती रहेगी.



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