देहरादूनः उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के आशारोड़ी से मोहब्बेवाला के बीच लगातार हादसे हो रहे हैं और इन हादसों को रोकने के लिए प्रशासन के सभी प्रयास अभी तक सफल नहीं हो पाए हैं. अब इसकी डिजाइन को लेकर सवाल उठने लगे हैं, जिसके लिए CRI यानी कि सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट से मदद ली जा रही है. अब CRI की विशेषज्ञ टीम मौके का निरीक्षण कर सड़क की डिजाइन, ढलान, रफ्तार नियंत्रण और सुरक्षा इंतजामों की तकनीकी समीक्षा करेगी. रिपोर्ट के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कार्य किए जाएंगे.
CRI क्या है, क्या काम करती है?
CRI, सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट देश का प्रमुख सड़क अनुसंधान एवं तकनीकी संस्थान है. जो सड़क निर्माण, हाईवे डिजाइन, सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक इंजीनियरिंग और सड़क की गुणवत्ता जैसे तकनीकी पहलुओं पर वैज्ञानिक रूप से काम करता है.
साढ़े तीन किमी का पेच क्यों बना चुनौती
दरअसल, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर सफर भले ही तेज हुआ हो. लेकिन देहरादून में आशारोड़ी से मोहब्बेवाला के बीच करीब 3.5 किलोमीटर का हिस्सा लगातार हादसों के कारण चिंता का सबब बना हुआ है. आलम ये हे कि एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद से इस हिस्से में 50 से ज्यादा हादसे हो चुके हैं, जिनमें करीब 18 लोगों की मौत हो चुकी है.
रैम्बल स्ट्रिप और ब्रेकर लगाए, फिर भी हादसे बरकरार
इस इलाके में बढ़ते हादसों के बाद इस इलाके में प्रशासन ने कई प्रयोग किए लेकिन कोई भी हादसों को रोकने में कारागार साबित नहीं हुआ. अंत में नेशनल हाईवे रूल्स के विपरीत प्रशासन ने इस इलाके में रैम्बल स्ट्रिप और ब्रेकर लगाए. लेकिन इनको लगाते ही हादसों के साथ जाम की भी समस्या इस इलाके को जूझना पड़ रहा है. हर प्रयास के बाद अब सड़क की इंजीनियरिंग भी जांच के घेरे में आ गई है और आशारोड़ी-मोहब्बेवाला हिस्से में CRI की जांच का फोकस भी इसी बात पर रहेगा कि लगातार हादसों के पीछे सड़क की डिजाइन, ढलान, रफ्तार नियंत्रण व्यवस्था या अन्य तकनीकी कारण तो नहीं हैं.
ढलान पर बढ़ती रफ्तार बनी चुनौती
आशारोड़ी से मोहब्बेवाला की ओर आने वाले हिस्से में लंबी ढलान है. ढलान पर खासकर भारी वाहन तेजी पकड़ लेते हैं. रफ्तार नियंत्रित नहीं होने पर वाहन चालकों के लिए नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो जाता है, जो हादसों का मुख्य कारण माना जाता है लगातार हादसों के बाद जरूरत व्यापक रोड सेफ्टी ऑडिट की है. ढलान पर भारी वाहनों की गति, लेन अनुशासन, ब्रेकर की डिजाइन और जगह, चेतावनी संकेतक, क्रैश बैरियर, स्ट्रीट लाइटिंग, सीसीटीवी और आपातकालीन सुविधाओं की एक साथ समीक्षा जरूरी है.
क्या बोले सीओ ट्रैफिक
वही मामले में सीओ ट्रैफिक जगदीश पंत का कहना है कि कई बार इस इलाके में जॉइंट सर्वे हुआ है. लेकिन हादसों पर कमी न होने के चलते अब CRI की मदद ली जाएगी, जिससे अब टेक्निकल खामियों पर भी वैज्ञानिक रूप से रिपोर्ट तैयार की जाएगी और जो भी खामियां होगी उन पर काम किया जाएगा.