BJP ने कैसे फाइनल किए राज्यसभा के प्रत्याशी? जानिए टिकट की रेस में कैसे पिछड़े चर्चित नाम

BJP ने कैसे फाइनल किए राज्यसभा के प्रत्याशी? जानिए टिकट की रेस में कैसे पिछड़े चर्चित नाम


लखनऊ : उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव 2026 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है. पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 8 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगा दी है. 3 अगड़े, 3 पिछड़े, 2 दलित और 2 महिला राज्यसभा प्रत्याशी बनाकर भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनावों के सियासी समीकरण सेट किए हैं. आइए आपको बताते हैं कि भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशियों के टिकट कैसे हुए फाइनल? कई दिग्गज नेता रेस में कैसे पीछे रह गए? कैसे राज्यसभा प्रत्याशी बने इसकी इनसाइड स्टोरी.

ऐसे मिली धर्मपाल सिंह को जगह

सबसे पहले धर्मपाल सिंह की बात करते हैं. वह यूपी सरकार में पशुपालन मंत्री हैं और आंवला से विधायक. दरअसल, यूपी में ओबीसी में लोध भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक है. ओबीसी में तीसरे नंबर की सबसे बड़ी जाति है. धर्मपाल सिंह पुराने भाजपा के कैडर हैं. कल्याण सिंह और धर्मपाल सिंह दो नेता यूपी में लोध के बड़े नेता माने जाते रहे हैं. यहां तक कि मंत्री रहे जब कल्याण सिंह ने भाजपा छोड़ी तो सभी बड़े लोध नेता उन्हीं के साथ चले गए थे. उनमें बीएल वर्मा भी थे. उस समय धर्मपाल सिंह ने भाजपा का साथ नहीं छोड़ा. वह राजनाथ सिंह के करीबी माने जाने लगे और  संगठन में सर्वमान्य नेता की पहचान बना ली. इसके बाद बीएल वर्मा की सीट से ही धर्मपाल सिंह का राज्यसभा का टिकट तय किया गया.

पिछले दिनों प्रदेश अध्यक्ष की रेस में भी उनका नाम सामने आ रहा था. जब राज्यसभा प्रत्याशियों का पैनल बना तो बीएल वर्मा की जगह कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह राजू के नाम पर भी चर्चा हुई. मगर, बीएल वर्मा और राजवीर सिंह के समर्थकों में गोलबंदी है. वहीं, राजवीर सिंह के लड़के संदीप सिंह यूपी सरकार में मंत्री हैं. राजनीतिक समीकरणों और अंदरूनी चर्चाओं के चलते अंत में धर्मपाल सिंह के नाम को आगे किया गया.  बीएल संतोष और भाजपा के प्रदेश नेतृत्व से चर्चा हुई कि वह नाम जो पुराना हो, गुटबाजी से दूर और लोध समाज में सर्वमान्य नेता माना जाता है उसे आगे बढ़ाया जाए. ऐसे में धर्मपाल के नाम को लेकर सर्वसम्मति बन गई.

रमाकांत ओझा का ऐसे नाम आया 

काशी क्षेत्र से ब्राह्मणों के एक नेता को राज्यसभा भेजने की आम राय पार्टी नेतृत्व में बनी तो संघ और भाजपा की प्रदेश टीम ने प्रतापगढ़ के रमाकांत ओझा का नाम दिया. पार्टी का कैडर होने के नाते और संघ की पसंद होने की वजह से रमाकांत ओझा का नाम फाइनल हुआ.

प्रकाश पाल को चुनने की ये वजह

वहीं, कानपुर के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल आरएसएस के स्वंयसेवक होने के साथ ही भाजपा के कैडर हैं. ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं. पाल बिरादरी से कोई और नाम रेस में नहीं होने से संघ और भाजपा की आम सहमति बनी. प्रकाश पाल का नाम कोर कमेटी की बैठक में सिंगल फाइनल हुआ कोई पैनल में नहीं रखा गया.

दिल्ली से लगी विद्यासागर के नाम पर मुहर

विद्यासागर सोनकर पूर्व सांसद और प्रदेश पदाधिकारी रह चुके हैं. उनका नाम प्रदेश अध्यक्ष की रेस में रहा और पैनल में भी था. उनका एमएलसी का कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा मौका नहीं दिया गया. विद्यासागर सोनकर का नाम पैनल में रखा गया जो आम राय से दिल्ली तक गया, जहां अंतिम मुहर लग गई.

आरएसएस की तरफ से आया गोपी कृष्ण पांडेय का नाम

2001 में पीएम मोदी राष्ट्रीय पदाधिकारी रहते हुए गोपी कृष्ण के घर में रुके थे. वर्ष 2022 विधानसभा चुनावों के दौरान कानपुर देहात में पीएम मोदी पहुंचे तो गोपी कृष्ण को याद किया था. संघ के काफी करीबी गोपी कृष्ण का नाम पैनल में आरएसएस की राय से आया और फिर सभी की मुहर लग गई.

कैसे चुना प्रियंका का नाम?

प्रियंका रावत बाराबंकी से भाजपा सांसद रही हैं. वर्ष 2019 में उनका सांसद का टिकट कट गया था. इसके बावजूद वह पार्टी के कामों में जुटी रहीं. पार्टी ने तय किया था अवध में एक पासी को राज्यसभा प्रत्याशी बनाना है, जिसमें प्रियंका एकदम फिट बैठीं, उनको राज्यसभा प्रत्याशी बनाया.

रामप्रताप सिंह चौहान के नाम पर सहमति

आगरा से भाजपा के विधायक रहे रामप्रताप सिंह चौहान का टिकट भाजपा ने काट दिया था. इसके बावजूद रामप्रताप लगातार पार्टी संगठन के कार्यों में जुटे रहे. उन्हें पार्टी ने दो बार प्रदेश महामंत्री बनाया. पार्टी संगठन के करीबी और संगठन कार्य में दक्ष रामप्रताप सिंह को राज्यसभा प्रत्याशी बनाया.

श्रुति गंगवार कौन हैं?

रूहेलखंड क्षेत्र में कुर्मियों के सबसे बड़े नेता रहे संतोष गंगवार की बेटी श्रुति ने पिछले दिनों केंद्रीय नेतृत्व और सीएम योगी से मुलाकात की थी. संतोष गंगवार को भाजपा ने राज्यपाल बनाया. ऐसे में पार्टी आलाकमान ने संतोष गंगवार की जगह श्रुति को राज्यसभा प्रत्याशी बना के अपने पुराने नेता के परिवार पर भरोसा जताया है.



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