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RBI MPC Meeting : रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 7 अक्टूबर, बुधवार को रेपो रेट बढ़ाने का ऐलान कर ही दिया. उन्होंने रेपो रेट में 25 आधार अंक बढ़ाने का ऐलान किया है, जिसके बाद रेपो रेट बढ़कर 5.50 फीसदी पहुंच गया है.
रेपो रेट अभी तक 5.25 फीसदी रहा था.
नई दिल्ली. रिवर्ज बैंक ने आखिरकार 43 महीनों बाद रेपो रेट बढ़ा ही दिया. महंगाई और ग्लोबल मार्केट के तमाम दबाव के बावजूद अभी तक आरबीआई ने इसे काबू में रखा था, लेकिन 7 अक्टूबर, बुधवार को आखिरकार इसमें 0.25 फीसदी रेट बढ़ा दिया है. अब रेपो रेट बढ़कर 5.50 फीसदी पहुंच गया है, जो अभी तक 5.25 फीसदी रहा था. रेपो रेट बढ़ने से होम लोन, ऑटो लोन सहित अन्य सभी तरह के खुदरा लोन की ब्याज दरें भी बढ़ सकती हैं. इसका सीधा असर मकान खरीदारों पर पड़ेगा.
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पिछले तीन दिनों से चल रही मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद 7 अक्टूबर को इसके फैसलों का खुलासा किया. उन्होंने बताया कि महंगाई के दबाव में आखिरकार रेपो रेट को बढ़ाना पड़ रहा है. गवर्नर ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी का ऐलान किया और अब प्रभावी रेपो रेट बढ़कर 5.50 फीसदी पहुंच गया है. इसका सीधा असर होम लोन, ऑटो लोन सहित अन्य सभी तरह के खुदरा कर्ज पर पड़ेगा, क्योंकि अब ज्यादातर बैंकों की ब्याज दरें रेपो रेट से ही जुड़ी होती हैं. रेपो रेट में यह बढ़ोतरी फरवरी, 2023 के बाद पहली बार की गई है.
अन्य ब्याज दरों में कोई छेड़छाड़ नहीं
गवर्नर ने बताया कि स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी यानी एसडीएफ की दरों को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा गया है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी को 5.75 फीसदी पर बनाए रखा गया है. आरबीआई ने ब्याज दरों को बढ़ाने के साथ ही अपने रुख को भी न्यूट्रल से बदलकर सख्त कर दिया है. इसका मतलब है कि आने वाले समय में अगर महगाई की ब्याज दरें नहीं सुधरीं तो रेपो रेट में और बढ़ोतरी हो सकती है.
महंगाई ने कर दिया मजबूर
आरबीआई गवर्नर ने बताया कि ग्लोबल मार्केट में जारी उठापटक और घरेलू बाजार में ईंधन महंगा होने के बाद खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों ने महंगाई का दबाव बढ़ा दिया है. इसी दबाव के कारण साढ़े तीन साल बाद पहली बार रेपो रेट बढ़ाना पड़ा है. चीनी और प्याज जैसी जरूरी चीजों के दाम बढ़ने से खुदरा महंगाई का अनुमान भी अगस्त में बढ़कर 4.8 फीसदी पहुंच गया है. जुलाई में यह अनुमान 4.50 फीसदी रहा था. हालांकि, भारत की विकास दर का अनुमान और बेहतर हुआ है और चालू वित्तवर्ष में यह 7.1 फीसदी रहने का अनुमान है. आरबीआई गवर्नर ने कहा कि दूसरी तिमाही में विकास दर 7.2, तीसरी तिमाही में 6.9 और चौथी तिमाही में 6.8 फीसदी रहने का अनुमान है.