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France Student Protest 2026: फ्रांस में स्कूलों से शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब सिर्फ शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है. देशभर में हजारों छात्र सड़कों पर हैं.कई जगह पुलिस से झड़प और आंसू गैस की घटनाएं हुई हैं और हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया है.हालात कितने गंभीर हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक धमाके में 15 साल के छात्र का हाथ उड़ गया जबकि एक अन्य 14 साल के छात्र को आंसू गैस के कनस्तर से सिर में गंभीर चोट लगी.आखिर फ्रांस के स्कूलों से शुरू हुआ यह गुस्सा इतना बड़ा आंदोलन कैसे बन गया और इसके पीछे की पूरी कहानी क्या है, आइए समझते हैं…
France Student Protest: फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं रह गया है.शिक्षकों की कमी, बढ़ती छात्र संख्या, स्कूलों में भीड़, जर्जर इमारतों और संसाधनों की कमी को लेकर शुरू हुआ विरोध अब देशभर में फैल चुका है.हजारों छात्र सड़कों पर उतर रहे हैं और कई जगह पुलिस के साथ उनकी झड़प भी हुई है.हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े हैं.
आंदोलन के दौरान कई जगह हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं.लेंस शहर में एक स्कूल के पास हुए धमाके में 15 साल के एक छात्र का हाथ उड़ गया, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया.इससे पहले 14 साल के ईडन नाम के एक छात्र के सिर पर आंसू गैस का गोला लगने की खबर सामने आई थी.उसके जबड़े में दो जगह फ्रैक्चर हुआ और उसे बड़ी सर्जरी से गुजरना पड़ा.
प्रदर्शन के दौरान अब तक कम से कम 190 छात्रों के घायल होने और 5,060 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है.गिरफ्तार लोगों में 87 प्रतिशत नाबालिग बताए गए हैं.ऐसे में यह आंदोलन अब राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है.
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फ्रांस में छात्रों का यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और स्कूलों के लिए ज्यादा फंडिंग की मांग को लेकर शुरू हुआ है.छात्रों का कहना है कि स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनके मुकाबले कक्षाएं, शिक्षक और दूसरी जरूरी सुविधाएं उसी अनुपात में नहीं बढ़ाई गई हैं.
कई स्कूलों में छात्रों की बढ़ती संख्या के कारण भीड़ बढ़ रही है.इसके साथ ही शिक्षकों की कमी और स्कूलों की खराब स्थिति भी छात्रों और शिक्षा कर्मचारियों के लिए बड़ी समस्या बन रही है.इसी वजह से छात्र सरकार से शिक्षा के लिए ज्यादा फंडिंग और स्कूलों में स्टाफ तथा संसाधनों की कमी दूर करने की मांग कर रहे हैं.उत्तरी शहर लिले में प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी ने मीडिया से कहा कि हमें उन्हें सुनना चाहिए. यह बात इस आंदोलन की मुख्य मांग को भी सामने रखती है कि सरकार छात्रों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से सुने.
इस आंदोलन की शुरुआत 21 सितंबर को पेरिस के एक स्कूल से हुई थी.वहां छात्रों ने स्कूल में स्टाफ और संसाधनों की कमी के खिलाफ विरोध शुरू किया था.बाद में स्कूल में अतिरिक्त स्टाफ भेजे जाने के बाद वहां की हड़ताल खत्म हो गई, लेकिन तब तक विरोध दूसरे इलाकों में भी फैल चुका था.इसके बाद अलग-अलग शहरों के स्कूलों में प्रदर्शन शुरू हुए और विश्वविद्यालयों के छात्र भी इस आंदोलन से जुड़ गए.
छात्र नेता मानेस नडेल के मुताबिक शुरुआती स्कूल में हड़ताल खत्म होने तक आंदोलन दूसरे इलाकों में फैल चुका था.उनका दावा है कि इतनी बड़ी संख्या में स्कूल पहले कभी किसी आंदोलन में शामिल नहीं हुए थे.पिछले एक हफ्ते के दौरान छात्रों ने सैकड़ों स्कूलों को बंद कराया.कई जगह स्कूलों की नाकेबंदी की गई और प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच झड़प भी हुई.
छात्रों के समर्थन में मंगलवार को देशभर में बड़े प्रदर्शनों की तैयारी की गई थी.प्रमुख छात्र संगठन यूनियन सिंडिकेल लिसेन ने लोगों से इन प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील की.शिक्षकों के संगठनों ने भी अपने सदस्यों से प्रदर्शन में शामिल होने को कहा.गृह मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक मंगलवार सुबह पेरिस के बाहरी इलाकों में प्रदर्शनों में करीब 86 हजार लोग शामिल हुए.दोपहर बाद राजधानी में होने वाले प्रदर्शनों में इससे भी ज्यादा लोगों के जुटने की संभावना थी.
देश के अलग-अलग शहरों में हजारों छात्रों ने सड़कों पर उतरकर शिक्षा के लिए ज्यादा फंडिंग की मांग का समर्थन किया.कई जगह छात्रों ने हाई स्कूलों का घेराव किया और हाथों में झंडे तथा प्लेकार्ड लेकर प्रदर्शन किया.एक प्लेकार्ड पर लिखा था-‘हमें गैस नहीं, हमारी बात सुनी जाए.’.आंदोलन के दौरान कई जगह छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई. स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे.कई जगह प्रदर्शनकारियों ने स्कूलों की नाकेबंदी की और कूड़ेदानों में आग लगा दी.सबसे गंभीर घटनाओं में से एक लेंस शहर में हुई जहां एक स्कूल के पास हुए धमाके में 15 साल के एक छात्र का हाथ उड़ गया.घायल छात्र को अस्पताल में भर्ती कराया गया.
इससे पहले पिछले सप्ताह 14 साल के ईडन नाम के एक छात्र के सिर पर आंसू गैस का गोला लगने की खबर सामने आई थी.इसके कारण उसके जबड़े में दो जगह फ्रैक्चर हुआ और उसे बड़ी सर्जरी करानी पड़ी.अब तक प्रदर्शन के दौरान कम से कम 190 छात्रों के घायल होने की जानकारी सामने आई है.वहीं 5,060 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.गिरफ्तार लोगों में 87 प्रतिशत नाबालिग हैं.इन आंकड़ों ने आंदोलन के हिंसक रूप लेने और पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं.