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Gold Price Prediction : साल 2026 की शुरुआत में सोने का भाव आसमान पर पहुंच गया था. लेकिन, अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से ही यह दबाव में है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अब अपने रिकार्ड हाई से 23 फीसदी गिर गया है. सर्राफा बाजार में सोने का रेट 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे आ चुका है.
वेडिंग सीजन के पीक पर बिक्री में 15 से 20 फीसदी तक का उछाल संभव है.
नई दिल्ली. त्योहारी सीजन की शुरुआत के बीच सोने के खरीदारों के लिए राहत भरी खबर आई है. जनवरी के अपने रिकॉर्ड ऑल-टाइम हाई स्तर से इंटरनेशलन मार्केट में सोना 23% टूट चुका है. इस गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी दिखा है और सर्राफा बाजार और एमसीएक्स पर गोल्ड का रेट काफी कम हुआ है. घरेलू सर्राफा बाजार में सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया है. आईबीजेए के अनुसार, आज 6 अक्टूबर को 24 कैरेट सोने का भाव 1,48,473 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा है. ऐसे में शादी-ब्याह और धनतेरस-दिवाली की तैयारियों में जुटे ग्राहकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब सोना खरीदना सही होगा?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में 28 जनवरी को 5,419 डॉलर प्रति औंस का ऐतिहासिक शिखर छूने वाला स्पॉट गोल्ड अब गिरकर 4,155 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ चुका है. कमोडिटी जानकारों का कहना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर के लगातार मजबूत होने से आई है. वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों में हुए बदलाव ने भी सोने को दबाव में ला दिया है. बाजार विश्लेषक का कहना है कि सोना कंसोलिडेशन और री-प्राइसिंग फेज से गुजर रहा है.
क्या अब खरीद ले सोना या इंतजार करें
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, च्वाइस ब्रोकिंग की कमोडिटी टेक्निकल एनालिस्ट कावेरी मोरे का कहना है कि अब सोने का वैल्यूएशन काफी आकर्षक हो गया है. अब कीमतें 1.50 लाख रुपये के स्तर से नीचे कारोबार कर रही हैं. हालांकि, दिवाली से पहले सोने का बिल्कुल निचला स्तर यानी बॉटम पकड़ने का इंतजार तो नहीं करना चाहिए. अगले कुछ हफ्तों में 3 से 4 किस्तों में सोने की खरीदारी करनी चाहिए.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने को 3,950 डॉलर प्रति औंस पर सपोर्ट मिल सकता है, जिसका मतलब है कि कीमतों में अभी थोड़ा और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. केवल वही पूंजी सोने में लगाएं जिसकी जरूरत आपको निकट भविष्य के जरूरी खर्चों के लिए न हो.
ज्वेलरी खरीदें या गोल्ड ETF में लगाएं पैसा
मोरे का कहना है कि अगर परिवार में शादी या परंपरा के लिए आभूषण खरीदने की जरूरत है, तो मौजूदा स्तरों पर जरूरत के अनुसार खरीदारी शुरू की जा सकती है. वहीं, जो लोग सिर्फ शुद्ध निवेश और रिटर्न के इरादे से सोना खरीदना चाहते हैं, उनके लिए गोल्ड ईटीएफ (Exchange Traded Funds) या डिजिटल गोल्ड अधिक सही विकल्प हैं. इनमें गहनों पर लगने वाला 10 से 25 फीसदी मेकिंग चार्ज बच जाता है.
ज्वेलर्स को 20% तक मांग बढ़ने की उम्मीद
कामा ज्वेलरी के एमडी कॉलिन शाह के अनुसार, त्योहारी और वेडिंग सीजन के पीक पर बिक्री में 15 से 20 फीसदी तक का उछाल संभव है. इस बार औसत खरीदारी का आकार 1.5 लाख से 3 लाख रुपये के दायरे में रहने की संभावना है. इस बार लोग लाइट-वेट ज्वैलरी ज्यादा खरीद सकते हैं. महंगे रेट की वजह से भारी गहनों में रुझान कम है.