संविदा स्वास्थ्यकर्मियों के नियमितीकरण आदेश को MP सरकार ने हाईकोर्ट में दी चुनौती, 27 अक्टूबर को सुनवाई

संविदा स्वास्थ्यकर्मियों के नियमितीकरण आदेश को MP सरकार ने हाईकोर्ट में दी चुनौती, 27 अक्टूबर को सुनवाई


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MP High Court News: मध्य प्रदेश सरकार ने संविदा स्वास्थ्यकर्मियों को पहली नियुक्ति की तारीख से नियमित करने के हाईकोर्ट के एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी है. जस्टिस संजय द्विवेदी के 12 सितंबर 2024 के फैसले के खिलाफ दायर रिट अपील पर अब 27 अक्टूबर को सुनवाई होगी.

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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट.

Jabalpur News: मध्य प्रदेश में संविदा स्वास्थ्यकर्मियों को उनकी पहली नियुक्ति की तारीख से नियमितीकरण का लाभ देने के मामले में कानूनी लड़ाई तेज हो गई है. राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की एकल पीठ के उस आदेश के खिलाफ रिट अपील दायर की है, जिसमें कर्मचारियों को पहली नियुक्ति से नियमित करने, वरिष्ठता देने और अन्य लाभ प्रदान करने के निर्देश दिए गए थे.

क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद हाईकोर्ट की जस्टिस संजय द्विवेदी की एकल पीठ द्वारा 12 सितंबर 2024 को सुनाए गए एक आदेश से जुड़ा है. कोर्ट ने राजेंद्र सिंह परिहार सहित अन्य संविदा स्वास्थ्यकर्मियों के पक्ष में फैसला सुनाया था. आदेश में कर्मचारियों को पहली नियुक्ति की तारीख से नियमितीकरण का लाभ देने और पदक्रम सूची में उचित वरिष्ठता तय करने के निर्देश दिए गए थे.

सरकार का तर्क और हाईकोर्ट का रुख
राज्य सरकार ने इस फैसले को रिट अपील के माध्यम से चुनौती दी है. सरकार का तर्क है कि कुछ कर्मचारियों को विशेष या अलग परिस्थितियों में लाभ मिला था. उस फैसले को बाद के अन्य सभी मामलों में समान आधार नहीं बनाया जा सकता है. अब इस विषय से जुड़े 27 से ज्यादा प्रकरणों की सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी.

इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में लंबित मामले
इस मुख्य सुनवाई का सीधा असर इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में लंबित प्रकरणों पर भी पड़ेगा. इंदौर में 18 रिट अपील और 3 रिट याचिकाएं पेंडिंग हैं. वहीं ग्वालियर खंडपीठ में 6 रिट याचिकाएं लंबित हैं. याचिका लगाने वाले कर्मचारियों में कम्पाउंडर, दवासाज और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता शामिल हैं. इन सभी ने पहली संविदा नियुक्ति की तारीख से नियमितीकरण मांगा है.

जबलपुर मुख्य पीठ में एक साथ सुनवाई की मांग
सरकार ने इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ के इन सभी मामलों को जबलपुर स्थित मुख्य पीठ में एक साथ मिलाकर सुने जाने का आग्रह किया है. बीते 6 सितंबर को जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच में इस संबंध में सुनवाई हुई थी. सरकार ने अन्य बेंच में लंबित दो याचिकाओं को भी साथ में लिस्ट करने की मांग की.

कर्मचारियों के वकील ने दिया सुप्रीम कोर्ट का हवाला
कर्मचारियों की ओर से सरकार की इस मांग का कड़ा विरोध किया गया. कर्मचारियों के वकीलों ने दलील दी कि इसी तरह के एक मामले में सरकार सुप्रीम कोर्ट तक भी जा चुकी है. कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिकाओं को लिस्ट करने का समय दिया है. मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर तय की गई है.



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