पटना. बिहार में विधान परिषद चुनाव ने गठबंधन की गांठ खोल दी है. सत्ता के लिए साथ खड़े दल अब चुनावी मैदान में एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं. महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों के बीच सीट बंटवारे का विवाद इतना गहराया कि 8 में से 6 सीटों पर गठबंधन के साथी ही आमने-सामने आ गए हैं. वहीं एनडीए के भीतर भी तस्वीर पूरी तरह अलग नहीं है. जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार के खिलाफ पार्टी विधायक अनंत सिंह ने जन सुराज के उम्मीदवार का समर्थन कर दिया है. ऐसे में 23 अक्टूबर का विधान परिषद चुनाव सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि गठबंधन की एकजुटता की भी बड़ी परीक्षा बन गया है.
इन सीटों पर भी आमने-सामने हैं RJD और कांग्रेस
पटना स्नातक सीट पर आरजेडी के दिलीप कुमार और कांग्रेस के डॉ. असदुल्लाह खान के बीच मुकाबला है. दरभंगा स्नातक सीट पर आरजेडी के अनिल कुमार झा के सामने कांग्रेस के रजनीकांत पाठक हैं. कोसी स्नातक सीट पर आरजेडी के नितेश कुमार और कांग्रेस के मनोज कुमार जायसवाल आमने-सामने हैं. पटना शिक्षक सीट पर आरजेडी के डॉ. संजीव कुमार सिंह और कांग्रेस के संजय यादव के बीच मुकाबला है. वहीं सारण शिक्षक सीट पर आरजेडी के प्रो. जयराम यादव और सीपीआई के विद्यासागर विद्यार्थी आमने-सामने हैं.
JDU में भी खुला मोर्चा, नीरज कुमार के खिलाफ अनंत सिंह
महागठबंधन की खींचतान के बीच एनडीए के प्रमुख सहयोगी जेडीयू में भी पटना स्नातक सीट को लेकर मामला दिलचस्प हो गया है. जेडीयू ने अपने मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया है, लेकिन पार्टी के विधायक अनंत सिंह ने उनके खिलाफ जन सुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह का समर्थन कर दिया है. अनंत सिंह के इस रुख के बाद जेडीयू नेतृत्व को सक्रिय होना पड़ा. पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता ललन सिंह से बातचीत की. इसके बाद अनंत सिंह को समझाने और मामले को संभालने की कोशिश हुई.
सवाल सिर्फ चुनाव का नहीं, गठबंधन की एकजुटता का भी