जिस बिना सिर वाली विष्णु मूर्ति का विवाद पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट, CJI गवई पर फेंका था जूता, अब उस पर काम शुरू

जिस बिना सिर वाली विष्णु मूर्ति का विवाद पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट, CJI गवई पर फेंका था जूता, अब उस पर काम शुरू


भोपाल. पिछले साल अक्टूबर में पूरे देश में बहस का मुद्दा बना था. यह मुद्दा चीफ जस्टिस बी.आर. गवई से जुड़ा है. गवई पर एक 72 साल के वकील राकेश किशोर ने जूता फेंका था. यह जूता उन्होंने गवई द्वारा एक पीआईएल याचिका खारिज करने की वजह से फेंका था. यह याचिका खजुराहो के जवारी मंदिर में 11वीं सदी की विष्णु प्रतिमा का गायब सिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दखल की मांग की थी. तब यह मामला बिना सिर वाले विष्णु प्रतिमा से ज्यादा राकेश किशोर की हरकत पर ज्यादा केंद्रित हो गया. लेकिन अब आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ASI) ने इस पर काम करना शुरू कर दिया.

ASI की पीआरओ और जॉइंट डायरेक्टर जनरल डॉ. नंदिनी भट्टाचार्य ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए एक्सपर्ट्स की एक टीम बनाई गई है. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, उन्होंने कहा, “ठीक से जांच-पड़ताल के बाद मरम्मत में कुछ समय लगेगा. यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट पर मौजूद विष्णु प्रतिमा 7 फीट ऊंची है और इसका सिर नहीं है.

दरअसल, चंदेल-युग की इस मूर्ति के क्षतिग्रस्त होने पर सुप्रीम कोर्ट से दखल की मांग वाली एक PIL (जनहित याचिका) दायर की गई थी. जब तत्कालीन CJI बी.आर. गवई ने इसे “पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन” (प्रचार पाने के लिए दायर याचिका) कहकर खारिज कर दिया था. 72 साल के वकील राकेश किशोर ने अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के अंदर पूर्व CJI गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की. यह घटना वकील की उस कथित निराशा से जुड़ी थी जो उन्हें हरियाणा के किसान-एक्टिविस्ट राकेश दलाल की याचिका पर कोर्ट के फैसले से हुई थी.

राकेश दलाल ने एएसआई का आभार जताया

राकेश दलाल ने खजुराहो की विष्णु प्रतिमा के पुनर्निर्माण और उसे फिर से स्थापित करने की मांग की थी. पूर्व CJI गवई का मानना ​​था कि यह मामला ASI के अधिकार क्षेत्र में आता है और कोर्ट का इससे कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए. अब राकेश दलाल ने मूर्ति को ठीक करने के ASI के कदम का स्वागत किया. उन्होंने कहा, “यह बहुत खुशी की बात है कि अधिकारी हमारी बात मानने को तैयार हो गए. हमारी धार्मिक भावनाओं को समझने के लिए सरकार और ASI का धन्यवाद किया.”

बिना सिर वाली विष्णु मूर्ति की खासियत

इस मूर्ति को चंदेल कला का एक अद्भुत नमूना माना जाता है. छोटे लेकिन बेहतरीन नक्काशी वाले जवारी मंदिर के अंदर, बलुआ पत्थर से बनी विष्णु की मूर्ति का धड़, चार हाथ और पैर तो मौजूद हैं, लेकिन सिर गायब है. मूर्ति के शरीर पर बेहतरीन नक्काशी वाले कौस्तुभ मणि, वनमाला, रत्नों से जड़ी करधनी और पायल हैं. विष्णु के दोनों ओर लक्ष्मी और गरुड़ हैं. पत्थर से बने वैष्णव दृश्य में मुख्य देवता के चारों ओर विष्णु के छोटे रूप – राम, वराह, नरसिंह, बलराम, कूर्म और कल्कि – मौजूद हैं. 1075 और 1100 ईस्वी के बीच बने इस मंदिर की खासियत इसका पतला, ऊंचा शिखर और नक्काशीदार मकर-तोरण है.

मुगलों ने की तोड़-फोड़

राकेश दलाल की याचिका में इस तोड़-फोड़ के लिए मुग़ल आक्रमणों को ज़िम्मेदार ठहराया गया था, लेकिन मूर्ति का सिर किस वजह से टूटा, इसके सही हालात का पता नहीं चल पाया है. ASI की जांच का मकसद वर्ल्ड हेरिटेज साइट में मौजूद इस प्राचीन मूर्ति की असलियत से समझौता किए बिना, उसके सिर और दूसरे क्षतिग्रस्त हिस्सों को ठीक करना है.



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