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Piyush Mishra Vs Naseeruddin Shah: जब बॉलीवुड के कलाकार पॉलिटिकल मैदान में उतरते हैं, तो सोच की चिंगारी भड़कना लाजमी है. जब एक्टर नसीरुद्दीन शाह हाल ही में मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक प्रोटेस्ट के स्टेज पर दिखे, तो उनके पुराने साथी पीयूष मिश्रा चुप रहने के अलावा कुछ नहीं कर सके. पीयूष मिश्रा ने एक तीखा और बेबाक वीडियो जारी किया, जिसमें सीधे नसीरुद्दीन शाह के दोहरे रवैये पर सवाल उठाए गए. उन्होंने पूछा कि बॉलीवुड, जो पॉलिटिकल प्रोटेस्ट पर तुरंत रिस्पॉन्स देता है, कैप्टन स्मित मच्छर जैसे असली हीरो की बहादुरी पर चुप क्यों है?
नई दिल्ली. बॉलीवुड के दो पुराने और अनुभवी एक्टर पीयूष मिश्रा और नसीरुद्दीन शाह अपनी बेबाक कला और अपने राजनीतिक और सामाजिक विचारों के लिए जाने जाते हैं. हालांकि, हाल ही में मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के बाद दोनों एक्टर्स के बीच वैचारिक मतभेद एक नए विवाद में बदल गए हैं. पीयूष मिश्रा ने एक वीडियो मैसेज जारी कर CJP के विरोध प्रदर्शन में नसीरुद्दीन शाह की मौजूदगी पर कड़ी आपत्ति जताई है. वीडियो में पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह के रुख पर तीखे सवाल उठाए हैं और बॉलीवुड के चुनिंदा राजनीतिक रुख की तीखी आलोचना की है. पीयूष मिश्रा पूछते हैं कि जब देश में बहादुरी और दुखद घटनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे उठते हैं तो इंडस्ट्री के सीनियर एक्टर चुप क्यों रहते हैं.
पीयूष मिश्रा ने अपने वीडियो की शुरुआत नसीरुद्दीन शाह को एक तीखे और व्यंग्यात्मक ट्रिब्यूट के साथ की. उन्होंने हाल ही में फ्लाईदुबई फ्लाइट 1073 में हुई भयानक घटना की ओर ध्यान दिलाया, जहां कैप्टन स्मित मच्छर ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कमाल की हिम्मत और धैर्य दिखाया. कैप्टन मच्छर ने 180 यात्रियों को ले जा रहे प्लेन को सुरक्षित रूप से लैंड कराया, जिससे सभी की जान बच गई. पीयूष मिश्रा ने सवाल किया कि सीनियर फिल्मी हस्तियां, राजनीतिक रैलियों और विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए, ऐसे सच्चे नायकों की अदम्य बहादुरी की तारीफ में एक शब्द भी क्यों नहीं कहतीं?
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी विवाद
अपनी बात जारी रखते हुए पीयूष मिश्रा ने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में हाल की घटनाओं और हिंसक स्टूडेंट विरोध प्रदर्शनों का मुद्दा उठाया. उन्होंने नसीरुद्दीन शाह के पुराने और मशहूर बयान को याद किया जिसमें शाह ने कहा था कि ‘बच्चों ने खुद उन्हें FTII या नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) के प्रोफेसरों से ज्यादा सिखाया है.’ इस पर पीयूष ने पूछा कि क्या वे बच्चे अब एक्टिंग टीचर बन गए हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स के साथ कोई नाइंसाफी या घटना हुई है, तो नसीरुद्दीन शाह जैसे सीनियर लोगों को उन स्टूडेंट्स के प्रति अपनी संवेदना जाहिर करनी चाहिए.
झारखंड की एक घटना
पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह के साथ पहले हुई अपनी एक पर्सनल बातचीत का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने नसीरुद्दीन शाह से झारखंड के लाचार और गरीब लोगों के लिए पैसे और खाने की मदद मांगी थी, तो नसीरुद्दीन ने जवाब में उन्हें एक पाकिस्तानी कवयित्री की लिखी एक कविता (नज्म) भेजी थी. इस पर पीयूष मिश्रा ने कहा कि जब आम आदमी को जिंदा रहने के लिए आटा, दाल, चावल, रोटी, गुड़ और लिट्टी-चोखा की जरूरत होती है, तो उसे फिलॉसफी वाली कविता या पिज्जा और बर्गर की जरूरत नहीं होती. सोशल मदद असली होनी चाहिए, जमीन पर होनी चाहिए, न कि सिर्फ कागज पर या दिखावटी होनी चाहिए.
‘सेलेक्टिव एक्टिविज्म’ पर गंभीर सवाल
पीयूष मिश्रा के इस तीखे वीडियो ने एक बार फिर बॉलीवुड के ‘सेलेक्टिव एक्टिविज्म’ पर गंभीर सवाल उठाए हैं. सेलेब्रिटी सिर्फ खास पॉलिटिकल मुद्दों पर ही क्यों बोलते हैं और आम लोगों से जुड़े असली मुद्दों पर चुप क्यों रहते हैं? पीयूष मिश्रा ने अपने वीडियो मैसेज के आखिर में साफ कर दिया कि वह इस तरह की बेरुखी के सामने चुप नहीं रहेंगे. उन्होंने साफ कहा कि जब भी नसीरुद्दीन शाह भविष्य में कोई उलटा पब्लिक बयान या स्टैंड लेंगे, तो उन्हें पीयूष मिश्रा से सीधा और साफ जवाब मिलेगा.