Saudi VS Houthi: MBS ने उतारे 100 जेट, हूतियों पर 324 हमले, रियाद में सऊदी-पाक-तुर्की की अग्निपरीक्षा

Saudi VS Houthi: MBS ने उतारे 100 जेट, हूतियों पर 324 हमले, रियाद में सऊदी-पाक-तुर्की की अग्निपरीक्षा


Yemen News Hindi: यमन में हूतियों के खिलाफ जंग अब और तेज हो गई है. सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने आज के ‘यमन डॉन’ ऑपरेशन में 100 लड़ाकू विमान उतारने का दावा किया है. गठबंधन के मुताबिक, ऑपरेशन शुरू होने के बाद से 324 अहम ठिकानों को तबाह किया जा चुका है. उधर हूतियों का दावा है कि पिछले 24 घंटे में सऊदी अरब ने उनके कब्जे वाले इलाकों में 106 हवाई और मिसाइल हमले किए हैं. इन हमलों के बीच आज यानी 5 अक्टूबर को रियाद में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बड़े अधिकारी बैठक कर रहे हैं. यही बैठक अब इस पूरे संकट का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है. इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजर है, क्योंकि यह तीनों देशों के बीच हाल में हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की पहली बड़ी परीक्षा मानी जा रही है.

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर यमन की लड़ाई और भड़कती है तो क्या पाकिस्तान और तुर्की सीधे सऊदी अरब के साथ खड़े होंगे? क्या पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन युद्ध में उतरने का फैसला करेंगे? यह मीटिंग ऐसे समय पर हो रही है, जब हाल ही में खबर आई थी कि पाकिस्तान की ओर से सऊदी में 25000 सैनिक तैनात किए जा सकते हैं.

100 लड़ाकू विमानों ने संभाला मोर्चा

गठबंधन सेना के आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि आज ‘Yemen Dawn’ ऑपरेशन में 100 लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया. प्रवक्ता के मुताबिक, ऑपरेशन शुरू होने के बाद से 324 अहम ठिकाने तबाह किए जा चुके हैं. गठबंधन का कहना है कि वह बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के ऊपर हवाई सुरक्षा भी दे रहा है. इतना ही नहीं, गठबंधन की तरफ से कहा गया है कि उसके विमान लगातार ऐसे ठिकानों को निशाना बना रहे हैं जो अपनी जगह बदल रहे हैं. जमीन पर लड़ रही यमनी सरकारी सेना को भी लगातार हवाई मदद दी जा रही है. गठबंधन का दावा है कि यमनी सेना को 24 घंटे हवाई सहायता मिल रही है.

सऊदी में हुआ मक्का समझौता. (Reuters)

हूतियों का दावा- 24 घंटे में 106 हमले

दूसरी तरफ हूती समूह ने सऊदी अरब पर बड़े पैमाने पर हमले करने का आरोप लगाया है. हूती मिलिट्री के प्रवक्ता याह्या सारेआ ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि पिछले 24 घंटे में हूती के कब्जे वाले इलाकों में 106 हवाई और मिसाइल हमले किए गए. उनके मुताबिक, सऊदी हमलों में यमन की राजधानी सना के अलावा अल-जौफ और ताइज जैसे इलाकों को निशाना बनाया गया. हूतियों का दावा है कि हालिया तनाव बढ़ने के बाद से सऊदी हवाई और मिसाइल हमलों की कुल संख्या 1,516 हो गई है.

सऊदी अरब में जुटेंगे तीनों देश

तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान की स्ट्रैटेजिक पॉलिटिकल एंड डिफेंस कमेटी की मीटिंग 5 अक्टूबर को रियाद में होगी. तुर्की की ओर से विदेश मंत्री हाकान फिदान, रक्षा मंत्री याशर गुलेर और चीफ ऑफ जनरल स्टाफ जनरल सेल्चुक बायरकतारोग्लू बैठक में शामिल होंगे. सऊदी अरब और पाकिस्तान के अधिकारी भी इसमें हिस्सा लेंगे. बैठक में यमन में हूती हमलों के अलावा पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा होगी. ईरान की ओर से हूतियों के साथ राजनीतिक बातचीत को लेकर दिए गए प्रस्ताव पर भी बात हो सकती है. लेकिन इस बैठक की सबसे बड़ी अहमियत मक्का समझौते को लेकर है.

मक्का समझौते की पहली बड़ी परीक्षा हूती हमलों के बीच हो रही है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि समझौते के तहत इस्लामाबाद सऊदी अरब की रक्षा करने के लिए बाध्य है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास जो भी सैन्य साधन और क्षमता उपलब्ध है, वह सऊदी अरब के लिए भी उपलब्ध होगी. यही बयान इस पूरे घटनाक्रम को बेहद महत्वपूर्ण बना देता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान ने यमन में अपने सैनिक भेजने का फैसला कर लिया है.

क्या है मक्का रक्षा समझौता?

सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने अगस्त में मक्का में यह त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौता किया था. इसकी सबसे अहम शर्त सामूहिक रक्षा से जुड़ी है. यानी तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला होता है तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा. इसी वजह से इस समझौते की तुलना NATO के आर्टिकल 5 से की जा रही है. NATO में भी एक सदस्य पर हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है. लेकिन यहां एक बड़ा फर्क समझना जरूरी है. मक्का समझौते का मतलब यह नहीं है कि हमला होते ही तुर्की या पाकिस्तान के सैनिक सीधे युद्ध के मैदान में उतर जाएंगे. प्रतिक्रिया का तरीका परिस्थितियों और उस देश की ओर से की गई डिमांड पर निर्भर करेगा, जिस पर हमला हुआ है. तीनों देशों ने सैन्य सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है. इसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा तकनीक, प्रशिक्षण और सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल शामिल है.



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