Agriculture: ग्वार में फलियां आईं, दाना भरने को नमी नहीं, खरीफ पर मौसम की मार
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Agriculture News: सीकर में बारिश के लंबे अंतराल ने जिले में खरीफ फसलों की चिंता बढ़ा दी है. सावन-भादो में अच्छी बारिश के बाद खेतों में फसलों की बढ़वार बेहतर हुई थी, लेकिन सितंबर में बारिश कम होने से मिट्टी की नमी घट गई. इसका असर अब ग्वार, बाजरा, मूंग और मोठ जैसी फसलों पर दिखाई दे रहा है. ग्वार इस समय फलियां बनने और दाना भरने की अवस्था में है, ऐसे में नमी की कमी से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है. जिले में इस बार 4.25 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है. किसानों को अब अनुकूल बारिश का इंतजार है.
सावन-भादो में अच्छी बारिश के भरोसे बोई गई खरीफ की फसल अब मौसम के बदले मिजाज से प्रभावित हो रही है. अगस्त के बाद सितंबर के पहले पखवाड़े में बारिश का अंतराल बढ़ने से खेतों में नमी कम हो गई है. इसका सीधा असर अक्टूबर में फसलों की बढ़वार, फूल आने और फलियों में दाना बनने की प्रक्रिया पर पड़ा है. सबसे ज्यादा असर ग्वार की फसल में देखने को मिल रहा है.
जिले में मानसून की शुरुआत में अच्छी बारिश होने के कारण किसानों ने बारानी जमीन में बड़े स्तर पर खरीफ फसलों की बुवाई की थी. शुरुआती बारिश के बाद खेत हरे-भरे हो गए और ग्वार, बाजरा, मूंग, मोठ, कपास सहित अन्य फसलों की बढ़वार भी अच्छी रही. किसानों को इस बार बेहतर उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन अब बारिश के लंबे अंतराल ने उनकी चिंता बढ़ा दी है.
ग्वार की फसल इस समय फलियां बनने और दाना भरने की अवस्था में पहुंच रही है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ के अनुसार इस दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी होना जरूरी है. नमी कम होने पर पौधे की बढ़वार प्रभावित होती है और फूल व फलियां कम बन सकती है. फलियों में दाना भरने की प्रक्रिया पर भी असर पड़ता है. यही कारण है कि खेतों में खड़ी ग्वार की फसल पर मौसम की मार ज्यादा दिखाई दे रही है.
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बारिश की कमी का असर मूंग और मोठ की फसल पर भी पड़ रहा है. इन फसलों में फलियां आने का दौर शुरू होने वाला है, लेकिन खेतों में नमी कम होने से कई जगह पौधों की स्थिति कमजोर होने लगी है. करीब दो महीने की हो चुकी खरीफ फसलों को इस समय बारिश की जरूरत है. यदि समय पर बारिश नहीं हुई तो उत्पादन में गिरावट आ सकती है और किसानों की मेहनत पर असर पड़ेगा.
जिले में इस बार कुल 4,25,464 हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है. इसमें बाजरा 2,25,733 हेक्टेयर, ग्वार 1,14,845 हेक्टेयर, मूंगफली 36,342 हेक्टेयर, मूंग 31,009 हेक्टेयर, चंवळा 16,810 हेक्टेयर और मोठ 1,000 हेक्टेयर में बोई गई है. खरीफ फसलों का अनुमानित उत्पादन करीब 5,95,610 मीट्रिक टन आंका गया है. अब मौसम का आगे का रुख उत्पादन के लिए अहम रहेगा.
हालांकि ग्वार में नुकसान की चिंता के बीच बाजार भाव में तेजी ने किसानों को कुछ राहत दी है. किसान शिशुपाल सिंह बेरी ने बताया कि बुवाई के बाद लगातार अच्छी बारिश होने से ग्वार की बढ़वार बेहतर हुई थी, लेकिन अब बारिश नहीं होने से ग्वार और बाजरा की फसल में नुकसान बढ़ रहा है. वहीं तेज बारिश होने पर ग्वार के पौधे गिरने का खतरा भी बना रहता है. इसलिए किसानों को संतुलित बारिश की जरूरत है.
संयुक्त निदेशक कृषि शिवजीराम कटारिया के अनुसार मौसम के प्रतिकूल रहने से खरीफ फसलों की गुणवत्ता प्रभावित हुई है. दाना बनने के समय बारिश नहीं होने से कई क्षेत्रों में उत्पादन पर भी असर पड़ा है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के अनुसार अभी हल्की बारिश फसलों के लिए फायदेमंद हो सकती है, जबकि तेज और लगातार बारिश होने पर खेतों में पानी भरने, जड़ों में ऑक्सीजन की कमी, फलियों में फफूंद और सड़न जैसी समस्याएं बढ़ सकती है.