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Anant Singh Vs Neeraj Kumar : बिहार में जेडीयू के इतिहास में शायद यह पहला मौका है जब कोई विधायक खुलेआम अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ मोर्चा खोले बैठा है और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है. इसके उलट इस मामले को एक दूसरे पर फेंका जा रहा है, जिससे जेडीयू में अंदर ही टेंशन की बात सामने आ रही है. अब पार्टी के बड़े नेता खुद कहने लगे हैं कि पार्टी के लिए ये ठीक नहीं है. पूरी खबर विस्तार से आगे पढ़िये.
जेडीयू विधायक अनंत सिंह जन सुराज के अनुज कुमार सिंह का प्रचार कर रहे हैं.
पटना. बिहार की सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड में इन दिनों एक ऐसा विवाद सामने है, जिसने पार्टी नेतृत्व के सामने असहज स्थिति पैदा कर दी है. मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ खुलेआम मोर्चा खोले हुए हैं और पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं. खास बात यह कि इतना सब होने के बावजूद अब तक उनके खिलाफ किसी कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है. इसके विपरीत, विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ जदयू नेता ललन सिंह को दी गई है. पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने स्वयं ही इस बात की जानकारी मीडिया से साझा की थी. वहीं, पार्टी के अन्य कई वरिष्ठ नेता इस बात को लेकर असहज महसूस कर रहे हैं और अब तो खुलकर कह रहे हैं कि यह विवाद पार्टी के लिए ठीक नहीं है.
अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ मैदान में अनंत सिंह
अनंत सिंह ने सार्वजनिक तौर पर नीरज कुमार के खिलाफ अपना रुख साफ कर दिया है. उन्होंने जन सुराज के प्रत्याशी अनुज कुमार सिंह को समर्थन देने का ऐलान किया है और उनके पक्ष में प्रचार करने की बात कही है. हाल के दिनों में वह अनुज सिंह के समर्थन में मैदान में भी उतर चुके हैं. ऐसे में मामला इसलिए असामान्य लग रहा है, क्योंकि अनंत सिंह जदयू के निर्वाचित विधायक हैं, जबकि नीरज कुमार उसी पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी हैं. यानी चुनावी मैदान में मुकाबला सिर्फ अलग-अलग दलों के उम्मीदवारों के बीच नहीं रह गया है, बल्कि जदयू के भीतर से ही एक विधायक अपनी पार्टी के उम्मीदवार के विरोध में सक्रिय दिखाई दे रहा है.
संजय झा ने ललन सिंह की ओर किया इशारा
जब इस विवाद पर जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से सवाल हुआ तो उन्होंने कहा कि पार्टी को दोनों नेताओं के बीच विवाद की जानकारी है. उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को अनंत सिंह और नीरज कुमार से बातचीत कर समाधान निकालने की जिम्मेदारी दी गई है. संजय झा के अनुसार, मामला ललन सिंह के क्षेत्र से भी जुड़ा है, इसलिए उन्हें दोनों नेताओं से बात करने के लिए अधिकृत किया गया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि बातचीत से रास्ता निकलेगा. इस बीच पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के स्तर से विवाद पर तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा करने के बजाय एक वरिष्ठ नेता को बातचीत के जरिए समाधान निकालने की जिम्मेदारी दी गई है.
पार्टी के बड़े नेता भी मान रहे- स्थिति असहज है
दूसरी ओर जदयू विधायक दल के नेता और मंत्री श्रवण कुमार ने भी माना है कि यह मामला पार्टी के लिए संवेदनशील है और यह स्थिति पार्टी के लिए ठीक नहीं है. उन्होंने संकेत दिया कि ललन सिंह पूरे मामले को देख रहे हैं और बातचीत पूरी होने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने भी कहा है कि बातचीत चल रही है और मामले को लेकर इंतजार करने की जरूरत है. उनका कहना है कि ललन सिंह पूरे मामले को देख रहे हैं.
पहले भी सुलह की कोशिश हो चुकी है
बता दें कि यह विवाद अचानक सामने आया मामला नहीं है. इससे पहले भी अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद को खत्म करने के लिए पार्टी स्तर पर बैठक हो चुकी है. सितंबर में दोनों नेताओं को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत के लिए बुलाया गया था. बैठक के बाद पार्टी की ओर से एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की गई, लेकिन इसके बाद भी अनंत सिंह का नीरज कुमार के खिलाफ रुख सार्वजनिक रूप से सामने आता रहा. इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने अब ललन सिंह को दोनों नेताओं के बीच बातचीत कर समाधान निकालने की जिम्मेदारी दी है.
सवाल कार्रवाई का नहीं, समाधान का क्यों?
हालांकि, यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प राजनीतिक पहलू है. अनंत सिंह सिर्फ नीरज कुमार के खिलाफ बयान नहीं दे रहे, बल्कि पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के मुकाबले दूसरे उम्मीदवार के समर्थन में सक्रिय हैं. इसके बावजूद जदयू ने फिलहाल सार्वजनिक तौर पर उनके खिलाफ कार्रवाई का रास्ता नहीं चुना है. इसके पीछे पार्टी की रणनीति क्या है, यह नेतृत्व ने स्पष्ट नहीं किया है. लेकिन इतना जरूर है कि जदयू के सामने मामला अब केवल दो नेताओं के व्यक्तिगत विवाद का नहीं रहा. ऐसे में विवाद का असर चुनावी राजनीति के साथ पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर भी पड़ सकता है.
अब नजर ललन सिंह पर
इस पूरे विवाद में अब सबसे ज्यादा नजर ललन सिंह पर टिक गई है. संजय झा ने स्पष्ट कर दिया है कि दोनों नेताओं से बातचीत कर समाधान निकालने की जिम्मेदारी उन्हें दी गई है. ऐसे में आने वाले दिनों में ललन सिंह की पहल और उनका रुख अहम होगा. ऐसे में सवाल यह कि क्या अनंत सिंह पार्टी उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ अपना अभियान रोकेंगे? क्या नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच पुराना विवाद बातचीत से खत्म होगा? या फिर यह मामला आगे भी जदयू के लिए असहज स्थिति पैदा करता रहेगा? फिलहाल इन सवालों के जवाब ललन सिंह की पहल और दोनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत पर टिके हैं.