जयपुर. राजस्थान में होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया के दौरान फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल के दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं. अलवर में 322 होमगार्ड जवानों की भर्ती के बाद दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान 24 अभ्यर्थियों के आरएससीआईटी और एनसीसी प्रमाण-पत्र फर्जी पाए गए हैं. प्रमाण-पत्रों की संबंधित स्तर पर जांच और सत्यापन के बाद इनके फर्जी होने की पुष्टि हुई. इसके बाद होमगार्ड भर्ती अधिकारी की ओर से अखेपुरा थाने में 24 अभ्यर्थियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया. वहीं बाड़मेर में भी भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर चयनित हुए 17 होमगार्ड जवानों के खिलाफ कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है.
अलवर में 24 प्रमाण-पत्र फर्जी मिले
बाड़मेर में 17 होमगार्ड जवानों पर मामला
बाड़मेर में भी होमगार्ड भर्ती से जुड़े दस्तावेजों में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर चयनित हुए 17 होमगार्ड जवानों के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज किया है. आरोप है कि भर्ती के दौरान अलग-अलग श्रेणियों से जुड़े प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए गए थे. पुलिस के अनुसार मामले में हाथमा निवासी प्रेमसिंह, देवीसिंह और सवाई सिंह, इंद्रोई निवासी भीख सिंह, दशरथ सिंह और रायपाल सिंह, पाबूसरिया निवासी हेमाराम, मौसेरी निवासी पिंटू सिंह, रामसर निवासी सुखदेव सिंह, राणासर कल्ला निवासी रमेश कुमार, नवातला जेतमाल निवासी महेंद्र पाल सिंह, शोभाला जेतमाल निवासी दशरथ सिंह, ईटादा निवासी चंदन सिंह, दुधवा निवासी भूपेंद्र सिंह, सनाउ निवासी गोविंद कुमार, भाचभर निवासी जसवंत सिंह और देदूसर निवासी नखत सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.
फर्जी दस्तावेज कहां से आए, जांच में जुटी पुलिस
दोनों जिलों में सामने आए मामलों के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल फर्जी प्रमाण-पत्रों के स्रोत का है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अभ्यर्थियों ने ये दस्तावेज खुद तैयार करवाए थे या किसी व्यक्ति अथवा नेटवर्क के माध्यम से हासिल किए थे. इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि फर्जी प्रमाण-पत्रों के जरिए भर्ती प्रक्रिया में अतिरिक्त अंक, पात्रता या अन्य किसी तरह का लाभ लिया गया था या नहीं. फिलहाल अलवर और बाड़मेर पुलिस ने संबंधित मामलों में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. दस्तावेजों के सत्यापन, संबंधित रिकॉर्ड की जांच और पूछताछ के बाद ही पूरे मामले में अभ्यर्थियों की भूमिका और किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी.