इंडिया में 12वीं के बाद कैसे बनें पायलट? जानें कितना आता है खर्च और कितनी मिलती है सैलरी

इंडिया में 12वीं के बाद कैसे बनें पायलट? जानें कितना आता है खर्च और कितनी मिलती है सैलरी


How to Become a Pilot in India: आसमान में उड़ते विमान को देखकर पायलट बनने का सपना बहुत से युवाओं का होता है, लेकिन यह करियर सिर्फ रोमांच और दुनिया घूमने तक सीमित नहीं है. एक पायलट पर विमान में बैठे सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी होती है. भारतीय पायलट स्मित मच्छार की कहानी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. हाल ही में फ्लाईदुबई की फ्लाइट में को-पायलट के साथ हुई झड़प के दौरान स्मित मच्छार पर चाकू से जानलेवा हमला हुआ. हालांकि, चाकू लगने पर घायल होने के बावजूद उन्होंने स्थिति को संभालने में अहम भूमिका निभाई और विमान में सवार 174 यात्रियों की जान बचाने में मदद की. यह घटना बताती है कि पायलट बनने के लिए विमान उड़ाने की स्किल के साथ मुश्किल समय में सही फैसला लेने की क्षमता भी जरूरी होती है.

भारत में कमर्शियल पायलट कैसे बनें?

भारत में कमर्शियल पायलट बनने के लिए उम्मीदवार को डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी DGCA से Commercial Pilot Licence (CPL) हासिल करना होता है. इसके लिए 12वीं कक्षा में फिजिक्स और मैथ्स विषय होना जरूरी है. इसके बाद उम्मीदवार को DGCA के Class 2 और Class 1 मेडिकल टेस्ट पास करने होते हैं. मेडिकल फिटनेस पूरी होने के बाद किसी DGCA से मान्यता प्राप्त फ्लाइंग स्कूल में एडमिशन लिया जा सकता है.

फ्लाइंग स्कूल में उम्मीदवार को विमान उड़ाने की ट्रेनिंग दी जाती है. CPL हासिल करने के लिए आमतौर पर कम से कम 200 घंटे की फ्लाइट ट्रेनिंग पूरी करनी होती है. इसके साथ DGCA की थ्योरी परीक्षाएं और फ्लाइट स्किल टेस्ट भी पास करना होता है. इन सभी जरूरी राउंड को पूरा करने के बाद उम्मीदवार कमर्शियल पायलट के तौर पर करियर शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है.

पायलट बनने में कितना समय लगता है?

कमर्शियल पायलट बनने की पूरी ट्रेनिंग आमतौर पर करीब 18 से 24 महीने में पूरी हो सकती है. हालांकि, यह समय हर उम्मीदवार के लिए एक जैसा नहीं होता. मौसम, विमान की उपलब्धता, फ्लाइंग स्कूल का शेड्यूल और ट्रेनिंग की स्पीड जैसी चीजों के कारण इसमें ज्यादा समय भी लग सकता है.

पायलट ट्रेनिंग में कितना खर्च आता है?

पायलट बनने की ट्रेनिंग काफी महंगी होती है, क्योंकि इसमें विमान, एविएशन फ्यूल, इंस्ट्रक्टर, सिम्युलेटर और दूसरे तकनीकी संसाधनों पर खर्च होता है. उपलब्ध अनुमान के अनुसार, सिर्फ CPL फ्लाइंग ट्रेनिंग की लागत करीब 35 लाख से 55 लाख रुपये तक हो सकती है. इसके अलावा ग्राउंड स्कूल की फीस करीब 1.5 लाख से 4 लाख रुपये तक हो सकती है.

DGCA की परीक्षाओं और लाइसेंसिंग पर करीब 50 हजार से 1.5 लाख रुपये तक खर्च हो सकता है, जबकि मेडिकल टेस्ट का खर्च लगभग 10 हजार से 50 हजार रुपये तक बताया जाता है. अगर उम्मीदवार मल्टी-इंजन रेटिंग लेना चाहता है तो इसमें करीब 3 लाख से 8 लाख रुपये और लग सकते हैं. वहीं Airbus या Boeing जैसे विमानों के लिए Type Rating की लागत करीब 12 लाख से 25 लाख रुपये या उससे ज्यादा हो सकती है. इस तरह एक्स्ट्रा ट्रेनिंग को शामिल करने पर पायलट बनने की कुल लागत काफी बढ़ सकती है. कई उम्मीदवार इस खर्च के लिए एजुकेशन लोन या एयरलाइन कैडेट पायलट प्रोग्राम का सहारा लेते हैं.

कमर्शियल पायलट की कितनी होती है सैलरी?

पायलट की सैलरी उसके एक्सपीरियंस, पोस्ट, एयरलाइन, विमान और उड़ाए जाने वाले रूट पर निर्भर करती है. करियर की शुरुआत में Junior First Officer के तौर पर करीब 1.5 लाख से 3.5 लाख रुपये प्रति माह की कमाई हो सकती है. वहीं, एक्सपीरियंस बढ़ने के साथ First Officer की मंथली सैलरी करीब 2.5 लाख से 4.5 लाख रुपये तक पहुंच सकती है.

इसके बाद Senior First Officer के पद पर पायलट करीब 4 लाख से 6 लाख रुपये प्रति माह कमा सकता है. वहीं, एक्सपीरियंस और जरूरी फ्लाइंग घंटे पूरे होने के बाद Airline Captain बनने पर मासिक कमाई करीब 6 लाख से 10 लाख रुपये तक हो सकती है. वहीं International Captain के तौर पर एक्सपीरियंस पायलटों की कमाई 10 लाख से 15 लाख रुपये या उससे ज्यादा प्रति माह तक पहुंच सकती है. इसके अलावा, सीनियर और एक्सपीरियंस पायलट सालाना 1 करोड़ रुपये से अधिक भी कमा सकते हैं.

भारत में बढ़ रही है पायलटों की मांग

भारत में हवाई यात्रा का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. एयरलाइंस नए विमान अपने बेड़े में शामिल कर रही हैं और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय रूट भी बढ़ रहे हैं. देश में नए एयरपोर्ट का विकास, यात्रियों की बढ़ती संख्या और क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के कारण आने वाले वर्षों में पायलटों की जरूरत बढ़ सकती है.

हालांकि, इस करियर में सिर्फ अच्छी सैलरी ही नहीं देखनी चाहिए. पायलट बनने के लिए मेडिकल फिटनेस, महंगी ट्रेनिंग, लगातार सीखने की आदत और बहुत बड़ी जिम्मेदारी उठाने की क्षमता जरूरी होती है. स्मित मच्छार की घटना भी दिखाती है कि एक कमर्शियल पायलट का काम सिर्फ विमान उड़ाना नहीं है, बल्कि आपात स्थिति में शांत रहकर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उसकी बड़ी जिम्मेदारी होती है.



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