मार्च-अप्रैल में बुवाई, सितंबर-अक्टूबर में तैयार. देशभर में बढ़ रही कुगती के देसी राजमाह की मांग, मौसम की मार से किसान चिंतित

मार्च-अप्रैल में बुवाई, सितंबर-अक्टूबर में तैयार. देशभर में बढ़ रही कुगती के देसी राजमाह की मांग, मौसम की मार से किसान चिंतित


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चम्बा के कुगती गांव का देसी राजमाह अपने स्वाद और गुणवत्ता के कारण देशभर में लोकप्रिय हो रहा है. यह किसानों के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण साधन बन गया है, हालांकि इस साल अधिक बारिश से फसल प्रभावित हुई है

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स्थानीय किसानों के लिए राजमाह अब केवल पारंपरिक फसल नहीं, बल्कि आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुका है.

चम्बा. हिमाचल प्रदेश के जिला चम्बा के भरमौर विधानसभा क्षेत्र के अंतिम गांव कुगती का देसी राजमाह अपने लाजवाब स्वाद, गुणवत्ता और विशिष्ट पहचान के चलते देशभर के बाजारों में अपनी जगह बना चुका है. ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में प्राकृतिक परिस्थितियों के बीच तैयार होने वाला यह राजमाह दिल्ली, पंजाब सहित देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंच रहा है, जहां इसकी अच्छी मांग बनी हुई है. स्थानीय किसानों के लिए राजमाह अब केवल पारंपरिक फसल नहीं, बल्कि आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुका है.

दरअसल, कुगती जैसे बर्फीले और दुर्गम क्षेत्र में राजमाह की खेती करना किसानों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. सीमित खेती के मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच किसानों को बीज की बुवाई से लेकर फसल की कटाई तक कड़ी मेहनत करनी पड़ती है. यहां किसान मार्च-अप्रैल में राजमाह की बुवाई करते हैं, जबकि कई महीनों की मेहनत के बाद सितंबर-अक्टूबर में फसल तैयार होती है.

इस वर्ष मौसम की मार ने बढ़ाई किसानों की चिंता

स्थानीय किसानों के अनुसार इस वर्ष अधिक बारिश और मौसम में लगातार बदलाव के कारण राजमाह की फसल प्रभावित हुई है. खेतों में लंबे समय तक नमी बने रहने से उत्पादन पर असरपड़ने की आशंका है. कुछ स्थानों पर फसल को नुकसान भी पहुंचा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. इसके बावजूद किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि मौसम के अंतिम चरण में परिस्थितियां अनुकूल रहने पर उन्हें बेहतर पैदावार मिल सकेगी.

नकदी फसल के रूप में उभरा कुगती का राजमाह

समय के साथ कुगती क्षेत्र में खेती के तौर-तरीकों में बदलाव आया है. राजमाह अब किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण नकदी फसल के रूप में उभरकर सामने आया है. शोध अध्ययनों के अनुसार क्षेत्र में राजमाह की खेती का रकबा लगातार बढ़ा है. इसकी प्रमुख वजह अन्य पारंपरिक फसलों की तुलना में इससे मिलने वाली बेहतर आय को माना जा रहा है.कुगती के किसानों की मेहनत और यहां की भौगोलिक परिस्थितियों में तैयार होने वाला देसी राजमाह अपनी अलग पहचान बना रहा है. हालांकि, दुर्गम क्षेत्र होने के कारण किसानों को फसल को बाजार तक पहुंचाने में परिवहन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

किसानों का कहना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा और सरकार की ओर से विपणन एवं परिवहन सुविधाओं को और मजबूत किया गया, तो कुगती का देसी राजमाह भविष्य में देशभर के बाजारों में और अधिक पहचान बना सकता है. इससे न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि क्षेत्र की पारंपरिक खेती को भी नई दिशा मिलेगी.



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