Saudi Arabia VS Houthi: पहले मदीना की बिजली सप्लाई पर हमला, अब सऊदी के तेल टर्मिनल पर अटैक, हूतियों पर क्यों भड़के मुस्लिम देश?

Saudi Arabia VS Houthi: पहले मदीना की बिजली सप्लाई पर हमला, अब सऊदी के तेल टर्मिनल पर अटैक, हूतियों पर क्यों भड़के मुस्लिम देश?


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Yemen News Hindi: यमन के हूतियों पर सऊदी अरब में लगातार हमले करने के आरोप लग रहे हैं. पहले मदीना में मस्जिद-ए-नबवी को बिजली देने वाले तैबा पावर स्टेशन पर ड्रोन हमले का मामला सामने आया, जिस पर UAE, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और तुर्किये ने नाराजगी जताई.

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सऊदी अरब में मदीना पावर स्टेशन पर हुआ हमला (बाएँ/Reuters) और सऊदी अरामको साइट पर कथित हमला (दाएं/AI Enhanced/X)

यमन के हूती विद्रोहियों पर सऊदी अरब को निशाना बनाने के आरोप लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. पहले मदीना में पैगंबर की मस्जिद यानी मस्जिद-ए-नबवी को बिजली देने वाले तैबा पावर स्टेशन पर ड्रोन हमले का मामला सामने आया, जिस पर UAE, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और तुर्किये ने कड़ी नाराजगी जताई. अब सऊदी अरब के यानबू इंडस्ट्रियल पोर्ट में मौजूद सऊदी अरामको के नॉर्थ टर्मिनल पर हवाई हमले और आग लगने की शुरुआती खबरें आई हैं. हालांकि, इस ताजा हमले की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. इसी बीच सऊदी गठबंधन ने दक्षिणी इलाकों की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों और चार ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है.

यानबू क्यों है सऊदी अरब के लिए अहम?

यानबू सऊदी अरब के पश्चिमी तट पर लाल सागर के किनारे बसा एक बड़ा औद्योगिक और तेल निर्यात केंद्र है. यहां से सऊदी अरब दुनिया के दूसरे हिस्सों में कच्चा तेल भेजता है. सऊदी अरामको का यानबू नॉर्थ टर्मिनल इसी काम के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, इस टर्मिनल से रोजाना करीब 15 लाख बैरल कच्चा तेल लोड करने की क्षमता है. इसकी एक और रणनीतिक अहमियत है. सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों से कच्चा तेल ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए यानबू तक पहुंचाया जा सकता है. यहां से तेल लाल सागर के रास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक जाता है. यानी होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव या समुद्री रास्तों में रुकावट होने पर यानबू सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराता है. अरब न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर टर्मिनल पर हमले की ताजा खबर सही साबित होती है तो यह खास तौर पर अहम होगा. वजह यह है कि इससे पहले यानबू तक तेल पहुंचाने वाले ढांचे को निशाना बनाए जाने की खबरें आई थीं, लेकिन इस बार सीधे बंदरगाह के अंदर मौजूद तेल टर्मिनल पर हमले की बात कही जा रही है.

पैगंबर की मस्जिद को बिजली देने वाले स्टेशन पर हमला

यानबू की खबर से पहले सऊदी अरब ने मंगलवार को मदीना में एक पावर स्टेशन पर हूतियों के ड्रोन हमले का आरोप लगाया था. सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, जांच और ड्रोन के मलबे की जांच के बाद गठबंधन इस नतीजे पर पहुंचा कि हमले की योजना हूतियों ने बनाई और उसे अंजाम भी उन्होंने ही दिया. यह स्टेशन मदीना की पैगंबर की मस्जिद यानी मस्जिद-ए-नबवी और आसपास की दूसरी नागरिक सुविधाओं को बिजली सप्लाई करता है. गठबंधन के मुताबिक, हमले में एक ट्रांसफॉर्मर बंद हो गया, लेकिन शहर की पूरी बिजली व्यवस्था पर इसका असर नहीं पड़ा. इस हमले को लेकर एक जरूरी बात यह है कि निशाना मस्जिद की इमारत नहीं, बल्कि उसे बिजली देने वाला वितरण स्टेशन बताया गया है. हूतियों की ओर से इस आरोप को खारिज किया गया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों ने इसे सऊदी अरब के पहले के आरोपों से ध्यान हटाने की कोशिश बताया.

मुस्लिम देशों ने हूतियों पर जताई नाराजगी

मदीना के पावर स्टेशन पर हमले के आरोप के बाद कई मुस्लिम देशों ने सऊदी अरब के समर्थन में बयान जारी किए. संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन ने इस हमले की निंदा की. तुर्किये ने भी हमले को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी. खाड़ी सहयोग परिषद यानी GCC के महासचिव जासेम अल-बुदैवी ने कहा कि पैगंबर की मस्जिद को बिजली देने वाले स्टेशन को निशाना बनाना गंभीर तनाव बढ़ाने वाला कदम है. उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की सुरक्षा और उसके पवित्र स्थलों की सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों की सामूहिक सुरक्षा का हिस्सा है. UAE ने इसे सऊदी संप्रभुता का उल्लंघन और देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया. बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से हूती हमलों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की अपील की. कुवैत और जॉर्डन ने भी सऊदी अरब के साथ एकजुटता दिखाई.

दरअसल, इस नाराजगी की वजह सिर्फ एक बिजली स्टेशन पर हमला नहीं है. मामला मदीना के धार्मिक महत्व से जुड़ा है. अगर किसी ऐसी जगह को निशाना बनाया जाता है जो मस्जिद-ए-नबवी जैसी पवित्र जगह को बिजली देता है, तो इसका असर सऊदी अरब की सीमाओं से बाहर भी महसूस होता है.



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