Pinglu Canal of China: चीन में इन दिनों एक खास नहर की चर्चा जोरों पर है. यहां के दक्षिणी हिस्से में पिंगलू नहर को आम जनता के लिए खोल दिया गया है. करीब 134.2 किलोमीटर लंबी यह नहर चीन के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से को समुद्र और खास तौर पर साउथ ईस्ट एशिया के बाजारों तक पहुंचने का नया रास्ता देती है. पहाड़ों के बीच तैयार किए गए पिंगलू नहर की तुलना कई बार मिस्त्र के स्वेज नहर (Suez Canal) से की जा रही है. इंजिनियरिंग के इस खास नमूने को लेकर हर एक बात समझ लेते हैं.
चीन ने एक बड़े इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट पिंगलू नहर को 16 सितंबर 2026 को जहाजों के मूवमेंट के लिए खोल दिया. यह मानव निर्मित नहर दक्षिणी चीन के गुआंग्शी क्षेत्र में बनाई गई है. इसका मकसद चीन के दक्षिण-पश्चिमी अंदरूनी इलाकों को सीधे समुद्र और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों से जोड़ना है.
पिंगलू नहर की तुलना स्वेज नहर से इसलिए की जा रही है क्योंकि दोनों ही मानव निर्मित जलमार्ग असल में व्यापार के लंबे रास्ते को छोटा करने का काम करते हैं. हालांकि दोनों का भौगोलिक रोल अलग है. स्वेज नहर पर गौर करें तो ये भूमध्य सागर और लाल सागर को जोड़ती है, जबकि पिंगलू नहर चीन की नदी प्रणाली को समुद्र से जोड़ती है.
क्या है पिंगलू नहर?
पिंगलू नहर चीन के गुआंग्शी झुआंग इलाके में स्थित है. यह उत्तर में शिजियांग नदी के जल सिस्टम को दक्षिण में बेइबू की खाड़ी से जोड़ती है. यह चीन का 1949 के बाद नैशनल लेवल पर नियोजित पहला बड़ा नदी से समुद्र को जोड़ने वाला नहर प्रोजेक्ट बताया गया है.
नहर की लंबाई 134.2 किलोमीटर है और इसे करीब 5 हजार टन तक के जहाजों के लिए डिजाइन किया गया है. इसके जरिए दक्षिण-पश्चिम चीन के माल को पारंपरिक रास्ते की तुलना में समुद्र तक पहुंचने के लिए लगभग 560 किलोमीटर कम दूरी तय करनी होगी.
पहाड़ों और ऊंचाई के बीच कैसे बनी?
पिंगलू नहर बनाना सामान्य नहर खोदने जैसा काम नहीं था. इसके उत्तरी और दक्षिणी हिस्से के बीच पानी के स्तर में करीब 65 मीटर का अंतर है. जहाजों को इस ऊंचाई के अंतर से पार कराने के लिए नहर में 3 बड़े नेविगेशन हब मादाओ, किशी और छिंगनियान बनाए गए हैं.
इन जगहों पर शिप लॉक लगाए गए हैं. इन्हें एक तरह से पानी के विशाल लिफ्ट की तरह समझ सकते हैं. जहाज लॉक में प्रवेश करता है, फिर पानी का स्तर बढ़ाया या घटाया जाता है और फिर जहाज अगले लेवल तक पहुंच जाता है. इस प्रॉजेक्ट पर करीब 72.7 अरब युआन यानी लगभग 10.8 अरब डॉलर रकम खर्च हुआ है. इसका निर्माण अगस्त 2022 में शुरू हुआ था.
पिंगलू नहर से चीन को क्या फायदा होगा?
चीन के मुताबिक यह नया जलमार्ग दक्षिण-पश्चिमी चीन से दक्षिण-पूर्व एशिया तक व्यापार को आसान बना सकता है. पारंपरिक रास्तों की तुलना में जलमार्ग की दूरी 560 किलोमीटर से ज्यादा कम होगी. लॉजिस्टिक्स लागत में करीब 18 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक कमी आने का अनुमान है. हर साल परिवहन लागत में 5 अरब युआन से ज्यादा की बचत का अनुमान है.
युन्नान, गुइझोउ और चीन के दूसरे दक्षिण-पश्चिमी इलाकों को समुद्री व्यापार तक बेहतर पहुंच मिलेगी. यह नहर चीन के न्यू इंटरनैशनल लैंड सी ट्रेड कॉरिडोर का हिस्सा है, जिसका मकसद चीन के अंदरूनी इलाकों को ASEAN और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना है.
स्वेज नहर और पिंगलू में क्या है अंतर?
यहां एक बात समझना जरूरी है. पिंगलू नहर स्वेज नहर की हूबहू कॉपी नहीं है. यहां समानता मुख्य रूप से व्यापारिक भूमिका में है.
- स्वेज नहर: मिस्र में बनी एक आर्टिफिशियल, समुद्र-स्तरीय जलमार्ग है. 193 किलोमीटर लंबी ये नहर भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है. यह काफी बड़े जहाजों के लिए विकसित किए गए हैं. इससे यूरोप और एशिया का समुद्री रास्ता छोटा हो गया है. जो भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है. इससे जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी छोर यानी केप ऑफ गुड होप से घूमने की जरूरत नहीं पड़ती है.
- पिंगलू नहर: चीन के अंदरूनी नदी नेटवर्क को समुद्र से जोड़ती है. यानी यह किसी दो समुद्रों को जोड़ने की बजाय चीन के विशाल अंदरूनी आर्थिक क्षेत्र को समुद्री बंदरगाह तक पहुंचने का छोटा रास्ता देती है. यह चीन के गुआंग्शी इलाके से होकर गुजरती है. 134 किलोमीटर लंबी यह नहर नदियों के सिस्टम को समुद्र से जोड़ती है. बेइबू खाड़ी में यह समंदर में समा जाती है. इसमें 5 हजार टन तक के जहाज जा सकते हैं. चीन के दक्षिण पश्चिम इलाके की पहुंच समुद्र तक आसान हो जाती है.
इंसानों का बनाया शॉर्टकट है असली समानता
पिंगलू और स्वेज को एक साथ समझने का सबसे आसान तरीका है. प्रकृति के मौजूदा जलमार्गों के बीच इंसानों ने ऐसा रास्ता बनाया, जिससे व्यापारिक दूरी और समय कम हो सके. स्वेज ने दो समुद्रों के बीच सीधा रास्ता बनाया, जबकि पिंगलू ने चीन के अंदरूनी नदी तंत्र से समुद्र तक पहुंच को आसान किया है. यही वजह है कि पिंगलू को चीन के लिए एक महत्वपूर्ण रिवर टू सी ट्रेड कॉरिडोर माना जा रहा है.
इसलिए इसे चीन की स्वेज नहर कहना एक तुलना है, आधिकारिक नाम या तकनीकी समानता नहीं है. दोनों की इंजीनियरिंग, भौगोलिक स्थिति और जहाजों के संचालन का सिस्टम अलग है. लेकिन दोनों का बेसिक आइडिया व्यापार के लिए पानी का मानव निर्मित रास्ता तैयार करना असल में एक जैसा है.