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Indore News: इंदौर में रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है. एक बुजुर्ग महिला लता बाई की मौत के बाद उसके चार बेटे अंतिम संस्कार के लिए सामने नहीं आए. महिला को अपनी जिंदगी के कई महीने वृद्धाश्रम में गुजारने पड़े. बाद में जिन लोगों का लता बाई से खून का कोई रिश्ता नहीं था. उन्होंने अंतिम संस्कार के सारे फर्ज निभाए.
इंदौर से शर्मसार करने वाली कहानी
(रिपोर्ट-मिथिलेश गुप्ता)
Indore News: इंदौर में रिश्तों और इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है. सिलिकॉन सिटी की गणेश रेसिडेंसी में रहने वाली लता बाई के निधन के बाद उनके चारों बेटे अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए. मां की अंतिम विदाई के वक्त जब बेटे पीछे हट गए, तब समाजसेवी संस्था प्रीयु फाउंडेशन और जानकी वृद्धाश्रम ने आगे बढ़कर अंतिम फर्ज निभाया. रीजनल पार्क में पूरे सम्मान और विधि-विधान से लता बाई का अंतिम संस्कार किया गया.
बताया जा रहा है कि लता बाई ने अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी और जेवर बेचकर फ्लैट खरीदा था. संस्था के मुताबिक बाद में उनके एक बेटे ने कथित तौर पर फ्लैट अपने नाम करवा लिया और लता बाई को घर से बाहर कर दिया. इसके बाद वह बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने को मजबूर हो गईं.
वृद्धाश्रम में रह रही थीं लता बाई
लता बाई की स्थिति की जानकारी मिलने पर प्रीयु फाउंडेशन के अजय नागदा ने पहल की. उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया और उन्हें जानकी वृद्धाश्रम में आश्रय दिया गया. करीब आठ महीने तक वृद्धाश्रम में उनकी देखभाल की गई. तबीयत बिगड़ने पर उन्हें एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया.
बेटों ने मुखाग्नि देने से किया इनकार
संस्था के मुताबिक ब्रह्मकुमारी ज्योति दीदी के जरिए चारों बेटों को मां के निधन की सूचना दी गई, लेकिन उन्होंने अंतिम संस्कार में शामिल होने और मुखाग्नि देने से इनकार कर दिया. इसके बाद संस्था के सदस्यों ने ही लता बाई की पार्थिव देह की अंतिम प्रक्रिया पूरी की और रीजनल पार्क में पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया.
एक मां की जिंदगी भर की जमा पूंजी से लेकर आखिरी विदाई तक का यह मामला कई सवाल छोड़ गया है. जिन चार बेटों से मां को अंतिम समय में साथ की उम्मीद थी, वहां कोई आगे नहीं आया और आखिरकार समाजसेवी संस्था ने बेटे का फर्ज निभाया.