UPSC History, Subhas Chandra Bose ICS exam: UPSC के 100 साल: सुभाष चंद्र बोस ने 1920 में दी थी ICS परीक्षा, चौथे नंबर पर आए थे नेताजी

UPSC History, Subhas Chandra Bose ICS exam: UPSC के 100 साल: सुभाष चंद्र बोस ने 1920 में दी थी ICS परीक्षा, चौथे नंबर पर आए थे नेताजी


UPSC completed 100 years: संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC के 100 साल पूरे होने पर दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संस्था के इतिहास से जुड़ी एक खास घटना का जिक्र किया.उन्होंने समारोह में सुभाष चंद्र बोस का नाम लिया और उस गैलरी का भी भ्रमण किया जिसमें बोस के 1920 में उस दौर की सिविल सर्विस परीक्षा देने से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की गई है.जिससे एक बार फ‍िर सुभाष बाबू का किस्‍सा सबको याद आ गया.

आपको बता दें कि उस समय अंग्रेजों का शासन था और परीक्षा में संस्कृत का पेपर भी होता था.सुभाष चंद्र बोस ने वह संस्कृत का पेपर दिया था.आज जिस परीक्षा को हम यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्‍जामिनेशन (UPSC Civil Services Examination)के नाम से जानते हैं सुभाष चंद्र बोस ने यूपीएससी की स्‍थापना से छह साल पहले 1920 में इंडियन सिविल सर्विसेज (Indian Civil Service)यानी ICS की ओपन कॉम्पिटिटिव परीक्षा दी थी.इसी परीक्षा के जरिए ब्रिटिश भारत की सिविल सर्विस में भर्ती होती थी.UPSC की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी.

1920 में लंदन में दी थी ICS की परीक्षा

सुभाष चंद्र बोस 15 सितंबर 1919 को इंग्लैंड के लिए रवाना हुए थे.वे अक्टूबर 1919 में वहां पहुंचे और कैंब्रिज में पढ़ाई शुरू की.उनके सामने एक तरफ अपनी पढ़ाई थी और दूसरी तरफ ICS परीक्षा की तैयारी.बोस की अपनी आत्मकथा एन इंडियन पिलग्रिम (An Indian Pilgrim)में दर्ज जानकारी के मुताबिक 1920 में उन्होंने लंदन में होने वाली सिविल सर्विसेज (Civil Service)की ओपन कॉम्पिटिटिव परीक्षा में हिस्सा लिया. परीक्षा जुलाई 1920 की शुरुआत में शुरू हुई और करीब एक महीने तक चली.बाद में 1921 में अपने भाई को लिखे एक पत्र में बोस ने खुद लिखा कि उन्होंने अगस्त 1920 में सिविल सर्विसेज एग्‍जामिनेशन (Civil Service Examination)पास की और चौथा स्थान हासिल किया.इस परीक्षा का परिणाम सितंबर 1920 के आसपास आया था.बोस ने परिणाम आने के बाद अपने भाई को बताया था कि उन्हें परीक्षा में चौथा स्थान मिला है.

परीक्षा में कौन-कौन से विषय थे?

उस समय ICS की परीक्षा आज की यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा जैसी नहीं थी.बोस को जिन विषयों की तैयारी करनी पड़ी उनमें इंग्लिश कंपोजिशन, संस्‍कत,फ‍िलॉसिफी, इंग्लिश लॉ,पॉलिटिकल सांइस, मॉर्डन यूरोपियन हिस्‍ट्री, इंग्लिश हिस्‍ट्री, इकोनॉमिक्‍स और जियोग्राफी शामिल थे. भूगोल के साथ सर्वे और नक्शा बनाने यानी काट्रोग्राफी की तैयारी भी करनी थी यानी संस्कृत उस परीक्षा का बाकायदा एक विषय था.ब्रिटिश दौर की ICS परीक्षा में संस्कृत से जुड़े सवालों में अनुवाद, गद्य रचना और वैदिक-संस्कृत व्याकरण जैसे हिस्से भी शामिल थे. उस समय की आधिकारिक परीक्षा व्यवस्था से जुड़े रिकॉर्ड में संस्कृत के लिए अलग पेपर का उल्लेख मिलता है.

संस्कृत के पेपर में बोस से हुई एक बड़ी गलती

सुभाष चंद्र बोस ने अपनी आत्मकथा में इस घटना को खुद लिखा है.उन्होंने बताया कि संस्कृत के पेपर में उन्हें करीब 150 पक्के अंक गंवाने पड़े.वजह यह थी कि अंग्रेजी से संस्कृत में अनुवाद करने वाला सवाल उन्होंने अच्छी तरह हल किया था, लेकिन पहले उसका रफ ड्राफ्ट तैयार कर लिया.बोस को लगा कि अभी समय है और वह रफ में लिखे अनुवाद को उत्तर-पुस्तिका में साफ-साफ उतार देंगे लेकिन जब परीक्षा खत्म होने की घंटी बजी तब तक वह पूरे अनुवाद को उत्तर-पुस्तिका में नहीं उतार पाए थे. परीक्षा समाप्त होते ही उत्तर-पुस्तिका जमा करनी पड़ी. इस तरह उन्होंने अपने ही आकलन के मुताबिक करीब 150 अंक गंवा दिए.

इतनी बड़ी गलती के बाद भी चौथा स्थान

संस्कृत के पेपर में करीब 150 अंक गंवाने के बाद बोस को खुद लग रहा था कि उनका चयन नहीं होगा.अपनी आत्मकथा में उन्होंने लिखा कि उनकी तैयारी भी उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं थी और परीक्षा में कई ऐसे प्रतिभाशाली विद्यार्थी शामिल हुए थे जिन्होंने लंबे समय तक तैयारी की थी.

लेकिन नतीजा बिल्कुल अलग 

सितंबर 1920 में जब परिणाम आया तो सुभाष चंद्र बोस पूरी प्रतियोगी परीक्षा में चौथे स्थान पर रहे. उनके लिए यह परिणाम खुद भी चौंकाने वाला था.बाद में उन्होंने अपने भाई को लिखा कि उन्हें लगातार चौथे स्थान पर आने के लिए बधाइयां मिल रही थीं.उनकी उपलब्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे सिर्फ एक विषय में नहीं बल्कि इतिहास, मनोविज्ञान, तर्कशास्त्र, दर्शन और राजनीतिक अर्थव्यवस्था जैसे विषयों में भी अच्छा प्रदर्शन करने में सफल रहे. ब्रदर्स अगेंस्‍ट द राज (Brothers Against the Raj)में दर्ज विवरण के मुताबिक वे इंग्लिश कंपोजिशन (English Composition)में भी शीर्ष प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवारों में थे.

क्या बोस ने ICS की नौकरी ज्वाइन कर ली थी?

यह कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है.1920 में परीक्षा पास करने के बाद बोस के सामने ब्रिटिश सरकार की सिविल सर्विस में जाने का रास्ता खुल गया था लेकिन ICS में केवल इस प्रतियोगी परीक्षा में सफल होना ही अंतिम चरण नहीं था.आगे की प्रक्रिया में 1921 की परीक्षा और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना था.उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के मुताबिक अंतिम चरण में भारतीय कानून, इतिहास, भारतीय भाषा और अन्य विषयों के साथ राइडिंग टेस्‍ट भी शामिल था.इसी दौरान बोस के मन में यह सवाल तेजी से गहराने लगा कि क्या वे ब्रिटिश सरकार की सेवा में रहकर अपने देश के लिए वह काम कर पाएंगे जो वे करना चाहते थे.1921 में उन्होंने अपने बड़े भाई शरत चंद्र बोस को पत्र लिखकर अपने मन की स्थिति बताई. उनका मानना था कि सिविल सर्विस में रहकर वे उस तरह देश की सेवा नहीं कर पाएंगे जैसा वे करना चाहते थे. उन्होंने अंततः ICS से अलग होने का फैसला किया.

1921 में ICS से इस्तीफा

बोस ने 1921 में ICS से इस्तीफा दे दिया यानी जिस परीक्षा में उन्होंने चौथा स्थान हासिल किया था उस सफलता को उन्होंने सरकारी नौकरी के रूप में आगे नहीं बढ़ाया.नेताजी ट्रस्‍ट के ऐतिहासिक विवरण के अनुसार उन्होंने 1920 में ICS की प्रतियोगी परीक्षा में चौथा स्थान हासिल किया और 1921 में सिविल सर्विस की अपनी राह छोड़कर भारत लौट आए.उनके अपने पत्रों से भी यह साफ होता है कि वे नौकरी और राष्ट्रीय सेवा के बीच के सवाल को लेकर गंभीर थे.फरवरी 1921 में उन्होंने लिखा था कि वे सरकारी सेवा में जाने की बजाय राष्ट्रीय काम में खुद को लगाना चाहते हैं.

1920 की ICS परीक्षा और UPSC में क्या संबंध है?

आज की UPSC की कहानी 1 अक्टूबर 1926 से शुरू होती है जब Public Service Commission की स्थापना हुई थी.बोस ने जिस परीक्षा में हिस्सा लिया था वह ब्रिटिश शासन के दौर की Indian Civil Service यानी ICS की प्रतियोगी परीक्षा थी. आज की सिविल सेवा परीक्षा के इतिहास को समझने में यह घटना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उस दौर की भारतीय सिविल सर्विस व्यवस्था और उसमें भारतीय युवाओं की भागीदारी की कहानी बताती है. UPSC की शताब्दी के मौके पर PM मोदी का बोस का जिक्र इसी ऐतिहासिक कड़ी को सामने लाता है.



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