शिमला. हिमाचल प्रदेश में किन्नौर जिले के सांगला और शिमला जिले के डोडरा-क्वार के बीच स्थित रूपिन दर्रा वाले इलाके में 26 सितंबर को हुई भारी बर्फबारी के बाद 2,000 से अधिक भेड़-बकरियों के बर्फ के नीचे दब जाने की आशंका है. चरवाहों का दावा है कि बड़ी संख्या में भेड़-बकरियां बर्फ के नीचे दब गई हैं.
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बुधवार को बताया कि शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, करीब 2,000 जानवर फंसे हुए हैं. हालांकि, नुकसान का असल अंदाजा तभी लग पाएगा जब बर्फ पिघलेगी और वहां जानवरों की पूरी गिनती की जाएगी.
उन्होंने बताया कि हाल में किन्नौर के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बारिश और बर्फबारी हुई. उस समय, चरवाहे सर्दियों के लिए अपने जानवरों के साथ निचले इलाके की ओर जा रहे थे. रूपिन दर्रा पार करते समय अचानक भारी बर्फबारी होने लगी, जिससे जानवर आगे नहीं बढ़ पाए और कई जानवर बर्फ में दब गए.
नेगी ने यहां संवाददाताओं को बताया कि घटना की खबर मिलने पर उन्होंने डोडरा-क्वार के उप-मंडलीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को बचाव दल गठित करने का निर्देश दिया. इसके बाद, स्थानीय चरवाहों, होम गार्ड, पुलिस और राजस्व विभाग के कर्मचारियों को मिलाकर एक टीम बनाई गई. टीम बुधवार को रूपिन दर्रा के सबसे ऊंचे स्थान पर पहुंची और सैटेलाइट फोन के जरिए प्रशासन के संपर्क में है. मंत्री के अनुसार, वहां तीन फुट से अधिक बर्फ जमा हो गई है.
उन्होंने बताया कि चरवाहों के अनुसार, लगभग 2,000 भेड़-बकरियां बर्फ के नीचे दब गई हैं. अभी बर्फ के बीच कुछ बड़े जानवरों के केवल सींग ही दिखाई दे रहे हैं, जबकि छोटे जानवरों, यानी भेड़ों और बकरियों की स्थिति का अभी पता नहीं चल सका है. नेगी ने कहा कि इस घटना में कोई जनहानि होने की खबर नहीं है.
बर्फबारी शुरू होने पर कुछ चरवाहे तो लौट आए, लेकिन जो लोग पहले ही रूपिन दर्रा पार कर चुके थे, उनके लिए नीचे उतरना मुमकिन नहीं था. भारी बर्फबारी की वजह से जानवर भी आगे नहीं बढ़ पाए और वहीं फंस गए. बचाव टीम जमीनी हालात का जायजा ले रही है.
राजस्व मंत्री ने कहा कि संबंधित विभागों के अधिकारियों की एक और टीम जल्द ही नुकसान का विस्तृत आकलन करने के लिए भेजी जाएगी. उन्होंने कहा कि नुकसान का सटीक आकलन किये जाने के बाद, प्रभावित चरवाहों को राहत सहायता देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार नुकसान की भरपाई के लिए एक विशेष राहत पैकेज के जरिए भी मदद देने की कोशिश करेगी. गौर रहे कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा को रुपिन पास जोड़ता है.