Last Updated:
Hukka Bar News : लखनऊ हाईकोर्ट की बेंच ने हुक्का बार के संचालन को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ किया कि रेस्टोरेंट, कैफे या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान के निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र में भी ग्राहकों को हुक्का उपलब्ध नहीं कराया जा सकता. हुक्का तैयार करना, तंबाकू भरना, अंगारे लगाना, ग्राहक तक पहुंचाना और अंगारे बदलना भी सेवा के दायरे में आएगा. कोर्ट ने हुक्का बार से जुड़ी सभी याचिकाएं खारिज कर दीं और कहा कि गैर धूम्रपान करने वालों का स्वच्छ हवा में सांस लेने का मौलिक अधिकार महत्वपूर्ण है.
धूम्रपान क्षेत्र में भी हुक्का नहीं दिया जा सकता..
लखनऊ : लखनऊ में हुक्का बार के संचालन को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ किया है कि रेस्टोरेंट, कैफे या किसी अन्य पब्लिक प्लेस में बनाए गए तय धूम्रपान क्षेत्र में भी ग्राहकों को हुक्का उपलब्ध कराना या हुक्का की सेवा देने की कानूनन इजाजत नहीं है. हाईकोर्ट ने हुक्का बार से संबंधित मुख्य याचिका समेत सभी संबद्ध याचिकाओं को खारिज कर दिया. याचिकाकर्ताओं की ओर से मांग की गई थी कि वैध खाद्य प्रतिष्ठान का लाइसेंस रखने वाले रेस्टोरेंट को तय धूम्रपान क्षेत्र में हुक्का उपलब्ध कराने की अनुमति दी जाए और पुलिस को उनके कारोबार में दखलंदाजी से रोका जाए.
धूम्रपान क्षेत्र में भी हुक्का नहीं दिया जा सकता
हाईकोर्ट ने कहा कि तय धूम्रपान क्षेत्र पब्लिक प्लेसों पर धूम्रपान प्रतिबंध का एक सीमित अपवाद है. इसका मतलब यह नहीं है कि वहां किसी तरह की सेवा उपलब्ध कराई जा सकती है. कोर्ट के अनुसार, साल 2017 में नियमों में किए गए संशोधन के बाद नियमों में इस्तेमाल किए गए ‘कोई अन्य सेवा नहीं’ शब्दों की जगह ‘कोई सेवा नहीं’ किया गया. इसका दायरा व्यापक है. कोर्ट ने साफ किया कि हुक्का तैयार करना, उसमें तंबाकू भरना, अंगारे लगाना, हुक्का ग्राहक तक पहुंचाना या उसके अंगारे बदलना जैसी गतिविधियां भी सेवा के दायरे में आती हैं.
तैयार हुक्का देकर ग्राहक को खुद चलाने की दलील भी खारिज
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई थी कि अगर ग्राहक को तैयार हुक्का दे दिया जाए और वह खुद उसका इस्तेमाल करे तो इसे सेवा देने के बजाय उपकरण किराए पर देने के रूप में माना जाना चाहिए. हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. कोर्ट ने कहा कि हुक्का तैयार करने और उसके संचालन की प्रक्रिया में ही सेवा का तत्व निहित है. केवल ग्राहक को खुद हुक्का चलाने देने से उस गतिविधि की कानूनी प्रकृति नहीं बदल जाती.
हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निकायों को हुक्का बार के संचालन के लिए अलग लाइसेंस जारी करने का अधिकार नहीं है. यानी किसी रेस्टोरेंट या खाद्य प्रतिष्ठान के पास अन्य वैध लाइसेंस होने मात्र से उसे हुक्का बार संचालित करने का अधिकार नहीं मिल जाता.
कोर्ट ने कहा कि सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम के तहत पुलिस को प्रतिबंधों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए तलाशी, जब्ती और दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार है. हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि हुक्का बार का संचालन और रेस्टोरेंट की ओर से ग्राहकों को हुक्का उपलब्ध कराना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है.
कोर्ट ने व्यापार करने के अधिकार और सार्वजनिक स्थान पर गैर-धूम्रपान करने वालों के स्वच्छ हवा में सांस लेने के मौलिक अधिकार के बीच भी अंतर स्पष्ट किया. कोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक स्थान पर गैर-धूम्रपान करने वालों के स्वच्छ हवा में सांस लेने के मौलिक अधिकार को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए. इस फैसले के साथ लखनऊ बेंच ने हुक्का बार से जुड़ी मुख्य याचिका और सभी संबद्ध याचिकाओं को खारिज कर दिया.