एक मुलाकात की खातिर 1300 किमी का सफर! किराना दुकान की कमाई से साइकिल पर निकला धोनी का फैन

एक मुलाकात की खातिर 1300 किमी का सफर! किराना दुकान की कमाई से साइकिल पर निकला धोनी का फैन


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Neeraj Malviya Cycle Journey: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले का 27 वर्षीय नीरज मालवीय महेंद्र सिंह धोनी से मिलने के लिए 1300 किलोमीटर की साइकिल यात्रा पर निकला है. वह अपनी किराना दुकान से पैसे बचाकर यह यात्रा कर रहा है और प्रतिदिन 70 किलोमीटर साइकिल चला रहा है.

Neeraj Malviya Cycle Journey: क्रिकेट के महान खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी भले ही खेल से दूर हो गए हैं लेकिन आज भी लोग उनकी एक झलक देखने के लिए लालायित रहते हैं. महेंद्र सिंह धोनी के फैन उनसे मिलने के लिए कुछ भी कर जाते हैं. ऐसे ही मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले से आने वाला 27 वर्षीय नीरज मालवीय भी 1300 किलोमीटर की साइकिल यात्रा कर धोनी से मिलने के लिए निकल पड़ा है. 25 सितंबर से शुरू हुई यह यात्रा 28 सितंबर तक सागर पहुंच चुकी है. वह पिछले चार दिनों में ढाई सौ किलोमीटर का सफर तय कर चुका है. 10 अक्टूबर तक झारखंड रांची पहुंचने का लक्ष्य बनाया है. नीरज रोजाना 65 से 70 किलोमीटर साइकिल चला रहा है.

नीरज अंडर 23 मध्य प्रदेश अकादमी तक क्रिकेट खेल चुका है और अभी अपने जिले में ही प्रैक्टिस करता है. साल 2025 में राजस्थान रॉयल्स में भी ट्रायल दिया था और कैंप तक उसका सिलेक्शन भी हो गया था. आगे भी वह मेहनत करने में जुटा हुआ है. नीरज कहता है कि जब भी उसके क्रिकेट लाइफ में उतार-चढ़ाव आता है तो वह महेंद्र सिंह धोनी के ही वीडियो देखता है. उनके इंटरव्यू को सुनता है और इन वीडियो की वजह से वह काफी मोटिवेट होता है. नीरज ने 8 साल की उम्र से क्रिकेट खेलना शुरू किया था अब तक वह ऑलराउंडर की रूप में दो बार आईपीएल में ट्रायल दे चुका है.

5-6 सालों से धोनी से मिलने का प्रयास
वह पिछले 5-6 सालों से महेंद्र सिंह धोनी से मिलने अलग-अलग तरह के प्रयास कर चुका है. इस बार साइकिल से मिलने के लिए निकल पड़ा है और नीरज का कहना है कि वह मेहनत तो पूरी कर रहा है. अब अगर उसकी किस्मत होगी. तो धोनी से मुलाकात हो जाएगी और नहीं होगी तो वह लौट आएगा और आगे भी प्रयास करता रहेगा उसका ड्रीम है कि वह एक बार धोनी से जरूर मिले.

नीरज ने बताया कि वह राजगढ़ जिले के सारंगपुर कस्बे में आने वाले मऊ पढ़ाना गांव का रहने वाला है. उसके पिता कालूराम मालवीय टीचर हैं और वह खुद 12वीं तक की पढ़ाई किए हुए हैं. इसके बाद किराना की दुकान खोल ली थी. पिछले चार-पांच महीने से किराना दुकान से होने वाली बचत को सेव करके रख रहा था. ताकि जब वह यात्रा पढ़ने के लिए तो उसके खर्चे में मदद मिल सके. हालांकि नीरज का कहना है कि रास्ते में यात्रा के दौरान अच्छे-अच्छे लोग मिल रहे हैं जो कहीं पर चाय पिला देते हैं तो कोई नाश्ता कर देता है. कोई खाना खिला देता है और कोई पैसे भी दे देता है.



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