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भारत और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाजों की टक्कर हाल के हफ्तों में हुई थी. अब उसी अरब सागर में पाकिस्तान ने हंगोर क्लास पनडुब्बी की ताकत दिखाई है. पहली बार उसने अपनी इस पनडुब्बी से लाइव हथियार फायरिंग की हुई. उसने लंबी दूरी के एक टार्गेट को सटीक निशाना मारा.
पाकिस्तान की पनडुब्बी.
अरब सागर में भारत और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाजों की टक्कर हुई थी. अब करीब दो हफ्ते बाद पाकिस्तान ने उसी समुद्री इलाके में अपनी नई पनडुब्बी की ताकत दिखाई है. पाकिस्तान नौसेना की पहली हंगोर क्लास पनडुब्बी ने PNS/M HANGOR से 27 सितंबर को नॉर्थ अरबियन सी में पहली बार असली हथियार की फायरिंग की. पनडुब्बी ने लंबी दूरी के एक टार्गेट पर एंटी-शिप क्रूज मिसाइल दागी. पाकिस्तान ने इसे अपनी समुद्री ताकत का बड़ा परीक्षण बताया है.
भारत-पाकिस्तान के जहाजों की हुई थी टक्कर
पानी के नीचे पाकिस्तान की नई ताकत
पाकिस्तान की नई हंगोर क्लास पनडुब्बी ने पहली बार इस तरह की फायरिंग की है. पाकिस्तान के सैन्य मीडिया विंग ISPR के मुताबिक PNS/M HANGOR ने लंबी दूरी के लक्ष्य को एंटी-शिप क्रूज मिसाइल से सटीक निशाना बनाया. पाकिस्तान के नौसेना प्रमुख एडमिरल नावेद अशरफ ने फायरिंग देखी और समुद्र के अंदप युद्ध क्षमता बढ़ाने को रणनीतिक रूप से अहम बताया.
PNS/M HANGOR को चीन के साथ रक्षा सहयोग के तहत तैयार किया गया है. यह पनडुब्बी जून में कराची पहुंची थी. पाकिस्तान कुल 8 हंगोर क्लास पनडुब्बियां नौसेना में शामिल करने का प्लान कर रहा है. इन पनडुब्बियों में आधुनिक युद्ध प्रणालियां, सेंसर, एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन यानी AIP तकनीक और कम दिखाई देने वाली यानी स्टील्थ क्षमता जैसी खूबियां बताई गई हैं.
हंगोर क्लास क्यों अहम है?
पनडुब्बी की सबसे बड़ी ताकत यही होती है कि वह समुद्र की सतह के नीचे रहकर लंबे समय तक अपनी मौजूदगी छिपा सकती है. AIP तकनीक ऐसी पनडुब्बियों को सामान्य डीजल-इलेक्ट्रिक ऑपरेटेड की तुलना में ज्यादा लंबे समय तक पानी के अंदर रहने में मदद करती है. इसका मतलब यह है कि किसी नौसेना के लिए समुद्र में निगरानी, गुप्त तैनाती और जहाजों के खिलाफ हमला करने की क्षमता बढ़ सकती है.
भारत के लिए इसका मतलब क्या?
भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री सीमा पर तनाव जमीन की तरह लगातार दिखाई नहीं देता, लेकिन दोनों देशों की नौसेनाएं अरब सागर में सक्रिय रहती हैं. हाल की INS Kolkata-PNS Hunain टक्कर ने दिखाया कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भी दोनों नौसेनाओं की गतिविधियों के दौरान गलत अनुमान या खतरनाक नजदीकी से स्थिति बिगड़ सकती है. 1991 के भारत-पाकिस्तान समझौते का अनुच्छेद 10 अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों को एक-दूसरे से कम से कम 3 नॉटिकल मील, यानी करीब 5.6 किलोमीटर की दूरी बनाए रखने की बात कहता है, ताकि दुर्घटना का खतरा कम हो.