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Elon Musk Jensen Huang Loss : एलन मस्क और जेन्सेन हुआंग को लगी इस बड़ी चपत की मुख्य वजह अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के नतीजे रहे हैं. अमेरिकी संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी के मजबूत नियंत्रण के बाद निवेशकों में खलबली मच गई. अमेरिकी शेयर बाजार धड़ाम हो गया. इस वजह से मस्क और हुआंग ने एक ही दिन में 8.44 लाख करोड़ रुपये गवां दिए.
मस्क की कुल संपत्ति 9% से अधिक गिरकर 800 अरब डॉलर के स्तर से नीचे आ गई है.
नई दिल्ली. देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश को चलाने के लिए पूरे साल जितने बजट की जरूरत होती है, लगभग उतनी रकम दुनिया के दो सबसे रईस कारोबारियों ने महज चंद घंटों में गंवा दी. अमेरिकी शेयर बाजार में आए एक भूचाल ने टेस्ला-स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क और एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग की जेब से 8.44 लाख करोड़ रुपये (करीब 94.8 अरब डॉलर) साफ कर दिए. यूपी का सालाना मूल बजट करीब 9.13 लाख करोड़ रुपये है. गुरुवार को मस्क की कंपनी टेस्ला का शेयर 11.5% तो एनवीडिया का 9.3% लुढ़क गया था.
गुरुवार को दिन अमेरिकी टेक दिग्गजों के लिए किसी डरावने सपने जैसा साबित हुआ. अमेरिका में मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत के बाद अमेरिकी शेयर बाजारों में ऐसी भगदड़ मची की सिर्फ एक कारोबारी सत्र में निवेशकों के करीब 3 लाख करोड़ डॉलर डूब गए. सबसे बड़ा झटका झेला दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने. उनकी नेटवर्थ में एक ही दिन में करीब 79.7 अरब डॉलर (लगभग 7.10 लाख करोड़ रुपये) की भारी गिरावट आई. वहीं, एनवीडिया के मुखिया जेन्सेन हुआंग को 15.1 अरब डॉलर यानी करीब 1.34 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा. इन दोनों के कुल नुकसान का जोड़ ₹8.44 लाख करोड़ बैठता है.
एलक मस्क के हाथ से छूटा ट्रिलियनेयर का ताज
एक महीने पहले ही 1,000 अरब डॉलर यानी ट्रिलियन डॉलर क्लब में दोबारा कदम रखने वाले मस्क की कुल संपत्ति 9% से अधिक गिरकर 800 अरब डॉलर के स्तर से नीचे आ गई है. वहीं, ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स में हुआंग टॉप-10 से बाहर होकर 9वें से सीधे 13वें पायदान पर खिसक गए. उनकी कुल संपत्ति सिमटकर 150.9 अरब डॉलर रह गई है. केवल यही दोनों नहीं, ओरेकल के को-फाउंडर लैरी एलिसन को भी 10.1 अरब डॉलर की चपत लगी और उनकी कंपनी के शेयर 6.9% टूट गए.
डेमोक्रेट्स की जीत बनी आफत
एलन मस्क और जेसन हुआंग को लगी इस बड़ी चपत की मुख्य वजह अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के नतीजे रहे हैं. अमेरिकी संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी के मजबूत नियंत्रण के बाद निवेशकों में खलबली मच गई. डेमोक्रेट्स की ओर से बड़े AI डेटा सेंटरों के निर्माण पर कड़े नियम और पर्यावरण संबंधी अंकुश लगाने की आशंकाएं तेज हो गई हैं. चूंकि एनवीडिया जैसी कंपनियों का पूरा कारोबार इन डेटा सेंटरों को हाई-परफॉर्मेंस सेमीकंडक्टर चिप सप्लाई करने पर टिका है, इसलिए नियम सख्त होने के डर से निवेशकों ने ताबड़तोड़ बिकवाली शुरू कर दी.